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24 अगस्त 2026

“पर्यटन अमीरों का प्रतिनिधित्व करने वाला एक फैंसी शब्द मात्र नहीं”: प्रधानमंत्री मोदी

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 'मिशन मोड में पर्यटन का विकास' विषय पर बजट के बाद आयोजित वेबिनार को संबोधित किया। यह केंद्रीय बजट 2023 में घोषणा की गई पहलों को प्रभावी तरीके से लागू करने के…

“पर्यटन अमीरों का प्रतिनिधित्व करने वाला एक फैंसी शब्द मात्र नहीं”: प्रधानमंत्री मोदी
“पर्यटन अमीरों का प्रतिनिधित्व करने वाला एक फैंसी शब्द मात्र नहीं”: प्रधानमंत्री मोदी | फ़ोटो: TVL News

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 'मिशन मोड में पर्यटन का विकास' विषय पर बजट के बाद आयोजित वेबिनार को संबोधित किया। यह केंद्रीय बजट 2023 में घोषणा की गई पहलों को प्रभावी तरीके से लागू करने के बारे में विचारों और सुझावों को प्राप्त करने के लिए सरकार द्वारा आयोजित 12 ‘पोस्ट-बजट वेबिनार’ की श्रृंखला का सातवां वेबिनार है।


उपस्थित जनों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आज का नया भारत एक नई कार्य संस्कृति के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने भारत के लोगों द्वारा इस वर्ष के बजट की सराहना करने पर प्रसन्नता व्यक्त की। पिछली कार्य संस्कृति पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि बजट के बाद आयोजित वेबिनार जैसा कुछ अभिनव कार्य आयोजित नहीं होता यदि वर्तमान सरकार की बजट से पहले और बाद में सभी हितधारकों के साथ चर्चा करने की भावना नहीं होती। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि इन वेबिनारों के आयोजन का मुख्य उद्देश्य बजट के उत्पादन को अधिकतम करने के साथ-साथ इसे समय पर लागू करना भी है। 


श्री मोदी ने कहा कि ये वेबिनार बजट के दौरान निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने में उत्प्रेरक के रूप में काम करते हैं। 20 से अधिक वर्षों तक सरकार के प्रमुख के रूप में काम करने के अपने अनुभव से प्रधानमंत्री ने यह जोर देकर कहा कि वांछित परिणाम निर्धारित समय के भीतर तभी प्राप्त किए जाते हैं जब सभी हितधारक सरकार द्वारा लिए गए किसी भी रणनीतिक निर्णय के साथ खुद को जोड़ लेते हैं। उन्होंने अब तक बजट के बाद आयोजित वेबिनार के माध्यम से प्राप्त सुझावों पर प्रसन्नता जाहिर की।


प्रधानमंत्री ने भारत में पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए निर्धारित तरीके से हटकर सोचने और आगे की योजना बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। किसी पर्यटन स्थल के विकसित होने से पहले के मापदंडों पर प्रकाश डालते हुए, प्रधानमंत्री ने जगह की क्षमता, गंतव्य स्थल की यात्रा में आसानी और उस गंतव्य स्थल को बढ़ावा देने के नए तरीकों को सूचीबद्ध किया। उन्होंने यह भी कहा कि इन मापदंडों पर जोर देने से भविष्य के लिए एक रोडमैप तैयार करने में सहायता मिलती है।



 प्रधानमंत्री ने देश में पर्यटन की विशाल संभावनाओं के बारे में प्रकाश डालते हुए तटीय पर्यटन, समुद्र तट पर्यटन, मैंग्रोव पर्यटन, हिमालय पर्यटन, साहसिक पर्यटन, वन्यजीव पर्यटन, पर्यावरण पर्यटन, विरासत पर्यटन, आध्यात्मिक पर्यटन, विवाह स्थलों, सम्मेलनों और खेल पर्यटन के माध्यम से होने वाले पर्यटन को सूचीबद्ध किया।  उन्होंने रामायण सर्किट, बुद्ध सर्किट, कृष्णा सर्किट, पूर्वोत्तर सर्किट, गांधी सर्किट और सभी संतों की तीर्थयात्राओं का भी उदाहरण दिया और कहा कि इस पर सामूहिक रूप से काम करने की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस वर्ष के बजट में प्रतिस्पर्धी भावना और चुनौती के माध्यम से भारत में कई स्थानों की पहचान की गई है और गंतव्य स्थलों के समग्र विकास पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है। उन्होंने विभिन्न हितधारकों को इस कार्य में शामिल करने के लिए विस्तृत चर्चा करने को कहा।


