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24 अगस्त 2026

वर्ष 2020 में हम सबने कई महत्वपूर्ण सबक सीखे: राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द का स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम संदेश, पढ़ें पूरी स्पीच

नई दिल्ली: 74वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने राष्ट्र के नाम संबोधन दिया| राष्ट्रपति ने 74वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर देश-विदेश में रह रहे, भारत के सभी ल…

वर्ष 2020 में हम सबने कई महत्वपूर्ण सबक सीखे: राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द का स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम संदेश, पढ़ें पूरी स्पीच
वर्ष 2020 में हम सबने कई महत्वपूर्ण सबक सीखे: राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द का स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम संदेश, पढ़ें पूरी स्पीच | फ़ोटो: TVL News

नई दिल्ली: 74वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने राष्ट्र के नाम संबोधन दिया| राष्ट्रपति ने 74वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर देश-विदेश में रह रहे, भारत के सभी लोगों को बहुत-बहुत बधाई और ढेर सारी शुभकामनाएं दी|राष्ट्रपति ने कहा,इस अवसर पर, हम अपने स्वाधीनता सेनानियों के बलिदान को कृतज्ञता के साथ याद करते हैं। उनके बलिदान के बल पर ही, हम सब, आज एक स्वाधीन देश के निवासी हैं।



राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा, वर्ष 2020 में हम सबने कई महत्वपूर्ण सबक सीखे हैं।  एक अदृश्य वायरस ने इस मिथक को तोड़ दिया है कि प्रकृति मनुष्य के अधीन है।  राष्ट्र उन सभी डॉक्टरों, नर्सों तथा अन्य स्वास्थ्य-कर्मियों का ऋणी है जो कोरोना वायरस के खिलाफ इस लड़ाई में अग्रिम पंक्ति के योद्धा रहे हैं।ये हमारे राष्ट्र के आदर्श सेवा-योद्धा हैं। इन कोरोना-योद्धाओं की जितनी भी सराहना की जाए, वह कम है।  ये सभी योद्धा अपने कर्तव्य की सीमाओं से ऊपर उठकर, लोगों की जान बचाते हैं और आवश्यक सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करते हैं।




राष्ट्रपति कोविंद ने कहा,इसी दौरान, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में आए ‘अम्फान’ चक्रवात ने भारी नुकसान पहुंचाया, जिससे हमारी चुनौतियां और बढ़ गयीं।  इस आपदा के दौरान, जान-माल की क्षति को कम करने में आपदा प्रबंधन दलों, केंद्र और राज्यों की एजेंसियों तथा सजग नागरिकों के एकजुट प्रयासों से काफी मदद मिली।




मेरे प्यारे देशवासियो,नमस्कार!


1. 15 अगस्त को,हम सब तिरंगे को लहराते हुएस्वाधीनता दिवस समारोहों में भाग लेकर और देशभक्ति से भरे गीत सुनकर उत्साह से भर जाते हैं। हमारे युवाओं के लिए यह स्वाधीनता के गौरव को महसूस करने का दिन है। इस अवसर परहम अपने स्वाधीनता सेनानियों के बलिदान को कृतज्ञता के साथ याद करते हैं। उनके बलिदान के बल पर हीहम सब,आज एक स्वाधीन देश के निवासी हैं।




2. हमारे स्वाधीनता संग्राम के आदर्शों की नींव पर हीआधुनिक भारत का निर्माण हो रहा है। हमारे दूरदर्शी राष्ट्र-नायकों नेअपने विविध विचारों को राष्ट्रीयता के एक सूत्र में पिरोया था। उनकी साझा प्रतिबद्धता थी-देश को दमनकारी विदेशी शासन से मुक्त कराना और भारत माता की संतानों के भविष्य को सुरक्षित करना। उन्होंने अपने कार्य-कलापों से आधुनिक राष्ट्र के रूप में भारत की पहचान को मूर्त रूप प्रदान किया।



3. हम सौभाग्यशाली हैं कि महात्मा गांधी हमारे स्वाधीनता आंदोलन के मार्गदर्शक रहे। उनके व्यक्तित्व में एक संत और राजनेता का जो समन्वय दिखाई देता हैवह भारत की मिट्टी में ही संभव था। सामाजिक संघर्षआर्थिक समस्याओं और जलवायु परिवर्तन से परेशान आज की दुनियागांधीजी की शिक्षाओं में समाधान पाती है। समानता और न्याय के लिए उनकी प्रतिबद्धताहमारे गणतंत्र का मूलमंत्र है। गांधीजी के बारे में युवा पीढ़ी की जिज्ञासा और उत्साह को देखकर मुझे अत्यन्त खुशी होती है।




