नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र का आज नौवां दिन है। राज्यसभा से सोमवार को निलंबित किए गए आठ सांसदों के निलंबन को वापस लेने की गुज़ारिश के साथ विपक्ष ने मंगलवार को राज्यसभा का बहिष्कार करने को लेकर ऐलान कर दिया है| राज्यसभा के सभापति ने सोमवार को उपसभापति के साथ दुर्व्यवहार करने वाले आठ सांसदों को संसद के पूरे सत्र से निलंबित कर दिया। निलंबन के विरोध में सांसदों ने रातभर संसद परिसर में धरना दिया।
सुबह उपसभापति हरिवंश उनसे मिलने के लिए पहुंचे। वे उनके लिए चाय-नाश्ता लेकर पहुंचे थे लेकिन सांसदों ने इसे लेने से इनकार कर दिया। हालांकि अब सांसदों का धरना खत्म हो गया है। वहीं विपक्ष ने राज्यसभा के पूरे सत्र का बहिष्कार करने का फैसला किया है। इसके अलावा उपसभापति ने राष्ट्रपति को पत्र लिखा है। जिसमें उन्होंने अपने साथ हुए दुर्व्यवहार से राष्ट्रपति कोविंद को अवगत कराया है
राज्यसभा के 8 निलंबित सदस्यों ने विपक्षी नेताओं के एक अनुरोध के बाद मंगलवार को अपना दिन भर का धरना समाप्त कर दिया। उन्होंने विपक्षी नेताओं के अनुरोध पर ऐसा किया जिन्होंने इन सांसदों से मानसून सत्र के बहिष्कार में शामिल होने का भी आग्रह किया
विपक्षी नेताओं ने राज्यसभा से वॉक-आउट किया| राज्यसभा सांसद गुलाम नबी आजाद ने कहा कि आठ सांसदों का निलंबन वापस लिया जाए। उन्होंने कहा, 'हमारी मांग है कि आठ सांसदों के निलंबन को वापस लिया जाए और सरकार दूसरा विधेयक लाए। जिसके तहत कोई भी निजी कंपनी एमएसपी से नीचे किसानों की उपज को न खरीद सके। जब तक हमारी ये मांगे पूरी नहीं हो जाती विपक्ष सत्र का बहिष्कार करेगा। कांग्रेस सदन की कार्यवाही में हिस्सा नहीं लेगी।'
LoP और राज्यसभा MP गुलाम नबी आज़ाद ने कहा,जब ये बिल ला रहे थे तो MSP उस वक्त अनाउंस करनी चाहिए थी पर नहीं की। खैर MSP बाद में अनाउंस किया गया जिसका हम स्वागत करते हैं। MSP को लेकर हमने तीन कंडीशनें रखी हैं जब तक वो पूरी नहीं हो जाती ये बायकॉट जारी रहेगा|
LoP और राज्यसभा MP गुलाम नबी आज़ाद ने कहा,''पिछले दो दिनों में जो सदन में हुआ मुझे नहीं लगता कि उससे कोई भी खुश है...करोड़ों लोगों को जो रिप्रेजेंट करते हैं उन्हें करोड़ों लोग देखते हैं। जो लक्ष्य है यहां आने का वो तो पूरा होना चाहिए|जब तक हमारे सांसदों के संस्पेंशन को वापिस नहीं लिया जाता और किसान के बिलों से संबंधित हमारी मांगों को नहीं माना जाता विपक्ष सत्र से बायकॉट करती है|
कांग्रेस सांसद गुलाम नबी आजाद ने कहा, 'हम संसद सत्र का बहिष्कार करेंगे जब तक कि सरकार हमारी तीन मांगों को स्वीकार नहीं करती है। पहली- सरकार दूसरा विधेयक लेकर आए जिसके तहत कोई भी निजी कंपनी एमएसपी से नीचे खरीद न कर सके, दूसरी- एमएसपी को स्वामीनाथन आयोग द्वारा अनुशंसित फार्मूले के तहत तय किया जाना चाहिए और तीसरी- एफसीआई जैसी सरकारी एजेंसियां एमएसपी से नीचे फसल नहीं खरीदेंगी।'
समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद राम गोपाल यादव ने कहा,मैंने न केवल सांसदों की सदन वापसी की मांग की बल्कि मैंने विपक्ष की तरफ से माफी भी मांगी। लेकिन मेरी माफी के बदले कोई रिस्पांस नहीं दिया गया इससे मुझे बहुत कष्ट हुआ। इसलिए मैं और मेरी पूरी पार्टी संसद के इस पूरे सत्र का बहिष्कार करती है|
पूर्व प्रधानमंत्री और राज्यसभा सांसद एच.डी. देवगौड़ा ने कहा,विपक्ष और सरकार दोनों को एक साथ बैठकर सदन चलाने में मदद करनी चाहिए। एक-दूसरे के सहयोग से लोकतंत्र जारी रहना चाहिए|
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री प्रहलाद जोशी ने कहा,''अगर नंबरों की बात करें तो उस दिन हमारे पक्ष में 110 वोट थे और इनके पक्ष में 72। अगर वो (8 सांसदों द्वारा प्रदर्शित अनियंत्रित व्यवहार) इस पर खेद व्यक्त करते हैं तो सरकार इस बात से सहमत है कि उन्हें सदन से बाहर नहीं होना चाहिए
राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश 20 सितंबर को कृषि विधेयकों के पारित होने के दौरान विपक्षी सांसदों द्वारा किए गए अनियंत्रित व्यवहार के खिलाफ 24 घंटों के लिए उपवास रखेंगे।राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश ने राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद को 20 सितंबर को कृषि विधेयकों के पारित होने के दौरान विपक्षी सांसदों द्वारा सदन में उनके साथ किए गए अनियंत्रित व्यवहार पर एक पत्र लिखा।
राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने कहा, 'राज्यसभा के उपसभापति ने लोकतंत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए मुझे पत्र लिखकर बताया कि उनके साथ कैसा व्यवहार किया गया। उन्होंने मुझे लिखा है कि लोगों की चेतना जगाने के लिए वे एक दिन का उपवास रख रहे हैं। वो आज निलंबित सांसदों से मुलाकात करने के लिए पहुंचे और चाय भी दी। हम सभी उनकी तारीफ कर रहे हैं। हम संसदीय लोकतंत्र में इस तरह के व्यवहार को स्वीकार नहीं कर सकते।' नायडू ने विपक्षी नेताओं से 'पुनर्विचार, आत्मनिरीक्षण, सदन में चर्चा में भाग लेने के लिए लौटने' का आग्रह किया।