नई दिल्ली: रिलायंस फाउंडेशन की अध्यक्ष नीता अंबानी को बीएचयू में विजिटिंग प्रोफेसर बनाए जाने के प्रस्ताव के खिलाफ बीएचयू में छात्रों के एक गुट ने कुलपति आवास का घेराव कर विरोध किया| छात्रों का कहना है कि किसी पूंजीपति की पत्नी होना महिला सशक्तिकरण का पैमाना नहीं हो सकता है| छात्रों ने चेतावनी भी दी कि अगर नीता अंबानी आती हैं तो वह इसका विरोध करेंगे और यह सारा कुछ निजीकरण को बढ़ावा देने के तहत किया जा रहा है|
अब वही रिलायंस इंडस्ट्रीज की कार्यकारी निदेशक और रिलायंस फाउंडेशन की अध्यक्ष नीता अंबानी के बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में विजिटिंग प्रोफेसर बनने की रिपोर्ट को उनके प्रवक्ता ने फर्जी करार दिया है। नीता अंबानी बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में एक लेक्चरर होंगी, जो फर्जी हैं। उसे BHU से निमंत्रण नहीं मिला है
रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के प्रवक्ता ने कहा कि,''नीता अंबानी को बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में विजिटिंग प्रोफेसर बनाई जाने की खबरें फर्जी हैं। नीता अंबानी को विश्वविद्यालय से कोई प्रस्ताव नहीं मिला है।
खबरों के मुताबिक', बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के सामाजिक विज्ञान संकाय की ओर से नीता अंबानी को विजिटिंग प्रोफेसर बनाने का प्रस्ता भेजा गया है। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के सामाजिक विज्ञान संकाय ने रिलायंस इंडस्ट्रीज की कार्यकारी निदेशक और रिलायंस फाउंडेशन की अध्यक्ष नीता अम्बानी को विजिटिंग प्रोफेसर बनाने का आमंत्रण प्रस्ताव भी भेजा है| ये प्रस्ताव बीएचयू प्रशासन की तरफ से नहीं बल्कि एक डिपार्टमेंट की तरफ से भेजा गया है| डिपार्टमेंट का कहना है कि उसने यह निर्णय महिला अध्ययन केंद्र में पढ़ रही छात्राओं के लिए लिया गया है|
नीता को बीएचयू का विजिटिंग प्रोफेसर बनाए जाने की खबरें आने के बाद विश्वविद्यालय के छात्रों ने विरोध शुरू कर दिया। छात्रों ने कुलपति पर बीएचयू को उद्योगपतियों के इशारे पर चलाने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की थी। वहीं, सामाजिक विज्ञान संकाय के डीन प्रोफेसर कौशल किशोर मिश्रा ने बताया था कि नीता अंबानी ने मौखिक तौर पर प्रस्ताव स्वीकारा भी है। वैसी भी मालवीय जी के समय से परंपरा रही है कि बीएचयू से बड़े उद्योगपतियों को जोड़ा गया है। उसी कड़ी में अंबानी को जोड़ने की कोशिश हो रही है। उनके जुड़ने से महिलाओं को रोजगार के कई साधन उपलब्ध होंगे।