नई दिल्ली: प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी नेअपने आधिकारिक आवास पर अमित शाह और राजनाथ सिंह सहित केंद्रीय मंत्रियों से बैठक की| सूत्रों ने बताया,''प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में अपने आधिकारिक आवास पर अमित शाह और राजनाथ सिंह सहित केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात की|
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 24 जून को जम्मू-कश्मीर के प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक होनी है। इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को यहां अपने आधिकारिक आवास पर अमित शाह और राजनाथ सिंह समेत केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात की।
सूत्रों ने बताया कि शाह और सिंह के अलावा केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण और पीयूष गोयल भी आज की बैठक में शामिल हुए। बैठक संबंधी विस्तृत जानकारी अभी नहीं मिली है, लेकिन राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह संभावित मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल से पहले की कवायद हो सकती है।
राजधानी दिल्ली में 24 जून को पीएम मोदी की अध्यक्षता में होने वाली बैठक के लिए जम्मू-कश्मीर के 14 नेताओं को आमंत्रित किया गया है| इस बैठक को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं| दरअसल, ये बैठक केंद्र सरकार की तरफ से अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को निरस्त करने और इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजन करने की घोषणा के बाद से इस तरह की पहली कवायद होगी|
इसलिए इस बैठक को वहां पहली बार विधानसभा चुनाव कराने की रूपरेखा तय करने से जोड़कर देखा जा रहा है| इस बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और अन्य केंद्रीय नेताओं के भी भाग लेने की संभावना है|
PDP नेता सैयद सोहेल बुखारी ने कहा,''दिल्ली में होने वाली जम्मू-कश्मीर की ऑल पार्टी मीटिंग के संदर्भ में आज PDP अध्यक्षा महबूबा मुफ़्ती की अध्यक्षता में एक मीटिंग हुई और उसमें सभी नेताओं ने दिल्ली में होने वाली मीटिंग में शामिल होने के लिए फै़सला महबूबा मुफ़्ती पर छोड़ दिया है|
वहीं, PM मोदी की जम्मू-कश्मीर की सभी पार्टियों के साथ होने वाली बैठक परिसीमन को लेकर है| यह जानकारी सूत्रों ने रविवार को दी| इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने के कयासों पर विराम लग गया है| जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने के कदम के लिए संसद की मंजूरी जरूरी होगी| हालांकि सरकार ने वादा किया है कि उचित समय पर जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल कर दिया जाएगा, लेकिन वह समय अभी तक नहीं आया है|
साथ ही सूत्रों ने बताया कि यह केंद्र द्वारा जून के पहले सप्ताह में शुरू हुई प्रशासनिक कवायद को राजनीतिक रूप से मान्यता दिलाने की कोशिश है|सूत्रों ने यह भी माना है कि अगर जम्मू-कश्मीर को दोबारा राज्य का दर्जा दिए जाने पर चर्चा भी की जाती है तो संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत पहले उसे दिए गए विशेष राज्य का दर्जा दोबारा दिए जाने का सवाल ही पैदा नहीं होता|