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25 अगस्त 2026

RBI के पूर्व गवर्नर ने कहा-कॉरपोरेट घरानों को बैंक खोलने की अनुमति देना 'Bad Idea' बोली कांग्रेस-विशेषज्ञों की भी सुन लो सरकार या मित्रों पर होगी कृपा अपार

नई दिल्ली: भारतीय कॉरपोरेट घरानों को बैंक स्थापित करने की अनुमति देने की सिफारिश की रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन और पूर्व डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने आलोचना की है| उन्होंने इस सुझाव को 'B…

RBI के पूर्व गवर्नर ने कहा-कॉरपोरेट घरानों को बैंक खोलने की अनुमति देना 'Bad Idea' बोली कांग्रेस-विशेषज्ञों की भी सुन लो सरकार या मित्रों पर होगी कृपा अपार
RBI के पूर्व गवर्नर ने कहा-कॉरपोरेट घरानों को बैंक खोलने की अनुमति देना 'Bad Idea' बोली कांग्रेस-विशेषज्ञों की भी सुन लो सरकार या मित्रों पर होगी कृपा अपार | फ़ोटो: TVL News

नई दिल्ली:  भारतीय कॉरपोरेट घरानों को बैंक स्थापित करने की अनुमति देने की सिफारिश की रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन और पूर्व डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने आलोचना की है| उन्होंने इस सुझाव को 'Bad Idea कहा है| रघुराम राजन और विरल आचार्य ने कहा कॉरपोरेट घरानों को बैंकिंग लाइसेंस देने की सिफारिश चौंकाने वाली है| 




कांग्रेस ने बैंकिंग सेक्टर में कारोबारियों के दखल की सिफारिश को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर हमला बोला| कांग्रेस ने कहा कि,'''भाजपा सरकार की कृपा से अब बैंकिंग क्षेत्र में भी पूंजीपति मितरों का दखल होने जा रहा है। यह दखल हमारी डूबती अर्थव्यवस्था को और अधिक डूबा देगा। लेकिन भाजपा सरकार आर्थिक विशेषज्ञों की सलाह को अनसुना कर अपने मितरों पर कृपा कर रही है।




कांग्रेस ने ट्वीट किया ,''भारतीय कॉरपोरेट घरानों को बैंक लाइसेंस की सिफारिश पर रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन और पूर्व डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने RBI की आलोचना की है|कांग्रेस ने आगे लिखा है कि,''विशेषज्ञों की भी सुन लो सरकार..या मित्रों पर होगी कृपा अपार|




बता दें कि,''रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन और पूर्व डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने कहा है कि कॉरपोरेट घरानों को बैंक स्थापित करने की मंजूरी देने की सिफारिश आज के हालात में चौंकाने वाली है। दोनों का मानना है कि बैंकिंग क्षेत्र में कारोबारी घरानों की संलिप्तता के बारे में अभी आजमायी गयी सीमाओं पर टिके रहना अधिक महत्वपूर्ण है।




रिजर्व बैंक के द्वारा गठित एक आंतरिक कार्य समूह (आईडब्ल्यूजी) ने पिछले सप्ताह कई सुझाव दिये थे। इन सुझावों में यह सिफारिश भी शामिल है कि बैंकिंग विनियमन अधिनियम में आवश्यक संशोधन करके बड़े कॉरपोरेट घरानों को बैंक शुरू करने का लाइसेंस दिया जा सकता है। राजन और आचार्य ने एक साझा आलेख में यह भी कहा कि इस प्रस्ताव को अभी छोड़ देना बेहतर है।|सोमवार को लिंक्डइन पर रघुराम राजन ने एक पोस्ट किया जिसमें उन्होंने इस सिफारिश को 'खराब विचार' बताया| 