प्यारे देशवासियो


4. इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस के उत्सवों में हमेशा की तरह धूम-धाम नहीं होगी। इसका कारण स्पष्ट है। पूरी दुनिया एक ऐसे घातक वायरस से जूझ रही है जिसने जन-जीवन को भारी क्षति पहुंचाई है और हर प्रकार की गतिविधियों में बाधा उत्पन्न की है। इस वैश्विक महामारी के कारण हम सबका जीवन पूरी तरह से बदल गया है।



5. यह बहुत आश्वस्त करने वाली बात है कि इस चुनौती का सामना करने के लिएकेंद्र सरकार ने पूर्वानुमान करते हुएसमय रहते,प्रभावी कदम उठा‍लिए थे। इन असाधारण प्रयासों के बल परघनी आबादी और विविध परिस्थितियों वाले हमारे विशाल देश मेंइस चुनौती का सामना किया जा रहा है। राज्य सरकारों ने स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार कार्रवाई की। जनता ने पूरा सहयोग दिया। इन प्रयासों से हमने वैश्विक महामारी की विकरालता पर नियंत्रण रखने और बहुत बड़ी संख्‍या में लोगों के जीवन की रक्षा करने में सफलता प्राप्त की है। यह पूरे विश्‍व के सामने एक अनुकरणीय उदाहरण है।



6. राष्ट्र उन सभी डॉक्टरोंनर्सों तथा अन्य स्वास्थ्य-कर्मियों का ऋणी है जो कोरोना वायरस के खिलाफ इस लड़ाई में अग्रिम पंक्ति के योद्धा रहे हैं। दुर्भाग्यवशउनमें से अनेक योद्धाओं ने,इस महामारी का मुक़ाबला करते हुए,अपने जीवन का बलिदान दिया है। ये हमारे राष्ट्र के आदर्श सेवा-योद्धा हैं। इन कोरोना-योद्धाओं की जितनी भी सराहना की जाएवह कम है। ये सभी योद्धा अपने कर्तव्य की सीमाओं से ऊपर उठकरलोगों की जान बचाते हैं और आवश्यक सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करते हैं। 




ऐसे डॉक्टरस्वास्थ्य-कर्मीआपदा प्रबंधन दलों के सदस्यपुलिस कर्मी,सफाई कर्मचारीडिलीवरी स्टाफ,परिवहनरेल और विमानन कर्मी,विभिन्न सेवा-प्रदातासरकारी कर्मचारी,समाजसेवी संगठन और उदार नागरिकअपने साहस तथा निस्वार्थ सेवा के प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं। जब गांव और नगर में कामकाज रुक जाता हैऔर सड़कें सुनसान हो जाती हैं,तब अपने अथक परिश्रम से ये कोरोना योद्धा सुनिश्चित करते हैं कि लोगों को स्वास्थ्य-सेवाएं और राहतपानी और बिजली,परिवहन और संचार सुविधादूध और सब्जी,भोजन और किराने का सामानदवा और अन्य आवश्यक सुविधाओं से वंचित न होना पड़े। वे अपनी जान को भारी जोखिम में डालते हैं ताकि हम सब इस महामारी से सुरक्षित रहें और हमारा जीवन तथा आजीविकादोनों चलती रहे।





7. इसी दौरानपश्चिम बंगाल और ओडिशा में आएअम्फान’ चक्रवात ने भारी नुकसान पहुंचायाजिससे हमारी चुनौतियां और बढ़ गयीं। इस आपदा के दौरानजान-माल की क्षति को कम करने में आपदा प्रबंधन दलोंकेंद्र और राज्यों की एजेंसियों तथा सजग नागरिकों के एकजुट प्रयासों से काफी मदद मिली। पूर्वोत्तर और पूर्वी राज्यों मेंदेशवासियों को बाढ़ के प्रकोप का सामना करना पड़ रहा है। इस तरह की आपदाओं के बीचसमाज के सभी वर्गों के लोग,एकजुट होकर,संकट-ग्रस्त लोगों की मदद करने के लिए आगे आ रहे हैं।




