नई दिल्ली: केंद्र सरकार की ओर से लाए गए तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की कई सीमाओं पर बैठे किसानों का आंदोलन आज 53वां दिन है| केंद्र सरकार और किसानों के बीच कई दौर की वार्ता भी बेनतीजा रही है। अब अगली बैठक 19 जनवरी को तय की गई है।किसान संगठन तीनों कानूनों को रद्द करने की मांगों पर अड़े हैं, मोदी सरकार पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है। कड़ाके की ठंड में किसानों का आंदोलन जारी है।
केंद्र के 3 नए कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसान नेताओं ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर गणतंत्र दिवस के मौके पर प्रस्तावित दिल्ली में 'किसान गणतंत्र परेड' की रूपरेखा सामने रखी| इस दौरान बताया गया कि 50 किलोमीटर की यह परेड आउटर रिंग रोड पर होगी|सिंघु बॉर्डर पर हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने 'किसान गणतंत्र परेड' को लेकर बताया|
योगेंद्र यादव ने कहा कि ,''आज की बैठक में हमने तय किया है कि 26 जनवरी को किसान परेड का आयोजन दिल्ली के अंदर किया जाएगा। यह परेड आउटर रिंग रोड की परिक्रमा कर आयोजित की जाएगी|हम आशा करते हैं कि दिल्ली और हरियाणा का पुलिस प्रशासन किसानों की ट्रैक्टर रैली परेड में कोई बाधा नहीं डालेगा। चाहे ट्रैक्टर हो या गाड़ी, हर वाहन पर राष्ट्रीय ध्वज होगा या फिर किसी किसान संगठन का झंडा होगा|
योगेंद्र यादव ने कहा कि ,' किसान गणतंत्र दिवस पर दिल्ली के आउटर रिंग रोड पर राष्ट्रीय ध्वज के साथ ट्रैक्टर परेड करेंगे। आधिकारिक गणतंत्र दिवस समारोह में कोई व्यवधान नहीं होगा|
क्रांतिकारी किसान यूनियन के अध्यक्ष दर्शन पाल ने कहा कि एनआईए ने उन लोगों के खिलाफ मामले दर्ज करने शुरू कर दिए हैं जो किसान आंदोलन का हिस्सा हैं या जिन्होंने इसका समर्थन किया है। सभी किसान संघ इसकी निंदा करते हैं। हम हर संभव तरीके से लड़ेंगे।वही,'' भारतीय किसान यूनियन लोकशक्ति ने दिल्ली के रामलीला मैदान में किसान आंदोलन करने को लेकर दिल्ली पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखकर अनुमति मांगी है।
हरियाणा किसान संघर्ष समिति के सदस्य मंदीप नथवान ने कहा कि 26 जनवरी को बड़ी संख्या में किसान शांतिपूर्ण तरीके से अपना हक लेने के लिए दिल्ली आ रहा है। सरकार को भ्रम है कि हम इस आंदोलन को तोड़ देंगे लेकिन हम ये आंदोलन टूटने नहीं देंगे। 18 जनवरी को हम महिला किसान दिवस के रूप में मनाएंगे| पूरी दुनिया की नजर 26 जनवरी के कार्यक्रम पर है। कुछ लोग सरकार की शह पर इस आंदोलन को उग्र करना चाहते हैं, हमारा ये आंदोलन नीतियों के खिलाफ है ना कि दिल्ली के खिलाफ। ऐसा प्रचार किया जा रहा है जैसे दिल्ली के साथ कोई युद्ध होने जा रहा हो।
गणतंत्र दिवस के दिन राजधानी दिल्ली में किसानों के ट्रैक्टर मार्च के लिए लुधियाना में तैयारियां चल रही हैं। ट्रैक्टर मार्च में हिस्सा ले रहे एक प्रदर्शनकारी ने बताया कि 24 जनवरी से पहले हमने एक लाख ट्रैक्टर पहुंचाने की ज़िम्मेदारी ली है, सब एकजुट होकर काम कर रहे हैं।
किसान यूनियन के सुप्रीम कोर्ट में निष्पक्ष लोगों की कमेटी गठित करने की याचिका पर अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव हन्नान मोल्लाह ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा ने तो ऐसी बात सोची भी नहीं, न चर्चा की। हम कोर्ट में नहीं गए और अभी भी जाने का सवाल नहीं है। अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव हन्नान मोल्लाह ने कहा कि करीब दो माह से हम ठंड के मौसम में मर रहे हैं और परेशान हो रहे हैं। सरकार हमें 'तारीख पे तारीख’ दे रही है। इस मामले को टालने की कोशिश कर रही है ताकि हम थक जाएं और जगह छोड़ दें। यह उनकी साजिश है।'
यूपी गेट पर आंदोलन में भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने सरकार पर आंदोलन को तोड़ने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि 15 तारीख की बैठक में मालूम हुआ कि सरकार इस आंदोलन को लंबा खींचकर पंजाब और हरियाणा में बांटना चाहती है। जिससे किसान आंदोलन पूरे देश को छोड़कर सिर्फ पंजाब तक सीमित रह जाए। वहीं सरकार एमएसपी पर भी बात नहीं करती, वह तीन कानूनों में संशोधन कराना चाहती है, जबकि हम कानून वापसी से कम में मानने वाले नहीं। राकेश टिकैत ने कहा कि 19 की बैठक में फिर से तीनों कानूनों को रद्द करने और एमएसपी की गारंटी देने पर बात होगी। सरकार इस पर कैसे प्लान बनाए, इसके बारे में किसान उन्हें बताएगा। उन्होंने किसानों से लंबे आंदोलन की तैयारी करने की भी बात कही।
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि क्लॉज पर चर्चा वो करेगा जिसे कानून में संशोधन कराना हो, ये हमारा सवाल है ही नहीं। सरकार को ये तीनों कानून खत्म करने पड़ेंगे।आंदोलन जारी रहेगा। आंदोलन में क़रीब 10 दौर की वार्ता हो चुकी है, सरकार पूर्ण रूप से अड़ियल रुख कर रही है।'