नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर में 'जल जीवन योजना' के तहत 13,000 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। जम्मू-कश्मीर में जल जीवन मिशन में ₹13,000 करोड़ के घोटाले को लेकर कांग्रेस ने आज सोमवार को केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर करारा हमला बोला है| जल जीवन मिशन घोटाले पर कांग्रेस ने कहा, "G-20 की आड़ में LG-420 को छिपाया जा रहा है। जब अशोक परमार नाम के IAS अफसर इस गबन को सामने लाते हैं, तो उनका साल में 4-5 बार ट्रांसफर और LG द्वारा अपमान किया जाता है। वहीं अशोक परमार, जिन भ्रष्टाचारी अधिकारियों के नाम लेते हैं, उन्हें प्रमोशन दिया जा रहा है। कांग्रेस ने कहा, "जो अधिकारी जम्मू-कश्मीर में 'जल जीवन योजना' के भ्रष्टाचार में शामिल हैं, उन्हें प्रमोशन दिया जाता है और जो इसकी जानकारी सार्वजनिक करते हैं, उन्हें प्रताड़ित किया जाता है। अनियमितताएं बाहर न आए, उसके लिए योजनाओं को बांट दिया जाता है। इसके साथ ही कंपोजिट टेंडर की प्रथा को अनदेखा कर दिया जाता है।
कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि,'' मोदी सरकार ध्यान बंटाती है। रोज नए शगूफे छोड़ना, रोज नए इवेंट्स करना, रोज हैडलाइन मैनेजमेंट करना, तो सवाल उठता है और बड़ा जायज और वाजिब सवाल है, वो ऐसा क्यों करती है? किस मुद्दे से ध्यान बंटाने के लिए किया जाता है? बताया कुछ जाता है, वो तो दिख रहा है टीवी पर और सोशल मीडिया पर कि क्या दिखाना चाह रहे हैं? क्या छुपाना चाह रहे हैं, वो बहुत अहम सवाल हो जाता है।
--MODI सरकार का असली नाम है- मैन्युफैक्चरिंग ऑफ डायवर्सनरी इश्यूज सरकार !
--अपने घोटालों को जनता के ज़हन से दूर रखने के लिए - मोदी सरकार नित नए शगूफ़े परोसती है, लेकिन सच नहीं छिपता !
--कश्मीर में हुआ है ₹13,000 करोड़ का जल जीवन मिशन घोटाला, एक आईएएस अधिकारी ने किया खुलासा !
पवन खेड़ा ने कहा कि,''अशोक कुमार परमार एक आईएएस अधिकारी हैं, जिन्होंने केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर में जल जीवन मिशन (JJM ) में 13,000 करोड़ रुपये के बड़े घोटाले का पर्दाफाश किया है और उन्हें गुप्त रूप से जूनियर स्तर के पद पर स्थानांतरित कर दिया गया है। श्री परमार का सेवा में बेदाग रिकॉर्ड है और उन्होंने उन आईएएस अधिकारियों के नाम सूचीबद्ध किए हैं, जो दस्तावेजी सबूतों की एक श्रृंखला के अनुसार, भ्रष्टाचार के बड़े कृत्यों में शामिल थे। लेकिन घोटाला यहीं नहीं रुकता।
उन्होंने कहा,''ऐसा लगता है कि मोदी सरकार के शीर्ष अधिकारियों, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने परमार द्वारा घोटाले में नामित इन भ्रष्ट अधिकारियों को पदोन्नत किया है, और व्हिसलब्लोअर को दंडित किया है - अशोक परमार को जल शक्ति विभाग के प्रमुख सचिव से पदावनत कर ARI एवं प्रशिक्षण विभाग में भेज दिया गया, जबकि 30 वर्ष की सेवा के बाद उनका पद वित्तीय आयुक्त का होना चाहिए था । इतना ही नहीं, बल्कि मोदी सरकार ने पीएम मोदी के गृह राज्य गुजरात के आईएएस अधिकार परमार के खिलाफ गंभीर जाति आधारित उत्पीड़न भी किया है। यह एक बार फिर मोदी सरकार की निंदनीय दलित विरोधी मानसिकता को उजागर करता है।
