नई दिल्ली: संसद के शीतकालीन सत्र को लेकर सदन के पटल की रणनीति तय करने के लिए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के अध्यक्ष और राज्यसभा के नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कल सुबह 9 बजकर 45 मिनट पर समान विचारधारा वाले विपक्षी पार्टी के नेताओं की बैठक बुलाई है।
बता दें कि,संसद का शीतकालीन सत्र 7 दिसंबर से शुरू होगा और यह 29 दिसंबर को समाप्त होगा| इस सत्र में 17 बैठकें होंगी| संसद सत्र से पहले सरकार ने आज सोमवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई थी, जिसमें कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, द्रमुक, बीजद, आप सहित 31 दलों के सदन के नेताओं ने हिस्सा लिया| सरकार ने बैठक में आश्वस्त किया कि वह लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति की अनुमति से नियमों के तहत विपक्ष के उठाये मुद्दों पर चर्चा कराने को तैयार है|
कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने सत्र के दौरान विपक्षी दलों ने महंगाई, बेरोजगारी, चीन से लगी सीमा की स्थिति, कॉलेजियम, केंद्र राज्य संबंध एवं संघीय ढांचे का विषय एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को आरक्षण पर अदालती फैसले सहित कुछ अन्य मुद्दों को उठाने एवं चर्चा कराने के लिए पर्याप्त समय देने की मांग की है|
सरकार हर चर्चा के लिए तैयार:अर्जुन राम मेघवाल
शीतकालीन सत्र से पहले हुई सर्वदलीय बैठक पर केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा,''बैठक में सभी दलों ने अपनी बातें रखी हैं। स्पीकर महोदय तय करेंगे कि किस बिल पर चर्चा होगी। सरकार हर चर्चा के लिए तैयार है। हमने विपक्ष से अपील की है कि सत्र को सफल बनाएं, सार्थक चर्चा हो|
हर मुद्दे पर चर्चा करने के लिए तैयार हैं: प्रह्लाद जोशी
शीतकालीन सत्र से पहले आयोजित सर्वदलीय बैठक के बाद केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा,''हम हर मुद्दे पर चर्चा करने के लिए तैयार हैं, विपक्ष की ओर से कुछ सुझाव आए हैं। स्पीकर और चेयरमैन की अनुमति के बाद चर्चा होगी। 47 पार्टियों में से 31 पार्टियों ने इस बैठक में हिस्सा लिया|
सरकार 24-25 विषयों पर चर्चा कराना चाहती है, जिसके लिए समय नहीं: अधीर रंजन चौधरी
सर्वदलिय बैठक और संसद के शीत सत्र से पहले कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने कहा,''हमने सरकार को कहा है कि जैसे हिंदू, मुस्लिम के त्योहार होते हैं वैसे ईसाई लोगों का भी त्योहार होता है।यह बात ईसाई लोगों के त्योहार के समय ध्यान रखनी जरूरी है।उनकी जनसंख्या कम है लेकिन यह बात हमें सोचनी चाहिए| हम सत्र को छोटा, बंद कर त्योहर मनाने क??? लिए नहीं कह रहे बल्कि सरकार को इसके बारे में सोचने के लिए कह रहे। सरकार 24-25 विषयों पर चर्चा कराना चाहती है जिसके लिए समय नहीं, क्योंकि यह सत्र 17 दिन का है|