मेरे प्यारे देशवासियो

8. इस महामारी का सबसे कठोर प्रहारगरीबों और रोजाना आजीविका कमाने वालों पर हुआ है। संकट के इस दौर मेंउनको सहारा देने के लिएवायरस की रोकथाम के प्रयासों के साथ-साथअनेक जन-कल्याणकारी कदम उठाए गए हैं। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना’ की शुरूआत करके सरकार ने करोड़ों लोगों को आजीविका दी हैताकि महामारी के कारण नौकरी गंवानेएक जगह से दूसरी जगह जाने तथा जीवन के अस्त-व्यस्त होने के कष्ट को कम किया जा सके। लोगों की मदद के लिएसरकार अनेक कदम उठा रही है। इन प्रयासों मेंकॉर्पोरेट सेक्टरसिविल सोसायटी और नागरिकों का भरपूर सहयोग मिल रहा है।





9. किसी भी परिवार को भूखा न रहना पड़ेइसके लिए जरूरतमन्द लोगों को मुफ्त अनाज दिया जा रहा है। मुफ्त अनाज उपलब्ध कराने केदुनिया के सबसे बड़े इस अभियान कोनवंबर 2020 तक बढ़ा दिया गया है। इस अभियान से हर महीनेलगभग 80करोड़ लोगों को राशन मिलना सुनिश्चित किया गया है। राशन कार्ड धारक पूरे देश में कहीं भी राशन ले सकेंइसके लिए सभी राज्यों को वन नेशन - वन राशन कार्ड’ योजना के तहत लाया जा रहा है।



10. दुनिया में कहीं पर भी मुसीबत में फंसे हमारे लोगों की मदद करने के लिए प्रतिबद्धसरकार द्वारा वंदे भारत मिशन’ के तहतदस लाख से अधिक भारतीयों को स्वदेश वापस लाया गया है। भारतीय रेल द्वारा इस चुनौती-पूर्ण समय में ट्रेन सेवाएं चलाकरवस्तुओं तथा लोगों के आवागमन को संभव किया गया है।



11. अपने सामर्थ्य में विश्वास के बल परहमने कोविड-19के खिलाफ लड़ाई में अन्य देशों की ओर भी मदद का हाथ बढ़ाया है। अन्य देशों के अनुरोध परदवाओं की आपूर्ति करकेहमने एक बार फिर यह सिद्ध किया है कि भारत संकट की घड़ी मेंविश्व समुदाय के साथ खड़ा रहता है। क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर महामारी का सामना करने के लिए प्रभावी रणनीतियों को विकसित करने में हमारी अग्रणी भूमिका रही है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अस्थायी सदस्यता के लिएहाल ही में सम्पन्न चुनावों में मिला भारी समर्थनभारत के प्रति व्यापक अंतर्राष्ट्रीय सद्भावना का प्रमाण है।



12.भारत की यह परंपरा रही है कि हम केवल अपने लिए नहीं जीते हैंबल्कि पूरे विश्व के कल्याण की भावना के साथ कार्य करते हैं। भारत की आत्मनिर्भरता का अर्थ स्वयं सक्षम होना है,दुनिया से अलगाव या दूरी बनाना नहीं। इसका अर्थ यह भी है कि भारत वैश्विक बाज़ार व्यवस्था में शामिल भी रहेगा और अपनी विशेष पहचान भी कायम रखेगा।




प्यारे देशवासियो,

13.आज विश्व समुदाय, ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’अर्थात् समस्त विश्व एक ही परिवार है’ की उस मान्यता को स्वीकार कर रहा हैजिसका उद्घोष हमारी परंपरा में बहुत पहले ही कर दिया गया था। लेकिनआज जब विश्व समुदाय के समक्ष आई सबसे बड़ी चुनौती से एकजुट होकर संघर्ष करने की आवश्यकता हैतब हमारे पड़ोसी ने अपनी विस्तारवादी गतिविधियों को चालाकी से अंजाम देने का दुस्साहस किया। 



