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25 अगस्त 2026

कृषि विधेयकों के खिलाफ किसानों का भारत बंद: बोले PM मोदी -किसानों से हमेशा झूठ बोलने वाले लोग उनके कंधे पर बंदूक रखकर फोड़ रहे हैं

नई दिल्ली: पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के मौके पर शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि,''एक राष्ट्र, समाज के रूप में भारत…

कृषि विधेयकों के खिलाफ किसानों का भारत बंद: बोले PM मोदी -किसानों से हमेशा झूठ बोलने वाले लोग उनके कंधे पर बंदूक रखकर फोड़ रहे हैं
कृषि विधेयकों के खिलाफ किसानों का भारत बंद: बोले PM मोदी -किसानों से हमेशा झूठ बोलने वाले लोग उनके कंधे पर बंदूक रखकर फोड़ रहे हैं | फ़ोटो: TVL News

नई दिल्ली: पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के मौके पर शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि,''एक राष्ट्र, समाज के रूप में भारत को बेहतर बनाने के लिए दीन दयाल जी का योगदान पीढ़ियों को प्रेरित करने वाला है। दीनदयाल जी ही थे, जिन्होंने भारत की राष्ट्रनीति,अर्थनीति, समाजनीति, राजनीति सभी पहलुओं पर भारत के अथाह सामर्थ्य के हिसाब से तय करने की बात मुखरता से कही थी|





कृषि विधेयक पर उन्होंने कहा,''आजादी के अनेक दशकों तक किसान और श्रमिक के नाम पर खूब नारे लगे, बड़े-बड़े घोषणा पत्र लिखे गए, लेकिन समय की कसौटी ने सिद्ध कर दिया है कि वो सारी बातें कितनी खोखली थीं, सिर्फ नारें थे। देश अब इन बातों को भली भांति जानता है|उन्होंने कहा,''किसानों को ऐसे कानूनों में उलझाकर रखा गया, जिसके कारण वो अपनी ही उपज को, अपने मन मुताबिक बेच भी नहीं सकता था। नतीजा ये हुआ कि उपज बढ़ने के बावजूद किसानों की आमदनी उतनी नहीं बढ़ी। हां, उन पर कर्ज जरूर बढ़ता गया|




प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि,,''किसानों से जिन्होंने हमेशा झूठ बोला है वो लोग इन दिनों अपने राजनीतिक स्वार्थ की वजह से किसानों के कंधे पर बंदूक फोड़ रहे हैं। किसानों को भ्रमित करने में लगे हैं, ये लोग अफवाहें फैला रहे हैं|




उन्होंने कहा,'किसान और श्रमिक के नाम पर देश में, राज्यों में अनेकों बार सरकारें बनीं लेकिन उन्हें मिला क्या? सिर्फ वादों और कानूनों का एक उलझा हुआ जाल। एक ऐसा जाल, जिसको ना तो किसान समझ पाता था और ना ही श्रमिक|किसानों को ऐसे कानूनों में उलझाकर रखा गया, जिसके कारण वो अपनी ही  उपज को, अपने मन मुताबिक बेच भी नहीं सकता था। नतीजा ये हुआ कि उपज बढ़ने के बावजूद किसानों की आमदनी उतनी नहीं बढ़ी।  हां, उन पर कर्ज जरूर बढ़ता गया|




PM मोदी ने कहा कि,भाजपा के नेतृत्व में NDA सरकार ने निरंतर इस स्थिति को बदलने का काम किया है। पहले लागत का डेढ़ गुणा MSP तय किया, उसमें रिकॉर्ड बढोतरी की और रिकॉर्ड सरकारी खरीद भी सुनिश्चित की|बीते सालों में ये निरंतर प्रयास किया गया है कि किसान को बैंकों से सीधे जोड़ा जाए। पीएम किसान सम्मान निधि के तहत देश के 10 करोड़ से ज्यादा किसानों के बैंक खातों में कुल एक लाख करोड़ रुपए से ज्यादा ट्रांसफर किए जा चुके हैं|





PM मोदी ने कहा कि,'सरकार ने इस बात का भी प्रयास किया है कि ज्यादा से ज्यादा किसानों के पास किसान क्रेडिट कार्ड हो, उन्हें खेती के लिए आसानी से कर्ज उपलब्ध हो। पहले सिर्फ उसी किसान को KCC का लाभ मिलता था जिसके पास 2 हेक्टेयर जमीन हो। हमारी सरकार इसके दायरे में देश के हर किसान को ले आई|अब किसान क्रेडिट कार्ड का लाभ पशुपालकों और मछली पालन से जुड़े लोगों को भी दिया जा रहा है|