पवन खेड़ा ने कहा कि,''हाल के दिनों में, हमने देखा है कि कैसे मोदी सरकार के घोटालों और पीएम मोदी के परम मित्र की चल रही गाथा को उजागर करने वाली कम से कम 7 सीएजी रिपोर्टों ने मोदी सरकार के "ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा" के नकली दावों को खोखला कर दिया है। हमने यह भी देखा है कि कैसे जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन राज्यपाल श्री सतपाल मलिक, जो एक संवैधानिक पद पर थे, ने खुलेआम आरएसएस के वरिष्ठ पदाधिकारी और वर्तमान में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव का नाम उजागर किया और बताया कि कैसे सुबह 7:00 बजे सुबह, वह दो फाइलों की मंजूरी लेने के लिए उनके पास पहुंचे। इन सौदों में 300 करोड़ की रिश्वत की बात सामने आई थी।
उन्होंने कहा,''देश इस बात से अच्छी तरह परिचित है कि कैसे केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत का नाम कथित तौर पर ₹884 करोड़ के मेगा संजीवनी क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी घोटाले में आया है।हम मीडिया रिपोर्टों के माध्यम से यह भी जानते हैं कि पकड़ा गया संदिग्ध ठग, संजय राय शेरपुरिया, जो भाजपा-आरएसएस ecosystem का हिस्सा था, ने 2019 के लोकसभा चुनावों के लिए श्री मनोज सिन्हा (वर्तमान एलजी) को ₹25 लाख का उधार दिया था ! इसलिए, यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि जम्मू-कश्मीर, एलजी की नाक के नीचे जल जीवन मिशन (जेजेएम) में भी घोटाला हुआ है!
घोटाले की कार्यप्रणाली: क्रोनोलोजी समझिये
1. तकनीकी मंजूरी और प्रशासनिक अनुमोदन के बिना निविदा ।
2. अनियमितताएं ना बाहर आएं, इसलिए योजनाओं का बंटवारा किया गया।
3. कम्पोजिट टेंडर की प्रथा को त्यागना।
4. लगभग हर जिले में ठेकेदारों द्वारा घटिया काम और निष्पादन।
5. विभिन्न स्तरों पर बार-बार चर्चा के बावजूद, WAPCOS आदि जैसे किसी विशेषज्ञ सलाहकार को नियुक्त नहीं किया गया।
6. 17 अगस्त की अपनी व्यापक शिकायत में परमार ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं कि “एलजी मनोज सिन्हा ने 6 जून 2022 को उन्हें बिना किसी गलती के परेशान करने और अपमानित करने के उद्देश्य से बैठक कक्ष से बाहर निकाल दिया था, और यह केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के सभी प्रशासनिक सचिवों के सामने किया गया था। ”
7. दलित वर्ग से आये इन अधिकारी ने यह भी आरोप लगाया है कि 25 जुलाई 2023 को जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव डॉ अरुण कुमार मेहता ने भी उन्हें अपमानित किया और बिना किसी गलती के सचिवों की समिति की बैठक से बाहर निकाल दिया और भारत सरकार की स्थानांतरण नीति का उल्लंघन करते हुए उनका लगातार स्थानांतरण किया गया।”
8. जब अशोक परमार, आईएएस ने इन भ्रष्ट आचरणों को उजागर किया, तो उनका एक वर्ष में चार बार स्थानांतरण किया गया।
9. राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को लिखे एक पत्र में परमार ने जम्मू-कश्मीर के एलजी और मुख्य सचिव पर "उत्पीड़न, धमकी और बदतमीजी " का आरोप लगाया है, और उनके लगातार स्थानांतरण का कारण जातिगत भेदभाव व "पूर्वाग्रह" बताया है। इस प्रकार मोदी सरकार की दलित विरोधी मानसिकता को उजागर करते हैं।
व्हिसलब्लोअर आईएएस अधिकारी अशोक परमार द्वारा नामित कुछ भ्रष्ट अधिकारी: -