सीमाओं की रक्षा करते हुएहमारे बहादुर जवानों ने अपने प्राण न्योछावर कर दिए। भारत माता के वे सपूतराष्ट्र गौरव के लिए ही जिए और उसी के लिए मर मिटे। पूरा देश गलवान घाटी के बलिदानियों को नमन करता है। हर भारतवासी के हृदय में उनके परिवार के सदस्यों के प्रति कृतज्ञता का भाव है। उनके शौर्य ने यह दिखा दिया है कि यद्यपि हमारी आस्था शांति में हैफिर भी यदि कोई अशांति उत्पन्न करने की कोशिश करेगा तो उसे माकूल जवाब दिया जाएगा। हमें अपने सशस्त्र बलोंपुलिस तथा अर्धसैनिक बलों पर गर्व है जो सीमाओं की रक्षा करते हैंऔर हमारी आंतरिक सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।




14. मेरा मानना है कि कोविड-19 के विरुद्ध लड़ाई मेंजीवन और आजीविका दोनों की रक्षा पर ध्यान देना आवश्यक है। हमने मौजूदा संकट को सबके हित मेंविशेष रूप से किसानों और छोटे उद्यमियों के हित मेंसमुचित सुधार लाकर अर्थव्यवस्था को पुन:गति प्रदान करने के अवसर के रूप में देखा है। कृषि क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधार किए गए हैं। अबकिसान बिना किसी बाधा केदेश में कहीं भी,अपनी उपज बेचकर उसका अधिकतम मूल्य प्राप्त कर सकते हैं। किसानों को नियामक प्रतिबंधों से मुक्त करने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम’ में संशोधन किया गया है। इससे किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।




मेरे प्यारे देशवासियो,

15. वर्ष 2020 में हम सबने कई महत्वपूर्ण सबक सीखे हैं। एक अदृश्य वायरस ने इस मिथक को तोड़ दिया है कि प्रकृति मनुष्य के अधीन है। मेरा मानना है कि सही राह पकड़करप्रकृति के साथ सामंजस्य पर आधारित जीवन-शैली को अपनाने का अवसरमानवता के सामने अभी भी मौजूद है। जलवायु परिवर्तन की तरहइस महामारी ने भी यह चेतना जगाई है कि विश्व-समुदाय के प्रत्येक सदस्य की नियति एक दूसरे के साथ जुड़ी हुई है। मेरी धारणा है कि वर्तमान संदर्भ में अर्थ-केंद्रित समावेशन’ से अधिक महत्व मानव-केंद्रित सहयोग’ का है। यह बदलाव जितना अधिक व्यापक होगामानवता का उतना ही अधिक भला होगा। इक्कीसवीं सदी को उस सदी के रूप में याद किया जाना चाहिए जब मानवता ने मतभेदों को दरकिनार करकेधरती मां की रक्षा के लिए एकजुट प्रयास किए।




16. दूसरा सबक यह है कि प्रकृति रूपी जननी की दृष्टि में हम सब एक समान हैं तथा अपने जीवन की रक्षा और विकास के लिए मुख्यतअपने आस-पास के लोगों पर निर्भर हैं। कोरोना वायरस मानव समाज द्वारा बनाए गए कृत्रि‍म विभाजनों को नहीं मानता है। इससे यह विश्वास पुष्ट होता है कि मनुष्यों द्वारा उत्पन्न किए गए हर प्रकार के पूर्वाग्रह और सीमाओं सेहमें ऊपर उठने की आवश्यकता है। भारतवासियों में परस्पर सहयोग और करुणा की भावना दिखाई देती है। हमेंअपने आचरण में इस सद्गुण को और अधिक समाविष्ट करना चाहिए। तभी हमसबके लिए बेहतर भविष्य का निर्माण कर सकते हैं।




17. तीसरा सबकस्वास्थ्य-सेवा को और मजबूत करने से जुड़ा है। सार्वजनिक अस्पतालों और प्रयोगशालाओं ने कोविड-19 का सामना करने में अग्रणी भूमिका निभाई है। सार्वजनिक स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं के कारण गरीबों के लिए इस महामारी का सामना करना संभव हो पाया है। इसलिएइन सार्वजनिक स्वास्थ्य-सुविधाओं को और अधिक विस्तृत व सुदृढ़ बनाना होगा।