प्रधानमंत्री ने इस मिथक को तोड़ दिया कि पर्यटन एक आकर्षक (फैंसी) शब्द है जो केवल देश के उच्च आय वाले समूहों से ही जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि यात्राएं सदियों से भारत के सांस्कृतिक और सामाजिक जीवन का हिस्सा रही हैं और लोग तीर्थयात्रा पर तब भी जाते थे जब उनके लिए संसाधन उपलब्ध नहीं थे। उन्होंने चार धाम यात्रा, द्वादश ज्योतिर्लिंग यात्रा, 51 शक्तिपीठ यात्रा का उदाहरण देते हुए कहा कि इसका उपयोग देश की एकता को मजबूत करने के साथ-साथ हमारी आस्था के स्थानों को भी परस्पर जोड़ने के लिए किया जाता है। यह देखते हुए कि देश के कई बड़े-बड़े शहरों की पूरी अर्थव्यवस्था इन यात्राओं पर निर्भर करती है, प्रधानमंत्री ने यात्राओं की सदियों पुरानी परंपरा के बावजूद समय के अनुकूल सुविधाओं को बढ़ाने के लिए विकास की कमी होने पर भी दुख जताया। 


उन्होंने कहा कि सैकड़ों वर्षों की गुलामी और आजादी के बाद के दशकों में इन स्थानों की राजनीतिक उपेक्षा इसका मूल कारण है जिसने देश को बहुत हानि पहुंचाई है। "आज का भारत इस स्थिति को बदल रहा है"। प्रधानमंत्री ने कहा कि सुविधाओं में बढ़ोत्तरी होने से पर्यटकों के बीच पर्यटन के लिए आकर्षण में वृद्धि होती है। उन्होंने वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम का उदाहरण देते हुए बताया कि मंदिर के पुनर्निर्माण से पहले यहां एक साल में लगभग 80 लाख लोग आते थे, लेकिन नवीनीकरण के बाद यहां पिछले साल पर्यटकों की संख्या 7 करोड़ से अधिक हुई है। 


उन्होंने यह भी बताया कि केदारघाटी में पुनर्निर्माण का कार्य पूरा होने से पहले यहां आने वाले केवल 4-5 लाख तीर्थयात्रियों की तुलना में 15 लाख श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन करने आए हैं। प्रधानमंत्री ने बताया कि इसी तरह का आगमन गुजरात के पावागढ़ में हुआ है। जीर्णोद्धार से पहले केवल 4 से 5 हजार लोगों के आगमन की तुलना में 80 हजार तीर्थयात्री मां कालिका के दर्शन के लिए आते हैं। 


प्रधानमंत्री ने कहा कि सुविधाओं में वृद्धि से पर्यटकों की संख्या पर सीधा प्रभाव पड़ता है और पर्यटकों की बढ़ती संख्या का मतलब रोजगार और स्वरोजगार के अधिक अवसर पैदा होना हैं। प्रधानमंत्री ने दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ का भी उल्लेख किया और कहा कि इसके पूरा होने के एक साल के भीतर 27 लाख पर्यटकों ने यहां की यात्रा की है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बढ़ती नागरिक सुविधाओं, अच्छी डिजिटल कनेक्टिविटी, अच्छे होटल और अस्पतालों, गंदगी का कोई निशान नहीं होने और उत्कृष्ट बुनियादी ढांचे के साथ भारत का पर्यटन क्षेत्र कई गुना बढ़ सकता है।


प्रधानमंत्री ने गुजरात के अहमदाबाद में कांकरिया झील परियोजना का भी उल्लेख किया और बताया कि इस झील के पुनर्विकास के अलावा खाने के स्टालों में काम करने वालों का कौशल विकास भी किया गया। उन्होंने आधुनिक बुनियादी ढांचे के साथ-साथ स्वच्छता पर जोर देते हुए बताया कि प्रवेश शुल्क लागू होने के बावजूद हर दिन लगभग 10,000 लोग इस जगह पर आते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, "प्रत्येक पर्यटन स्थल अपना राजस्व मॉडल भी विकसित कर सकता है।


