नई दिल्ली: देश में कोरोना वायरस के आंकड़े बहुत तेजी से फैल रहे हैं और प्रतिदिन सामने आने वाले आंकड़े भयावह हैं। पहली लहर के मुकाबले देश में दूसरी कोरोना लहर ज्यादा खतरनाक दिख रही है| कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के बीच देश के कई राज्यों ने कोरोना वैक्सीन के डोज की कमी को लेकर केंद्र सरकार को जानकारी दी थी| महाराष्ट्र, झारखंड ,ओडिशा आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों ने पहले ही वैक्सीन की कमी की बात कह दी है|
कोरोना वैक्सीन की कमी की खबरों के बीच कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जमकर निशाना साधा है| प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल पूछते हुए राहुल गांधी ने कहा कि अपने देशवासियों को ख़तरे में डालकर वैक्सीन एक्सपोर्ट क्या सही है?..राहुल गांधी ने कहा कि ,''बढ़ते कोरोना संकट में वैक्सीन की कमी एक अतिगंभीर समस्या है, ‘उत्सव’ नहीं| राहुल गांधी ने कहा कि केंद्र सरकार सभी राज्यों को बिना पक्षपात के मदद करे। हम सबको मिलकर इस महामारी को हराना होगा। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक चिट्ठी भी लिखी है, जिसमें उन्होंने कुल सात मांग की हैं|
राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री को कोरोना टीकाकरण के बारे में लिखे एक पत्र को लेकर पूछे एक प्रश्न के उत्तर में कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि,'' अगर आप श्री राहुल गांधी का पत्र पढ़ें, तो उन्होंने सबसे पहले अपने पत्र की पहली लाइन में ही ये कहा है कि भारत में वैक्सीन हमारी दो कंपनियों ने इजाद कर ली है, ये हमारा एडवांटेज है, पर अभी तक हमने देश की एक प्रतिशत आबादी को भी वैक्सीनेशन नहीं दिया है। ये गंभीर चिंता का विषय है, विपक्ष के एक नेता के तौर पर उन्होंने प्रधानमंत्री जी को आगाह किया है और अगर अभी तक हम एक प्रतिशत आबादी का टीकाकरण नहीं कर पाए, अगर अभी तीन महीने बीत जाने के बावजूद, तो ऐसे तो फिर कितने और साल लगेंगे, वैक्सीनेशन में?
रणदीप सिंह सुरजेवाला ने आगे कहा कि,''दूसरा जो बिंदू उन्होंने कहा, आप 6 करोड़ वैक्सीन के डोज एक्सपोर्ट कर चुके हैं, लगभग, ये कहा जा रहा है, जो पब्लिक डोमेन में है, पर स्टेट गवर्मेंट, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, पंजाब, गुजरात, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, ये बार-बार कह रहे हैं कि हमारे यहाँ एक दिन का वैक्सीन है, दो दिन का वैक्सीन है, ढाई दिन का वैक्सीन है, तो क्या किसी देश की सरकार का पहला कर्तव्य और राष्ट्रभक्ति ये नहीं कि वो अपने नागरिकों को टीकाकरण उपलब्ध करवाए?