1. हमेश मनचंदा ने नवंबर 2021 में तवी बैराज के शेष कार्य के लिए विज्ञापित राशि के लिए दोषपूर्ण ई-टेंडर जारी किया। कथित तौर पर दो सिविल कार्य घटकों को शामिल करके 66.617 करोड़ रु. का टेंडर किया। जब फिर से टेंडर देने का निर्णय लिया तब ये परियोजना 66.617 करोड़ से घटकर 51.66 करोड़ रुपये हो गई। हमेश मनचंदा को मुख्य अभियंता, पीएचई विभाग जम्मू के रूप में पदोन्नत किया गया था, भले ही उनके खिलाफ लंबित जांच के कारण उनकी अधीक्षण अभियंता के रूप में पुष्टि नहीं की गई थी।
केंद्रीय गृह मंत्रालय में सचिव अजय कुमार भल्ला को 24 मार्च 2023 को लिखे एक पत्र के अनुसार, व्हिसलब्लोअर परमार ने बताया कि “ हमेश मनचंदा ने तवी बैराज परियोजना के मुख्य अभियंता, सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण, जम्मू के रूप में बैलेंस वर्क (सिविल, हाइड्रो मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल) के लिए दोषपूर्ण टेंडर जारी किये थे। मुख्य सचिव ने मुझ पर एल 1 बोलीदाता को काम आवंटित करने का दबाव डाला था, जिसने 59.00 करोड़ रुपये की दर रखी थी । तवी बैराज परियोजना के शेष कार्य (सिविल, हाइड्रो मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल) के लिए मैंने एल 1 बोलीदाता के साथ बातचीत करने से इनकार कर दिया और हमेश मनचंदा से काम को फिर से प्रस्तुत करने के लिए कहा। उन्होंने टेंडर की लागत 50.00 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 54.00 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया। मुझे सबसे कम दर रु. 49.85 का टेंडर मिला, जिससे सरकारी खजाने का 09.00 करोड़ की बचत हुई । "
यह भी ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि हमेश मनचंदा 2014 में कार्यकारी अभियंता, सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण, अखनूर के रूप में अपनी पोस्टिंग के दौरान कथित तौर पर भारी वित्तीय अनियमितताओं में शामिल थे। उनके खिलाफ अपराध शाखा में शिकायत दर्ज की गई थी और कथित गबन के लिए नियमित विभागीय कार्रवाई की गई थी, जो अभी भी लंबित है।
2. आईएएस अधिकारी शालीन काबरा ने तवी बैराज परियोजना के बैलेंस वर्क (सिविल, हाइड्रो मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल) के मामले में लागत और समय की अधिकता की जांच नहीं की। परमार ने यह भी बताया कि "शालीन काबरा ने पीएचई विभाग, जम्मू के तत्कालीन मुख्य अभियंता मनेश भट्ट के खिलाफ कोई जांच नहीं की, जिन्हें सरकारी आदेश के अनुपालन में जल जीवन मिशन के कार्यान्वयन के लिए उनके कम प्रदर्शन के कारण निलंबित कर दिया गया था । " दिनांक 27.07.2022..." और मुख्य सचिव ने इन दोनों चीज़ों पर उनसे कोई स्पष्टीकरण नहीं मांगा।
चौंकाने वाली बात यह है कि जल शक्ति विभाग के प्रधान सचिव के रूप में शालीन काबरा ने सरकार की स्थानांतरण नीति का घोर उल्लंघन करते हुए सितंबर 2022 से मार्च 2023 तक 39 स्थानांतरण / तैनाती आदेश जारी किए थे और कई इंजीनियरों को 2 से 3 महीने के भीतर समय से पहले, एलजी, मुख्य सचिव और सलाहकारों की मंजूरी के बिना, उन्हें स्थानांतरित कर दिया था।
मोदी सरकार से हमारे सवाल:-कांग्रेस नेता पवन खेड़ा
1. क्या पीएम मोदी और उनकी सरकार जवाब देगी कि एक दलित आईएएस अधिकारी को क्यों परेशान किया गया और निशाना बनाया गया, जबकि उन्होंने ₹13,000 करोड़ के बड़े घोटाले का पर्दाफाश किया था? चोरी और गबन करने वाले, सरकारी खजाने से घोटाला करने वाले और हमारे लोगों को लूटने वाले अन्य अधिकारियों को पदोन्नत क्यों किया गया? क्या वे ऊपर की किसी उच्च शक्ति के आदेशों का पालन कर रहे थे?
