करगिल (लद्दाख): दिवाली के अवसर पर कारगिल में सेना के जवानों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को कहा कि, ‘हम शांति में विश्वास करते हैं, लेकिन शांति सामर्थ्य के बिना संभव नहीं है| उन्होंने कहा,' हमने युद्ध को कभी भी पहला विकल्प नहीं माना..हमने युद्ध को हमेशा अंतिम विकल्प माना है। हमने युद्ध को अंत तक टालने की कोशिश की है। हम युद्ध के खिलाफ हैं लेकिन सामर्थ्य के बिना शांति संभाव नहीं
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि, ‘यूक्रेन युद्ध के दौरान हमने देखा कि कैसे हमारा राष्ट्रीय ध्वज वहां फंसे हमारे नागरिकों के लिए एक ढाल बन गया। दुनियाभर में भारत का सम्मान बढ़ा है। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि भारत अपने आंतरिक और बाहरी दुश्मनों के खिलाफ सफलता के साथ मोर्चा ले रहा है|
PM मोदी ने कहा कि, ‘आप सीमा पर कवच बनकर खड़े हुए हैं तो देश के भीतर देश के दुश्म??ों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई हो रही है..आतंकवाद, नक्सलवाद आदि जो जड़े बीते वर्षों में पनपी थी उसे उखाड़ने का सफल प्रयास देश निरंतर प्रयास कर रहा है| कभी नक्सलवाद ने देश के एक बड़े हिस्से को अपनी गिरफ्त में ले लिया था, लेकिन आज वो दायरा सीमट रहा है|
उन्होंने कहा,'राष्ट्र हित में आज बड़े से बड़े निर्णय तेजी से लागू किए जाते हैं। सेना में बड़े सुधार की जो जरूरत दशकों से महसूस की जा रही है वो आज जमीन पर उतर रही है| मैं अपने 3 सेनाओं की प्रशंसा करता हूं जिन्होंने तय किया है कि 400 से अधिक रक्षा सामान अब विदेशों से नहीं खरीदे जाएंगे, बल्कि भारत में बनाए जाएंगे|
PM ने कहा कि, ‘हमने युद्ध को कभी भी पहला विकल्प नहीं माना...हमने युद्ध को हमेशा अंतिम विकल्प माना है। हमने युद्ध को अंत तक टालने की कोशिश की है। हम युद्ध के विरुद्ध हैं लेकिन सामर्थ्य के बिना शांति संभाव नहीं| अगर कोई हमारी तरफ नजर उठाकर देखेगा तो हमारी तीन सेनाएं दुश्मनों को उसी की भाषा में मुंहतोड़ जवाब देना भी जानती है|