नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के जरिए देश को संबोधित किया। अपने संबोधन की शुरुआत प्रधानमंत्री ने माघ पूर्णिमा के पर्व से की। उन्होंने कहा कि,''“हमारे शास्त्रों में कहा गया है :- “माघे निमग्ना: सलिले सुशीते, विमुक्तपापा: त्रिदिवम् प्रयान्ति ।।” अर्थात, माघ महीने में किसी भी पवित्र जलाशय में स्नान को पवित्र माना जाता है| माघ महीने और इसके सामाजिक, आध्यात्मिक महत्व की चर्चा संत रविदास जी के नाम के बिना पूरी नहीं होती है। संत रविदास जी ने समाज में व्याप्त विकृतियों पर हमेशा खुलकर अपनी बात कही। ये मेरा सौभाग्य है कि मैं संत रविदास जी की जन्मस्थली वाराणसी से जुड़ा हुआ हूं|
मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने कहा कि,''जल हमारे लिए जीवन, आस्था और विकास की धारा है, पानी एक तरह से पारस से भी ज़्यादा महत्वपूर्ण है। पानी के संरक्षण के लिए हमें अभी से ही प्रयास शुरू कर देने चाहिए, 22 मार्च को विश्व जल दिवस भी है|अब से कुछ दिन बाद जल शक्ति मंत्रालय द्वारा जल शक्ति अभियान 'कैच द रेन' शुरू किया जा रहा है|
प्रधानमंत्री ने कहा कि,आज राष्ट्रीय विज्ञान दिवस है। आज का दिन भारत के महान वैज्ञानिक, डॉक्टर सी.वी. रमन जी द्वारा की गई 'रमन इफेक्ट' खोज को समर्पित है| जब हम विज्ञान की बात करते हैं तो कई बार इसे लोग भौतिक विज्ञान और रसायन विज्ञान या फिर लैब तक ही सीमित कर देते हैं, लेकिन विज्ञान का विस्तार इससे कहीं ज़्यादा है और आत्मनिर्भर भारत अभियान में विज्ञान की शक्ति का बहुत योगदान है|
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा,''जब हम आसमान में अपने देश में बने लड़ाकू विमान तेजस को कलाबाजियां खाते देखते हैं, जब भारत में बने टैंक, मिसाइलें हमारा गौरव बढ़ाते हैं। जब हम दर्जनों देशों तक मेड इन इंडिया कोरोना वैक्सीन को पहुंचते देखते हैं तो हमारा माथा और ऊंचा हो जाता है|
उन्होंने कहा,''असम में हमारे मंदिर प्रकृति के संरक्षण में अपनी अलग ही भूमिका निभा रहे हैं। आप हमारे मंदिरों को देखेंगे तो पाएंगे कि हर मंदिर के पास तालाब होता है। इनका उपयोग विलुप्त होते कछुओं की प्रजातियों को बचाने के लिए किया जा रहा है। असम में कछुओं की सबसे अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं: PM
उन्होंने कहा,''हमारे यहां बहुत से भारतीय खेल हैं लेकिन उनमें कमेंट्री कल्चर नहीं आया है और इस वजह से वो लुप्त होने की स्थिति में हैं। मैं खेल मंत्रालय और निजी संस्थानों से भारतीय खेलों की अधिक से अधिक भाषाओं में अच्छी कमेंट्री करने पर विचार करने का आग्रह करता हूं|