"जुड़ी हुई बैंकिंग का इतिहास बेहद त्रासद रहा है। जब बैंक का मालिक कर्जदार ही होगा, तो ऐसे में बैंक अच्छा ऋण कैसे दे पायेगा? जब एक स्वतंत्र व प्रतिबद्ध नियामक के पास दुनिया भर की सूचनाएं होती हैं, तब भी उसके लिये खराब कर्ज वितरण पर रोक लगाने के लिये हर कहीं नजर रख पाना मुश्किल होता है।’’ इस कार्य समूह का गठन देश के निजी क्षेत्र के बैंकों में स्वामित्व से संबंधित दिशानिर्देशों और कंपनी संचालन संरचना की समीक्षा करने के लिये किया गया था।





आलेख में कार्य समूह के इसी प्रस्ताव की ओर इशारा करते हुए कहा गया कि बड़े पैमाने पर तकनीकी नियामकीय प्रावधानों को तार्किक बनाये जाने के बीच यह (कार्पोट घरानों को बैंक का लाइसेंस देने संबंधी सिफारिश) सबसे महत्वपूर्ण सुझाव ‘चौंकाने वाला है।’ आलेख में कहा गया, ‘‘इसमें प्रस्ताव किया गया है कि बड़े कॉरपोरेट घरानों को बैंकिंग क्षेत्र में उतरने की मंजूरी दी जाये। भले ही यह प्रस्ताव कई शर्तों के साथ है, लेकिन यह एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा करता है: ऐसा अभी क्यों?’’





यह आलेख रघुराम राजन के लिंक्डइन प्रोफाइल पर सोमवार को पोस्ट किये गए में कहा गया, आंतरिक कार्य समूह ने बैंकिंग अधिनियम 1949 में कई अहम संशोधन का सुझाव दिया है। इसका उद्देश्य बैंकिंग में कॉरपोरेट घरानों को घुसने की मंजूरी देने से पहले रिजर्व बैंक की शक्तियों को बढ़ाना है। दोनों लेखकों ने कहा, ‘‘यदि अच्छा नियमन व अच्छी निगरानी सिर्फ कानून बनाने से संभव होता तो भारत में गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) की समस्या नहीं होती। संक्षेप में कहा जाये तो तकनीकी रूप से तार्किक बनाने पर केंद्रित आंतरिक समूह के कई सुझाव अपनाये जाने योग्य हैं, लेकिन इसका मुख्य सुझाव यानी बैंकिंग में कॉरपोरेट घरानों को उतरने की मंजूरी देना अभी पड़े रहने देने लायक है।’’



राजन और आचार्य ने कहा कि दुनिया के कई अन्य हिस्सों की तरह भारत में बैंकों को शायद ही कभी विफल होने दिया जाता है। यस बैंक और लक्ष्मी विलास बैंक को हाल में जिस तरह से बचाया गया है, यह इसी का उदाहरण है। इसी कारण से जमाकर्ताओं को यह भरोसा होता है कि अधिसूचित बैंकों में रखा उनका पैसा सुरक्षित है। इससे बैंकों के लिये जमाकर्ताओं के रखे पैसे के बड़े हिस्से का इस्तेमाल करना आसान हो जाता है।




रिजर्व बैंक के दोनों पूर्व अधिकारियों ने कहा कि बैंकिंग क्षेत्र में बड़े कॉरपोरेट घरानों को उतरने नहीं देने के पीछे दो वजहें हैं। पहला तर्क है कि औद्योगिक घरानों को वित्तपोषण की जरूरत होती है। यदि उनके पास अपना बैंक होगा तो वे बिना किसी सवाल के आसानी से पैसे ले लेंगे। दूसरा कारण है कि बैंकिंग में कॉरपोरेट घरानों के उतरने से कुछ कारोबारी घरानों की आर्थिक व राजनीतिक ताकतें बढ़ जायेंगी।




tvlnews

TVL News (TheViralLines) के संवाददाता। यह रिपोर्ट स्थानीय स्रोतों और उपलब्ध आधिकारिक जानकारी की पुष्टि के बाद प्रकाशित की गई है। किसी तथ्य में सुधार के लिए संपर्क करें या +91 99996 56869 पर WhatsApp करें।

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यह रिपोर्ट 24 नवंबर 2020 को TVL News पर प्रकाशित हुई और 10 मई 2025 को अपडेट की गई। नई जानकारी मिलने पर खबर को अपडेट किया जाता है।

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