उन्होंने कहा,''आज़ादी के अनेक दशकों तक किसान और श्रमिक के नाम पर खूब नारे लगे, बड़े-बड़े घोषणापत्र लिखे गए, लेकिन समय की कसौटी ने सिद्ध कर दिया है कि वो सारी बातें कितनी खोखली थी|भाजपा सरकार ने जो काम किया है, अब भाजपा के हर कार्यकर्ता को इन कानूनों की भावना को, बिल्कुल सरल भाषा में किसान साथियों के बीच ले जाना है|किसानों से हमेशा झूठ बोलने वाले कुछ लोग इन दिनों अपने राजनीतिक स्वार्थ की वजह से किसानों को भ्रमित करने में लगे हैं। ये लोग अफवाहें फैला रहे हैं|




PM मोदी ने कहा कि,''किसानों की तरह ही हमारे यहां दशकों तक देश के श्रमिकों को भी कानून के जाल में उलझाकर रखा गया है।  जब-जब श्रमिकों ने आवाज़ उठाई, तब-तब उनको कागज पर एक कानून दे दिया गया| निर्माण से जुड़े श्रमिकों के लिए एक कानून, खेत से जुड़े श्रमिकों के लिए दूसरा कानून।  पत्रकारिता से जुड़े कामगारों के लिए एक कानून, फिल्म उद्योग के क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिक साथियों के लिए अलग कानून। ऐसे अनेक कानून थे|ज़रूरत श्रमिकों का जीवन आसान बनाने की थी, लेकिन उनके जीवन को कानूनी दांव-पेंचों में उलझाकर रख दिया गया। इस वजह से वो इंसाफ के लिए कोर्ट का रुख करते भी तो बरसों-बरस कचहरी के चक्कर ही काटते रह जाते थे।  अब इस स्थिति को बदल दिया गया है|



उन्होंने कहा,''4 Labour Codes के माध्यम से देश के श्रमिक साथियों को दर्जनों कानूनों के  कुचक्र से बाहर निकालने का प्रयास किया गया है। श्रमिकों के स्वास्थ्य, सुरक्षा, सुविधा और वेतन को लेकर अब कानूनों को सरल बनाया गया है, सहज बनाया गया है|नए कानूनों के माध्यम से देश के सभी, करीब 50 करोड़ संगठित और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को वेतन मिले और समय पर मिले, इसको कानूनी रूप से अनिवार्य कर दिया गया है|




PM ने कहा कि ''अभी तक खनन, बिल्डिंग और कंस्ट्रक्शन वर्कर, स्वीपिंग और क्लीनिंग, मैन्यूफैक्चरिंग, ऐसे कुछ कामों से जुड़े देश के सिर्फ 30% श्रमिकों को ही न्यूनतम वेतन मिलता था|अब IT इंडस्ट्री, होटल, ढाबा, ट्रांसपोर्ट, घरेलू कामगार, असंगठित क्षेत्र के तमाम दूसरे श्रमिकों को भी इसके दायरे में लाया गया है|




उन्होंने कहा,''अभी पूरे देश में न्यूनतम वेतन को लेकर करीब 10 हज़ार अलग-अलग दरें हैं। अब नए प्रावधानों से ये 200 के करीब रह जाएंगी। इसके अलावा अब ठेका मज़दूरी के स्थान पर एक फिक्स्ड टर्म के रोज़गार का भी विकल्प दिया गया है|ऐसे श्रमिकों को रेगुलर कर्मचारी की तरह ही वेतन मिलेगा, वेलफेयर से जुड़ी दूसरी योजनाओं का लाभ मिलेगा और उन्ही की ही तरह काम के घंटे भी फिक्स होंगे|वहीं एक राज्य से दूसरे राज्य में काम के लिए जाने वाले श्रमिक साथियों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और  लिए भी इसमें हर ज़रूरी प्रावधान किया गया है|





PM ने कहा कि ''जो पहले के श्रमिक कानून थे, वो देश की आधी आबादी, हमारी महिला श्रमशक्ति के लिए काफी नहीं थे। अब इन नए कानूनों से हमारी बहनों को, बेटियों को, समान मानदेय दिया गया है, उनकी ज्यादा भागीदारी को सुनिश्चित किया गया है|किसानों, श्रमिकों और महिलाओं की ही तरह छोटे-छोटे स्वरोजगार से जुड़े साथियों का एक बहुत बड़ा वर्ग ऐसा था, जिसकी सुध कभी नहीं ली गई। रेहड़ी, पटरी, फेरी पर काम करने वाले लाखों साथी जो आत्मसम्मान के साथ अपने परिवार भरण-पोषण करते हैं उनके लिए भी पहली बार एक विशेष योजना बनाई गई है|