2. 13,000 करोड़ रुपये के इस बड़े घोटाले का मास्टरमाइंड कौन है ? क्या यह एलजी कार्यालय है जो कथित तौर पर चूक और कमीशन के कार्यों में लिप्त है? अभी तो केवल छोटी मछली को ही चिन्हित किया गया है, लेकिन 'बड़ी मछली कहां है? ये लूटा हुआ पैसा कहां गया? किसकी जेब भरी जा रही थी ?
4.गृह मंत्रालय में शिकायतों के बावजूद और सीबीआई जांच की मांग के बावजूद, जम्मू-कश्मीर प्रशासन या मोदी सरकार ने जल जीवन मिशन के कार्यान्वयन में कई घोर अनियमितताओं और भ्रष्ट प्रथाओं की विस्तृत जांच का आदेश क्यों नहीं दिया ? मोदी सरकार किसे बचाने की कोशिश कर रही है? क्या यह एलजी है? क्या यह केंद्रीय जल शक्ति मंत्री हैं? या क्या यह गृह मंत्रालय में कोई है जो परोक्ष रूप से केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर के प्रशासन की देखभाल करता है?
5.एक दलित आईएएस अधिकारी का उत्पीड़न, उनको धमकी और उनके साथ दुर्व्यवहार के गंभीर आरोपों के बावजूद राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने उपराज्यपाल कार्यालय को कारण बताओ नोटिस क्यों नहीं दिया है? क्या उचित जांच के बाद उन पर एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत आरोप नहीं लगाया जाएगा? ओ या यूपीएससी के तहत कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग ने इस तथ्य पर कोई संज्ञान क्यों नहीं लिया कि बेदाग ट्रैक रिकॉर्ड के बावजूद, आईएएस अधिकारी को एक वर्ष में चार बार स्थानांतरित क्यों किया गया था?
6. मोदी सरकार ने परमार के खिलाफ झूठे आरोप क्यों लगाए, यह दावा करते हुए कि वह कॉन्ट्रैक्ट समिति का प्रमुख बनना चाहते थे, जबकि घोटाले के किसी भी लिखित दस्तावेज में उपलब्ध कोई भी रिकॉर्ड इसका संकेत नहीं देता है? क्या यह निर्लज्जतापूर्वक चरित्र हनन नहीं है? क्या यह एक व्हिसलब्लोअर का उत्पीड़न नहीं है? क्या यह 'उल्टा चोर कोतवाल को डांटे' सिंड्रोम नहीं है?
कांग्रेस नेता ने कहा,'मोदी सरकार, जो सीबीआई, ईडी, आयकर, सतर्कता अधिकारियों को आये दिन विपक्षी नेताओं के दरवाजे पर भेजती है पर अशोक परमार द्वारा प्रदान किए गए बेहद गंभीर आरोपों और दस्तावेजों की आंतरिक जांच करने की भी जहमत नहीं उठाती, क्यों? इसके बजाय, इसने देश को दैनिक ध्यान भटकाने के शगूफ़ों से केवल गुमराह किया है, ताकि सार्वजनिक धन की इसकी निरंतर लूट को आसानी से नज़र से दूर रखा जा सके भारत की जनता अब सब कुछ जानती है. वे 2024 में भाजपा को कर??रा जवाब देंगे। जुड़ेगा भारत, जीतेगा इंडिया !