18. चौथा सबकविज्ञान और प्रौद्योगिकी से संबंधित है। इस वैश्विक महामारी से विज्ञान और टेक्‍नोलॉजी को तेजी से विकसित करने की आवश्यकता पर और अधिक ध्यान गया है। लॉकडाउन और उसके बाद क्रमशः अनलॉक की प्रक्रिया के दौरान शासनशिक्षाव्यवसायकार्यालय के काम-काज और सामाजिक संपर्क के प्रभावी माध्यम के रूप में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी को अपनाया गया है। इस माध्यम की सहायता से सभी भारतीयों का जीवन बचाने और काम-काज को फिर से शुरू करने के उद्देश्यों कोएक साथ हासिल करने में मदद मिली है। केंद्र एवं राज्‍य सरकारों के कार्यालयअपने कार्यों के निर्वहन के लिएबड़े पैमाने पर,वर्चुअल इंटरफ़ेस का उपयोग कर रहे हैं। 



न्याय प्रदान करने के लिएन्यायपालिका ने वर्चुअल कोर्ट की कार्यवाही को अपनाया है। वर्चुअल कॉन्फ्रेंस आयोजित करने तथा अन्य अनेक गतिविधियों को सम्पन्न करने के लिए राष्ट्रपति भवन में भी हमप्रौद्योगिकी का उपयोग कर रहे हैं। आईटी और संचार उपकरणों की सहायता से डिस्टेन्स एजुकेशन तथा ई-लर्निंग को बढ़ावा मिला है। कई क्षेत्रों में अबघर से काम करने का ही प्रचलन हो गया है। प्रौद्योगिकी की सहायता सेसरकारी और निजी क्षेत्रों के अनेक प्रतिष्ठानों द्वारासामान्य स्तर से कहीं अधिक काम-काज करकेअर्थव्यवस्था को गति प्रदान की गई है। इस प्रकारहमने यह सबक सीखा है कि प्रकृति से सामंजस्य रखते हुए विज्ञान और प्रौद्योगिकी को अपनाने सेहमारे अस्तित्व और विकास की निरंतरता को बनाए रखने में सहायता मिलेगी।




19. ये सभी सबकपूरी मानवता के लिए उपयोगी सिद्ध होंगे। आज की युवा पीढ़ी ने इन्हें भली-भांति आत्मसात किया हैऔर मुझे विश्वास है कि इन युवाओं के हाथों में भारत का भविष्य सुरक्षित है।



20. यह दौर हम सभी के लिए कठिन है। हमारे युवाओं की कठिनाई तो और भी गंभीर दिखाई देती है। शिक्षण संस्थानों के बंद होने से हमारे बेटे-बेटियों में चिंता पैदा हुई होगीऔर फिलहालवे अपने सपनों और आकांक्षाओं को लेकर चिंतित होंगे। मैं उन्हें यह बताना चाहूंगा कि इस संकट पर हम विजय हासिल करेंगे,और इसलिएअपने सपनों को पूरा करने के प्रयासों में आप सभी युवाओं को निरंतर जुटे रहना चाहिए। इतिहास मेंऐसे प्रेरक उदाहरण उपलब्ध हैं जहां बड़े संकटों एवं चुनौतियों के बाद सामाजिकआर्थिकऔर राष्ट्रीय पुनर्निर्माण का कार्य नई ऊर्जा के साथ किया गया। मुझे विश्वास है कि हमारे देश और युवाओं का भविष्य उज्ज्वल है।



21. हमारे बच्चों और युवाओं को भविष्य की जरूरतों के अनुसार शिक्षा प्रदान करने की दृष्टि सेकेंद्र सरकार ने हाल ही में राष्ट्रीय शिक्षा नीति’ लागू करने का निर्णय लिया है। मुझे विश्वास है कि इस नीति सेगुणवत्ता से युक्त एक नई शिक्षा व्यवस्था विकसित होगी जो भविष्‍य में आने वाली चुनौतियों को अवसर में बदलकर नए भारत का मार्ग प्रशस्‍त करेगी। हमारे युवाओं को अपनी रूचि और प्रतिभा के अनुसार अपने विषयों को चुनने की आजादी होगी। उन्हें अपनी क्षमताओं को विकसित करने का अवसर मिलेगा।हमारी भावी पीढ़ीइन योग्‍यताओं के बल पर न केवल रोजगार पाने में समर्थ होगीबल्कि दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर उत्‍पन्‍न करेगी।