उन्होंने कहा,'''लाखों रेहड़ी-पटरी वाले साथियों को बैंक से सीधे 10 हज़ार रुपए का ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। ये सिर्फ एकमुश्त ऋण की योजना नहीं है|बल्कि इससे रेहड़-पटरी वालों को इस तरह बैंकिंग सिस्टम से जोड़ा गया है, कि अगर वो अपने छोटे कारोबार को आगे बढ़ाना चाहते हैं तो बैंक उनको आगे भी ज्यादा लोन दे सके, कम दरों पर कर्ज दे सके|




प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि,कोशिश ये है कि आत्मनिर्भरता के व्यापक मिशन से हर कोई जुड़े, सभी को अवसर मिले। इसी ध्येय के साथ SC/ST वर्ग के साथियों के लिए जो आरक्षण का प्रावधान है, उसको हमारी सरकार ने पार्लियामेंट में अगले 10 वर्ष के लिए बढ़ाया गया है|गरीब हो, किसान हो, श्रमिक हो, महिलाएं हों, ये सभी आत्मनिर्भर भारत के मज़बूत स्तंभ हैं। इसलिए, इनका आत्मसम्मान और आत्मगौरव ही, आत्मनिर्भर भारत की प्राण-शक्ति है और प्रेरणा हैं|





उन्होंने कहा,'''हमारा वैचारिक तंत्र और राजनीतिक मंत्र, साफ़ है, गोलमोल नहीं है, हमने उसको जीकर दिखाया है, हम लोगों के लिए राष्ट्र सर्वोपरि, Nation First, यही हमारा मंत्र है|भाजपा के कार्यकर्ता के रूप में जिस संकल्प पत्र को लेकर आप घर-घर, द्वार-द्वार गए थे, आज जब आप उसको देखेंगे तो आप पाएंगे कि कितनी तेजी से काम किया जा रहा है।  हर घर जल और हर गांव तक तेज़ इंटरनेट, जैसे अनेक ऐसे संकल्प हैं, जो करोड़ों देशवासियों के जीवन को आसान बनाने वाले हैं|इसमें आर्टिकल-370, अयोध्या में भव्य राममंदिर का निर्माण, जैसे वो वादे भी शामिल हैं, जो दशकों की हमारी तपस्या का भी आधार रहे हैं, ध्येय रहे हैं।  संकल्प लेकर उसे सिद्ध करने की इस ताकत को हमें बनाए रखना है, ऊर्जावान रखना है|




उन्होंने कहा,''बदलते हुए समय में बहुत कुछ तेजी से बदल रहा है। भाजपा के कार्यकर्ता ने इस दौर में जिस तरह की Flexibility और adoptability दिखाई है, वो भी प्रशंसनीय है। कोरोना काल में भी हमने ये कर दिखाया है|समाज की सेवा में सक्रियता दिखाने के साथ-साथ, दल के रूप में, कार्यकर्ता के रूप में, हमें एक और बात का विशेष ध्यान रखना है। हमारी बातें, हमारे विचार, हमारा आचरण, 21वीं सदी के भारत की आकांक्षाओं और अपेक्षाओं के अनुरूप ही होने चाहिए|




उन्होंने कहा,''हमारे आदर्श, हमारी परंपरा, हमारी प्रेरणा, जितनी प्राचीन है, उतनी ही नवीन भी होनी चाहिए। हम भले ही दुनिया के सबसे बड़े राजनीतिक दल हों, लेकिन हमारी पहुंच भारत के छोटे से छोटे गांव तक, छोटी से छोटी गली तक होनी ही चाहिए|अगर कोरोना के इस कालखंड की ही बात करें, तो दो गज़ की दूरी, मास्क, हाथ की साफ-सफाई, इन सभी के लिए जागरूकता फैलाना, निरंतर जरूरी है। हमें खुद भी इन नियमों का सख्ती से पालन करना है और दूसरे लोगों को भी इसके लिए प्रोत्साहित करना है|आज देश वोकल फॉर लोकल के मंत्र के साथ आगे बढ़ रहा है। लेकिन ये सिर्फ बातों से ही संभव नहीं होगा। भाजपा के प्रत्येक कार्यकर्ता को भी स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देनी है|





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TVL News (TheViralLines) के संवाददाता। यह रिपोर्ट स्थानीय स्रोतों और उपलब्ध आधिकारिक जानकारी की पुष्टि के बाद प्रकाशित की गई है। किसी तथ्य में सुधार के लिए संपर्क करें या +91 99996 56869 पर WhatsApp करें।

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यह रिपोर्ट 25 सितंबर 2020 को TVL News पर प्रकाशित हुई और 9 मई 2025 को अपडेट की गई। नई जानकारी मिलने पर खबर को अपडेट किया जाता है।

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