एक प्रश्न पर कि अशोक परमार कहाँ पर पोस्टेड हैं? श्री खेड़ा ने कहा कि जम्मू- कश्मीर में जल जीवन मिशन जो परियोजना है, केंद्र सरकार की परियोजना है, उसमें ये घोटाला हुआ और जिस व्हिसलब्लोअर ने इस घोटाले का पर्दाफाश किया, उसको सजा दी जा रही है, बार-बार उसका स्थानांतरण किया जा रहा है और जिनको उसने नामजद किया, उन अधिकारियों को प्रोटेक्शन दिया जा रहा है, उनको बचाया जा रहा है। कश्मीर में ही पोस्टेड हैं और उसमें दो लोगों पर राजनीतिक लोगों पर शक की सुई जाती है, एक का नाम मैंने लिया, एक का मैं भूल गया, अभी ले लेता हूं। मनोज सिन्हा का लिया और जो जल जीवन मिशन के केंद्रीय मंत्री हैं, शेखावत साहब, उन पर भी एक शक की सुई जाती है कि उन्होंने क्यों एक व्हिसलब्लोअर को सजा देने दी या दी और नामजद अधिकारियों को बचाया गया, जिन पर ये आरोप था कि वो भ्रष्टाचार में लिप्त हैं।
एक अन्य प्रश्न पर कि ये घोटाले कैसे हुए? श्री खेड़ा ने कहा कि बिना टेंडर की प्रक्रिया का पालन किए, सारी जो प्रक्रियाएं हैं, उनका एक तरह से उल्लंघन करके ठेके दिए गए हैं। 13 हजार करोड़ के ठेके दिए गए हैं। ये सारा हर जिले में घटिया काम का निष्पादन है, वो भी एनेक्सचर, जो संलग्न है, वो भी आपको दिखेगा। विशेषज्ञ सलाहकार समिति को नियुक्त करने का अनुशंसा थी, वो नहीं करने दिया गया। तो जो-जो प्रक्रिया होती है, उन तमाम प्रक्रियाओं का उल्लंघन करके ठेके दिए गए और जो काम किया गया, उस काम के निष्पादन की जो क्वालिटी थी, वो भी ठीक नहीं थी। वो आरोप स्वयं एक अधिकारी ने लगाया ।
एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्री खेड़ा ने कहा कि इससे पहले सत्यपाल मलिक जी भी इस राज्य में क्या हो रहा है, वो बता चुके थे। उस पर भी अभी कोई कार्यवाही हुई नहीं है। उन्होंने बताया था कैसे संघ के एक वरिष्ठ नेता सुबह 7 बजे आकर इनके दरवाजे पर दस्तक देकर दो फाइलें लेकर आते हैं। वो सब सत्यपाल मलिक जी बहुत कुछ बता चुके हैं। अब उसी राज्य से ये एक और चौंकाने वाला घोटाला सामने आया है। उस वक्त सत्यपाल मलिक जी के साथ जो हुआ, वो हमने देखा, तो हो सकता है मनो सिन्हा जी इसलिए चुप रहते हों। ये भी हो सकता है। ये सवाल आपको पूछना चाहिए था, आपने नहीं पूछा, तो मैंने फिर भी जवाब दे दिया और अब आने वाले 5 मिनट में जो-जो सवाल आपके मन में हैं और किसी कारण से नहीं पूछ पा रहे हैं, उनका जवाब मैं यूंही देना शुरु कर दूंगा।
एक अन्य प्रश्न पर कि अब अशोक परमार कहाँ हैं? श्री खेड़ा ने कहा कि अशोक परमार जी अब ट्रेनिंग में हैं। प्रमुख सचिव होते थे इस विभाग के, उनको डिमोट करके ट्रेनिंग में डाल दिया ।
एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्री खेड़ा ने कहा कि कोई कारण है कि वहाँ चुनाव नहीं कराए जा रहे हैं, कोई कारण है कि वहाँ मीडिया को एक्सेस नहीं दिया जाता। कोई कारण है कि वहाँ खुलेआम कोई आदमी जाता है, जेड + सिक्योरिटी ले लेता है, घोटाले करता है। सुना है उसको बेल भी मिल गई। तो क्या हो रहा है वहाँ ? मनमोहन सिंह जी की सरकार के वक्त वो पर्यटन का केंद्र बन गया था जम्मू-कश्मीर, आज घोटालों का केंद्र बन गया है। तो ये अंतर स्पष्ट सबको दिखना चाहिए ।
