नई दिल्ली: कोरोना वायरस का LAMBDA वैरिएंट को डेल्टा से भी ज्यादा खतरनाक और जानलेवा बताया जा रहा है।। कोरोना वायरस के डेल्टा वैरिएंट ने दुनिया में तबाही मचा दी, इस वैरिएंट ने भारत में कोरोना की दूसरी लहर तहत लाखों लोगों की जान ली और आज भी इस डेल्टा वैरिएंट को स्वास्थ्य अधिकारियों ने वैरिएंट ऑफ कंसर्न की श्रेणी में रखा हुआ है। डेल्टा के बाद अब कोरोना वायरस के लैम्बडा वैरिएंट को सबसे ज्यादा खतरनाक बताया जा रहा है।
फिलहाल,''भारत में अब तक कोरोना वायरस का LAMBDA वैरिएंट नहीं पाया गया है| सूत्रों ने बताया,''रत में अब तक कोरोना वायरस का LAMBDA वैरिएंट नहीं पाया गया है|
बता दें,''मलेशिया के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोरोना के लांबडा वैरिएंट को डेल्टा से भी ज्यादा खतरनाक और जानलेवा बताया है। यह वैरिएंट दुनियाभर में कोरोना के नए मामले बढ़ने के पीछे एक बड़ी वजह माना जा रहा है। मलेशियाई स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, अभी तक 30 देशों में इस वैरिएंट का पता लगा है, जिनमें से एक ब्रिटेन भी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी LAMBDA को 'वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट' माना है जिसका मतलब है अभी वैरिएंट के असर को लेकर गहन जांच किया जाना जरूरी है।
मलेशिया के स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसे वैरिएंट ऑफ कंसर्न की श्रेणी में डाल दिया है। मंत्रालय ने जानकारी दी कि अबतक 30 से ज्यादा देशों में लैम्बडा वैरिएंट के मामले मिले हैं। मलेशिया के स्वास्थ्य मंत्रालय ने सोमवार को ट्वीट किया और बताया कि लैम्बडा स्ट्रेन पेरू में सबसे पहले पाया गया, यह दुनिया में सबसे ज्यादा मृत्युदर वाला देश है।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने जानकारी दी कि ब्रिटेन में भी लैम्बडा वैरिएंट के कुछ मामले सामने आए हैं। बता दें कि कुछ स्वास्थ्य अधिकारी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि ये वैरिएंट डेल्टा की तुलना में ज्यादा संक्रामक हो सकता है। पैन अमेरिकी स्वास्थ्य संगठन के हवाले से बताया गया कि पेरू में मई और जून के दौरान कोरोना वायरस के दर्ज किए गए कुल मामलों में से 82 फीसदी मामलों में लैम्बडा वैरिएंट पाया गया था।
इसके अलावा चिली में मई और जून में दर्ज किए गए कुल मामलों में से 31 फीसदी मामलों में लैम्बडा वैरिएंट की पुष्टि हुई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पहले ही लैम्बडा वैरिएंट को दक्षिण अमेरिका में वैरिएंट ऑफ कंसर्न घोषित कर दिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा कि लैम्बडा बाकी म्यूटेंट्स से ज्यादा आक्रामक है और एंटीबॉडी पर तेज हमला करता है।
पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड के मुताबिक ब्रिटेन में लैम्बडा के अबतक छह मामले सामने आए हैं। ब्रिटेन के स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, फिलहाल इस बात का कोई सबूत नहीं है कि इस वैरिएंट के चलते अधिक गंभीर बीमारी हो सकती है या ये टीकों को भी बाइपाइस कर सकता है।
भारत में नहीं लांबडा वैरिएंट का केस: हाल ही में लांबडा वैरिएंट ऑस्ट्रेलिया में पाया गया है। यह ब्रिटेन के साथ ही 30 देशों में मौजूद है लेकिन इससे जुड़े मामलों की संख्या अभी भी कम है। ब्रिटेन में भी 6 मामले मिले और ये सभी अंतरराष्ट्रीय सफर से लौटे लोगों में पाया गया है। हालांकि, अभी तक भारत या उसके पड़ोसी देशों में इस वैरिएंट से जुड़ा कोई केस नहीं पाया गया है। लेकिन वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट बताने का मतलब ही यही है कि अभी इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है और संभवतः यह कई देशों में फैल चुका है। हालांकि, फ्रांस, जर्मनी, यूके और इटली जैसे देशों में इससे जुड़े मामले मिले हैं, जहां से कई यात्री भारत आते हैं.
'वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट' है लांबडा: विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्लूएचओ ने इसी साल 14 जून को लांबडा को 'वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट' घोषित किया था। लेकिन दक्षिण अमेरिकी देश से शुरू होकर 30 देशों में पहुंचने के बावजूद लांबडा को अमेरिका के सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल ऐंड प्रिवेंशन (CDC) ने अभी तक वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट घोषित नहीं किया है।
वैक्सीन को करता है बेअसर: पेरू में किए गए एक शुरुआती अध्ययन में यह दावा किया गया है कि लांबडा वैरिएंट आसानी से चीन की बनाई कोरोनावैक वैक्सीन को बेअसर कर देता है। हालांकि, अभी तक इस अध्ययन की गहन समीक्षा किया जाना बाकी है तो इसके निष्कर्षों को अंतिम सच नहीं माना जा सकता।