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25 अगस्त 2026

पायरेसी और आतंकवाद के लिए समुद्री रास्तों का हो रहा दुरूपयोग, हमें Legitimate Maritime Trade से Barriers हटाने चाहिए: UNSC की डिबेट में बोले पीएम मोदी

नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की डिबेट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि विभिन्‍न देशों के बीच समुद्री व्यापार की बाधाओं को दूर किए जाने की जरूरत है| उन्‍होंने कहा ,,''समंदर हमारी…

पायरेसी और आतंकवाद के लिए समुद्री रास्तों का हो रहा दुरूपयोग, हमें Legitimate Maritime Trade से Barriers हटाने चाहिए: UNSC की डिबेट में बोले पीएम मोदी
पायरेसी और आतंकवाद के लिए समुद्री रास्तों का हो रहा दुरूपयोग, हमें Legitimate Maritime Trade से Barriers हटाने चाहिए: UNSC की डिबेट में बोले पीएम मोदी | फ़ोटो: TVL News

नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की डिबेट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि विभिन्‍न देशों के बीच समुद्री व्यापार की बाधाओं को दूर किए जाने की जरूरत है| उन्‍होंने कहा ,,''समंदर हमारी साझा धरोहर हैं। हमारे समुद्री रास्ते international trade की लाइफ लाइन हैं। और, सबसे बड़ी बात यह है कि ये समंदर हमारे Planet के भविष्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। लेकिन हमारी इस साझा समुद्री धरोहर को आज कई प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। पायरेसी और आतंकवाद के लिए समुद्री रास्तों का दुरूपयोग हो रहा है। अनेक देशों के बीच maritime disputes हैं। और climate change तथा प्राकृतिक आपदाएं भी maritime domain से जुड़े विषय हैं। 




पीएम मोदी ने कहा ,''इस व्यापक संदर्भ में, अपनी साझा सामुद्रिक धरोहर के संरक्षण और उपयोग के लिए हमें आपसी समझ और सहयोग का एक framework बनाना चाहिए। ऐसा framework कोई भी देश अकेले नहीं बना सकता। यह एक साझा प्रयत्न से ही साकार हो सकता है। इसी सोच के साथ हम इस महत्वपूर्ण विषय को सुरक्षा परिषद के समक्ष ले कर आए हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि आज की High Level चर्चा से विश्व को maritime security के मुद्दे पर मार्गदर्शन मिलेगा।



पीएम मोदी ने कहा,''इस मंथन को structure देने के लिए मैं आप के समक्ष पांच मूलभूत सिद्धांत रखना चाहूँगा। पहला सिद्धांत: हमें legitimate maritime trade से barriers हटाने चाहिए। हम सभी की समृद्धि maritime trade के सक्रिय flow पर निर्भर है। इसमें आई अड़चनें पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती हो सकती हैं। Free maritime trade भारत की सभ्यता के साथ अनादि काल से जुड़ा हुआ है। हजारों वर्ष पहले, सिंधु घाटी सभ्यता का लोथल बंदरगाह समुद्री व्यापार से जुड़ा हुआ था। प्राचीन समय के स्वतंत्र maritime माहौल में ही भगवान बुद्ध का शांति संदेश विश्व में फैल पाया। आज के संदर्भ में भारत ने इसी खुले और inclusive एथोस के आधार पर SAGAR – Security and Growth for All in the Region – का vision परिभाषित किया है। इस vision के जरिये हम अपने क्षेत्र में maritime security का एक inclusive ढांचा बनाना चाहते हैं। यह विजन एक Safe, Secure और Stablemaritimedomain का है। Free maritime trade के लिए यह भी आवश्यक है, कि हम एक दूसरे के नाविकों के अधिकारों का पूरा सम्मान करें।




दूसरा सिद्धांत: maritime disputes का समाधान शांतिपूर्ण और अंतर्राष्ट्रीय कानून के आधार पर ही होना चाहिए। आपसी trust और confidence के लिए यह अति आवश्यक है। इसी माध्यम से हम वैश्विक शान्ति और स्थिरता सुनिश्चित कर सकते हैं। भारत ने इसी समझ और maturity के साथ अपने पड़ोसी देश बांग्लादेश के साथ अपनी maritime boundary को सुलझाया है।



तीसरा सिद्धांत: हमें प्राकृतिक आपदाओं और non-state actors द्वारा पैदा किए गए maritime threats का मिल कर सामना करना चाहिए। इस विषय पर क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने के लिए भारत ने कई कदम लिए हैं। Cyclone, सुनामी और प्रदूषण संबंधित समुद्री आपदाओं में हम फर्स्ट रेसपोंडर रहे हैं। पायरेसी को रोकने के लिए भारतीय नौसेना 2008 से हिन्द महासागर में पैट्रोलिंग कर रही है। भारत का White Shipping Information फ्यूजन केंद्र हमारे क्षेत्र में साझा maritime डोमेन awareness बढ़ा रहा है। हमने कई देशों को Hydrographic Survey Support और समुद्री सुरक्षा में प्रशिक्षण दिया है। हिन्द महासागर में भारत की भूमिका एक Net Security Provider के रूप में रही है।




चौथा सिद्धांत: हमें maritime environment और maritime resources को संजो कर रखना होगा। जैसा कि हम जानते हैं, Oceans का climate पर सीधा impact होता है। और इसलिए, हमें अपने maritime environment को plastics और oil spills जैसे प्रदूषण से मुक्त रखना होगा। और over-fishing और marine poaching (पोचिंग) के खिलाफ साझा कदम उठाने होंगे। साथ ही, हमें ocean science में भी सहयोग बढ़ाना चाहिए। भारत ने एक महत्वकांक्षी "Deep Ocean Mission” launch किया है। हमने sustainable fishing को प्रोत्साहन देने के लिए भी कई पहले ली हैं।




पांचवा सिद्धांत: हमें responsible maritime connectivity को प्रोत्साहन देना चाहिए। यह तो स्पष्ट है कि समुद्री व्यापार को बढ़ाने के लिए infrastructure का निर्माण आवश्यक है। लेकिन, ऐसे infrastructure projects के development में देशों की फिस्कल sustainability और absorption capacity को ध्यान में रखना होगा। इसके लिए हमें उचित वैश्विक norms और standards बनाने चाहिए।





मोदी ने कहा,'''मुझे विश्वास है इन पांच सिद्धांतों के आधार पर maritime security cooperation का एक वैश्विक roadmap बन सकता है। आज की open डिबेट की उच्च और सक्रिय भागीदारी यह दिखाती है कि यह विषय सुरक्षा परिषद के सभी सदस्यों के लिए महत्वपूर्ण है।



tvlnews

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यह रिपोर्ट 9 अगस्त 2021 को TVL News पर प्रकाशित हुई और 9 मई 2025 को अपडेट की गई। नई जानकारी मिलने पर खबर को अपडेट किया जाता है।

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