एक अन्य प्रश्न पर कि आप क्या चाहते हैं? श्री खेड़ा ने कहा कि हम अब तो जांच की मांग ही नहीं करते, छोड़ दिया है। हम ये चाहते हैं कि आपके माध्यम से बस ये बाहर निकले बात। अब 7 महीने में क्या तो ये जांच करा लेंगे, लेकिन न्याय अनुसूचित जा आयोग से हमें उम्मीद अभी भी है कि एक दलित अधिकारी के साथ आप न्याय करेंगे। बाकी ईडी, सीबीआई आप भी जानते हैं, हम भी जानते हैं कि जन्नत की हकीकत क्या है। लेकिन फिर भी अब 7 महीने में सिर्फ खुलासे होने चाहिए, अब जनता खुद करेगी जो करना है। मुझे नहीं लगता कि अब हमें मांग करनी चाहिए जांच की।
एक अन्य प्रश्न पर कि आगे आप क्या करेंगे? श्री खेड़ा ने कहा कि अभी पहला चरण है। आपके माध्यम से इसको बाहर लाए हैं, क्योंकि ये बात दबाई जाती है, नहीं आने दी जाती है। कभी जी -20, कभी कोई और 20, कभी 24 सब चलता रहता है। तो 24 से पहले ये सब बातें अब सिर्फ आपके माध्यम से हम जनता के दरबार में ले जा रहे हैं।
एक अन्य प्रश्न पर कि प्रधानमंत्री जी-20 के समापन के बात जिस तरह से श्रेय ले रहे हैं, क्या कहेंगे? श्री खेड़ा ने कहा कि हिंदुस्तान हमेशा शक्तिशाली था, है और रहेगा । प्रधानमंत्री कोई भी हो, लेकिन इसी पर केंद्रित रखिए आप
एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्री खेड़ा ने कहा कि अब ये तो मुझे नहीं मालूम, हम तो उनके टच में नहीं है। सार्वजनिक पटल पर जो जानकारी है, वो हमने आपके सामने रखी है। हाँ, कुछ एनेक्सचर हैं, जो सार्वजनिक शायद नहीं रहे हों, वो आपको बहुत चौंकाने वाले एनेक्सचर हैं, काफी मोटी प्रेस रिलीज है। सबने देखा होगा कि कितने एनेक्सचर हैं। ये सारे जो खुलासे हैं, ये सरकारी कागजों से ही है, जो निकल कर आए हैं। कौन- कौन इंजीनियर, किसको हटाया गया, किसको लगाया गया ।
एक अन्य प्रश्न पर कि अशोक परमार ने और भी आरोप लगाए हैं अधिकारियों पर? श्री खेड़ा ने कहा कि तो किसकी इतनी हिम्मत होगी, किसी अधिकारी की इतनी हिम्मत कैसे हो सकती है कि वो गृहमंत्री को, प्रधानमंत्री को, केंद्र सरकार को भ्रामक जानकारी देता है। कहीं ना कहीं कोई प्रोटेक्शन होगी, तभी होगा ना। अगर अशोक परमार जी यह कह रहे हैं कि अधिकारियों ने ये किया है, तो जांच होनी चाहिए। क्यों किया उन अधिकारियों ने, कैसे हिम्मत हुई उन अधिकारियों की ।
एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्री खेड़ा ने कहा कि खुला खेल चल रहा है। अभी तो आध परत खुली है, आने वाले दिनों में क्या-क्या वहाँ, मैंने आपको कुछ वक्त पहले स्मार्ट मीटर स्कैम बताया था। उस वक्त तो खैर सरकार के वक्त हुआ था। अब उस स्कैम का क्या हो रहा है, नहीं मालूम। सत्यपाल मलिक जी ने जो सवाल उठाए हैं, उनका जवाब अभी तक आपको नहीं मिला, ना मिलेगा। कोई उम्मीद भी नहीं होनी