प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि हमारे गांव पर्यटन के केंद्र बन रहे हैं और बुनियादी ढांचे में सुधार के कारण दूर-सुदूर के गांव अब पर्यटन मानचित्र पर आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने सीमा के पास स्थित गांवों के लिए ‘वाइब्रेंट विलेज योजना’ शुरू की है और गांवों के अनुकूल होमस्टे, छोटे होटल और रेस्तरां जैसे व्यवसायों को सहायता प्रदान करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।


भारत में विदेशी पर्यटकों की बढ़ती संख्या पर प्रकाश डालते हुए, प्रधानमंत्री ने भारत के प्रति बढ़ते आकर्षण का उल्लेख किया और कहा कि पिछले साल जनवरी में आए केवल 2 लाख पर्यटकों की तुलना में इस साल जनवरी में 8 लाख विदेशी पर्यटक भारत आए हैं। प्रधानमंत्री ने ऐसे पर्यटकों की प्रोफाइल तैयार करने और उन्हें देश की ओर आकर्षित करने के लिए एक विशेष रणनीति बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया, जिनके पास अधिक से अधिक धन खर्च करने की क्षमता है। 


उन्होंने बताया कि भारत आने वाले विदेशी पर्यटक औसतन रूप से 1700 डॉलर खर्च करते हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय यात्री अमेरिका में औसतन 2500 डॉलर और ऑस्ट्रेलिया में लगभग 5000 डॉलर खर्च करते हैं। उन्होंने कहा, "भारत के पास अधिक खर्च करने वाले पर्यटकों को देने के लिए बहुत कुछ है। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि प्रत्येक राज्य को इस विचार के अनुरूप अपनी पर्यटन नीति में परिवर्तन करने की जरूरत है। उन्होंने देश में महीनों तक डेरा डालने वाले पक्षी प्रेमी पर्यटकों का उदाहरण दिया और बताया किया कि ऐसे संभावित पर्यटकों को ध्यान में रखते हुए नीतियां बनाई जानी चाहिए।


पर्यटन क्षेत्र की बुनियादी चुनौती पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने देश में पेशेवर पर्यटक गाइडों की कमी की ओर इशारा किया और इन गाइडों के लिए स्थानीय कॉलेजों में सर्टिफिकेट कोर्स की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि किसी विशेष पर्यटन स्थल में काम करने वाले गाइडों के पास भी एक विशिष्ट पोशाक या वर्दी होनी चाहिए ताकि पर्यटकों को पहली नज़र में ही इस बारे में पता चल सके। प्रधानमंत्री ने कहा कि एक पर्यटक का दिमाग सवालों से भरा होता है और गाइड उन सभी सवालों के उत्तर उपलब्ध कराने में उनकी मदद कर सकते हैं।


प्रधानमंत्री ने पूर्वोत्तर के लिए स्कूलों और कॉलेजों की यात्राओं को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया ताकि अधिक से अधिक लोग जागरूक हों और पर्यटकों के लिए बुनियादी ढांचे और सुविधाओं का विकास शुरू कर सकें। उन्होंने ‘वेडिंग डेस्टिनेशंस’ के साथ-साथ ‘स्पोर्ट्स डेस्टिनेशंस’ को बढ़ावा देने पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने ऐसे 50 पर्यटन स्थलों को विकसित करने पर जोर दिया, जहां दुनिया का हर पर्यटक भारत की यात्रा पर आने के लिए बाध्य हो जाए। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में सूचीबद्ध सभी भाषाओं में पर्यटन स्थलों के लिए ऐप विकसित करने का भी उल्लेख किया।


अपने संबोधन का समापन करते हुए प्रधानमंत्री ने यह विश्वास व्यक्त किया कि यह वेबिनार पर्यटन से जुड़े हर पहलू पर गंभीरता से विचार करेगा और बेहतर समाधान लेकर आएगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में पर्यटन में कृषि, रियल एस्टेट विकास, बुनियादी ढांचे और कपड़ा क्षेत्र जैसी ही संभावनाएं मौजूद हैं।






 

tvlnews

TVL News (TheViralLines) के संवाददाता। यह रिपोर्ट स्थानीय स्रोतों और उपलब्ध आधिकारिक जानकारी की पुष्टि के बाद प्रकाशित की गई है। किसी तथ्य में सुधार के लिए संपर्क करें या +91 99996 56869 पर WhatsApp करें।

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यह रिपोर्ट 3 मार्च 2023 को TVL News पर प्रकाशित हुई और 9 मई 2025 को अपडेट की गई। नई जानकारी मिलने पर खबर को अपडेट किया जाता है।

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