22. राष्ट्रीय शिक्षा नीति एक दूरदर्शी और दूरगामी नीति है। इससे शिक्षा में ‘Inclusion’, ‘Innovation’ और ‘Institution’ की संस्कृति को मजबूती मिलेगी। नई शिक्षा नीति के तहत मातृभाषा में अध्ययन को महत्व दिया गया हैजिससे बालमन सहजता से पुष्पित-पल्लवित हो सकेगा। साथ ही इससे भारत की सभी भाषाओं को और भारत की एकता को आवश्यक बल मिलेगा। किसी भी राष्ट्र को सशक्त बनाने के लिए उसके युवाओं का सशक्तीकरण आवश्यक होता है और राष्ट्रीय शिक्षा नीति इस दिशा में एक बड़ा कदम है।






 प्यारे देशवासियो

23. केवल दस दिन पहले अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण का शुभारंभ हुआ है और देशवासियों को गौरव की अनुभूति हुई है। देशवासियों ने लंबे समय तक धैर्य और संयम का परिचय दिया और देश की न्याय व्यवस्था में सदैव आस्था बनाए रखी। श्रीराम जन्मभूमि से संबंधित न्यायिक प्रकरण को भी समुचित न्याय-प्रक्रिया के अंतर्गत सुलझाया गया। सभी पक्षों और देशवासियों ने उच्चतम न्यायालय के निर्णय को पूरे सम्मान के साथ स्वीकार किया और शांतिअहिंसाप्रेम एवं सौहार्द के अपने जीवन मूल्यों को विश्व के समक्ष पुनः प्रस्तुत किया। इसके लिए मैं सभी देशवासियों को बधाई देता हूँ।




मेरे प्यारे देशवासियो,

24. जब भारत ने स्वाधीनता हासिल कीतो कुछ लोगों ने यह आशंका जताई थी कि लोकतंत्रका हमारा प्रयोग सफल नहीं होगा। वे हमारी प्राचीन परंपराओं और बहुआयामी विविधता को हमारी राज्य-व्यवस्था के लोकतंत्रीकरण के मार्ग में बाधा समझते थे। लेकिनहमने अपनी परम्पराओं और विविधता को सदैव अपनी ताकत समझकर उनका संवर्धन किया हैऔर इसीलिए दुनिया का यह सबसे बड़ा लोकतंत्र इतना जीवंत है। मानवता की भलाई के लिएभारत को अग्रणी भूमिका निभाते रहना है।



25. आप सभी देशवासीइस वैश्विक महामारी का सामना करने मेंजिस समझदारी और धैर्य का परिचय दे रहे हैंउसकी सराहना पूरे विश्व में हो रही है। मुझे विश्‍वास है कि आप सब इसी प्रकारसतर्कता और ज़िम्मेदारी बनाए रखेंगे।




26. हमारे पास विश्व-समुदाय को देने के लिए बहुत कुछ हैविशेषकर बौद्धिक,आध्यात्मिक और विश्व-शांति के क्षेत्र में। इसी लोक-मंगल की भावना के साथमैं प्रार्थना करता हूं कि समस्त विश्व का कल्याण हो:


सर्वे भवन्तु सुखिनःसर्वे सन्तु निरामयाः।

सर्वे भद्राणि पश्यन्तुमा कश्चित् दु:खभाग् भवेत्॥



सभी सुखी रहेंसभी रोग-मुक्त रहेंसब लोग अच्छाइयों पर ध्यान देंऔर किसी को भी दुख न भोगना पड़े।

सम्पूर्ण विश्व के कल्याण का यह संदेशमानवता के लिएभारत का एक अनूठा उपहार है।




27. एक बार फिरआप सबको, 74वें स्वाधीनता दिवस की बधाई देते हुए आप सभी केअच्छे स्वास्थ्य एवं सुन्दर भविष्य की कामना करता हूं।








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TVL News (TheViralLines) के संवाददाता। यह रिपोर्ट स्थानीय स्रोतों और उपलब्ध आधिकारिक जानकारी की पुष्टि के बाद प्रकाशित की गई है। किसी तथ्य में सुधार के लिए संपर्क करें या +91 99996 56869 पर WhatsApp करें।

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यह रिपोर्ट 14 अगस्त 2020 को TVL News पर प्रकाशित हुई और 9 मई 2025 को अपडेट की गई। नई जानकारी मिलने पर खबर को अपडेट किया जाता है।

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