चाहिए। ऐसे अनेक सवाल भ्रष्टाचार को लेकर भी, सुरक्षा को लेकर भी। डीएसपी देवेंद्र सिंह के बारे में तो कई बार हम आपके मार्फत सवाल पूछ चुके हैं, कोई जवाब नहीं आना आता ही नहीं है। जांच तक नहीं होने दी, लिखित में लिखा गया कि साहब, राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर इन पर जांच भी नहीं होगी, कोई कार्यवाही नहीं होगी। कहाँ हैं, हमें नहीं मालूम। तो ऐसे कई सवाल वहाँ से दबाए जा रहे हैं, छुपाए जा रहे हैं।
एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्री खेड़ा ने कहा कि मैं आपको आज जम्मू-कश्मीर में क्या हो रहा है, भ्रष्टाचार का एक खुलासा कर रहा हूं। राहुल जी ने जो नाम लिए हैं एजेंसी के, बिल्कुल हम लगातार बताते आए हैं आपको। उसमें अब आप एक अनुसूचित आयोग भी डाल दीजिए कि अशोक परमार एक दलित आईएएस की शिकायत पर आज तक अनुसूचित जाति आयोग ने एलजी, मनोज सिन्हा को तलब नहीं किया या बाकी अन्य अधिकारियों को जो कि अशोक परमार को प्रताड़ित कर रहे हैं, उनको तलब नहीं किया।
एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्री खेड़ा ने कहा कि आप मुझे फिर से धक्का मारकर जी- 20 पर ला रहे हैं, मैं आपको फिर से खींचकर लाऊंगा जम्मू-कश्मीर पर। तो ये रस्साकशी चलने दो, अच्छा लगता है, लेकिन इस रस्साकशी में जम्मू-कश्मीर का ये बड़ा महत्वपूर्ण भ्रष्टाचार का मुद्दा भी है, एक दलित अधिकारी की प्रताड़ना का मुद्दा भी है और ये सब केंद्र सरकार द्वारा अपोएंटेड़ एलजी की नाक के नीचे हो रहा है, उनके द्वारा हो रहा है। ये मुझे लगता है, उसको डायल्यूट मैं नहीं होने देना चाहता।
एक अन्य प्रश्न पर कि जी-20 पर क्या कहेंगे? श्री खेड़ा ने कहा कि लगातार हमारे वरिष्ठ सहयोगी जयराम रमेश जी लाइव ट्वीट कर रहे थे। पता नहीं आपने क्यों नहीं देखा, उस लाइव रिस्पांस ट्वीट को तो मैं आपको इस प्रेस वार्ता के बाद जयराम रमेश जी द्वारा जितने ट्वीट जी-20 पर किए गए, मैं आपको प्रेषित कर दूंगा। आप पढ़ लीजिएगा, उसका अध्ययन करने के लिए मैं आपको 48 घंटे भी दूंगा, फिर भी आपको अगर कोई कमी लगे, फिर एक प्रेस वार्ता और कर लेंगे।
एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्री खेड़ा ने कहा कि मैं फिर से आपका ध्यान आकर्षित करुंगा कि ये गंभीर मुद्दा है, इस पर से ध्यान ना हमारा बंटने दीजिए, ना अपना बंटने दीजिए। सरकार यही चाहती है कि ध्यान बंटे। सरकार यही चाहती है कि हैड लाइन में हो। मैं और आप कम से कम उस षड्यंत्र का हिस्सा ना बनें। ये आपकी कृपा होगी।
एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्री खेड़ा ने कहा कि ये सब बातों पर चर्चा होगी आपसे, लेकिन इस मुद्दे पर ध्यान रखना बहुत आवश्यक है, क्योंकि सरकार हमेशा बचकर भागती है, इन्हीं सवालों के पीछे छुपकर । मैं नहीं कह रहा कि आप सरकार की तरफ से सवाल पूछ रहे हैं, आपका हक है आपको सवाल पूछना भी चाहिए । लेकिन आज इस मुद्दे पर अडिग रहें तो इस मुद्दे के प्रति न्याय होगा ।