अपनी वाहवाही विदेशों में जरुर करवाइए विदेशों से मैत्री रखिए कोई बुराई नहीं है, पर परिवार के सदस्यों की रोटी छीनकर पडोसी को रोटी कौन खिलाकर आता है, ये बताइए? अपने बच्चे भूखे रहें, अपना परिवार खतरे में पड़ जाए और जाकर आप अगले शहर में उनकी सुरक्षा करके आएं, इसका क्या औचित्य है, इसलिए उन्होंने बंद करने को नहीं कहा, उन्होंने कहा- 'हॉल्ट' पहला वैक्सीन पर अधिकार हिंदुस्तानियों का है, ये राहुल जी ने कहा है। टीकाकरण पर पहला अधिकार हिंदुस्तानियों का होना चाहिए और 70 साल से कांग्रेस की सरकारों ने मुफ्त टीकाकरण देश के हर नागरिक को उपलब्ध करवाया है, अलग-अलग बीमारियों का, पल्स पोलियो से लेकर और दूसरी बीमारियों तक। इसलिए उन्होंने 6 या 7 बातें रखीं। पहला कि वैक्सीन की मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ाया जाए।
दुसरा, वैक्सीन एक्सपोर्ट को फौरन रोका जाए, जब तक हमारे नागरिकों के लिए कोरोना का टीका उपलब्ध न हो। दूसरे जो वैक्सीन अगर कोई कंपनियाँ भी लाना चाहती हैं, फाइजर हैं, डाक्टर रेड्डी हैं, दूसरे हैं, अखबार में हम पढ़ रहे हैं, उनको भी अनुमति दी जाए और कोई भी व्यक्ति हर व्यक्ति को टीका लगे, जो टीका लगवाना चाहता है, कोरोना का।
इसमें प्रधानमंत्री जी कहते हैं, हम तो शर्तों में रखेंगे, प्रधानमंत्री जी, वैक्सीन, कोरोना के टीका पर शर्ते मत लगाइए, इस देश की सबसे बड़ी आबादी युवा हैं, इस देश की सबसे बड़ी युवा आबादी जो है, वो इस देश की तरक्की में प्रभावी तौर से काम करती है। तो हर वो व्यक्ति जिसको टीका चाहिए, या लगवाना चाहे, बजाए कि टीके खराब जाएं, कोरोना का टीका उसे लगाया जाए और जो सेन्ट्रल एलोकेशन है, वो 35 हजार करोड़ है, तो उसमें कितने टीके आ सकते हैं, तो उन्होंने कहा कि कम से कम इसको सौ प्रतिशत और बढ़ाया जाए और प्रान्तीय सरकारों को टीका लगाना है, भारतीय सरकार नहीं लगा सकती, तो प्रान्तीय सरकारों को कोरोना का टीका लगाने के प्रभावी अधिकार दिए जाएं और अब दूसरा क्योंकि कोरोना की वेव चल पड़ी है, तो जो सबसे गरीब हैं, वंचित हैं, शोषित है, पिछड़े हैं, मजदूर हैं और बहुत कम आय वाले लोग हैं, वो फिर प्रभावित हो रहे हैं। रेस्टोरेंट बंद हो रहे हैं, मॉल्स बंद हो रहे हैं, एंटरटेनमेंट प्लेसेस बंद हो रहे हैं, नाइट मूवमेंट्स बंद हो रही हैं, ट्रांस्पोर्टेशन बंद हो रही हैं, तो इनसे फिर करोड़ों लोग प्रभावित होंगे, उनको डायरेक्ट इंकम सपोर्ट दीजिए, ये है राहुल गांधी जी की मांग।
एक अन्य प्रश्न के उत्तर में कांग्रेस प्रवक्ता सुरजेवाला ने कहा कि,''देशवासी बताएं कोरोना का टीका क्या राजनीतिक द्वंद्ध का विषय हो सकता है, हम ये देश के विवेक पर छोड़ते हैं। जब देश का स्वास्थ्य मंत्री कोरोना टीकाकरण को लेकर भी पंजाब की कांग्रेस सरकार, छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार, महाराष्ट्र की कांग्रेस गठबंधन सरकार, उन पर छींटाकशी करेंगे, इल्जामात की राजनीति करेंगे, तो इस देश में यूनिवर्सल वैक्सीनेशन कैसे होगी? क्या ये फेडरल स्ट्रक्चर की अवहेलना नहीं? कोरोना का टीका लगाना अनिवार्य है, उत्सव नहीं। आप इसको उत्सव के तौर पर मनाना चाहें, मनाइए, पर कोरोना का टीका लगाइए जरुर, आप तो कोरोना का टीका दे ही नहीं रहे हैं।
रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि,'''आप कोरोना के टीकाकरण में भी कांग्रेस, बीजेपी, शिवसेना, दूसरी पार्टियों की राजनीति देख रहे हैं, ये फेडरल स्ट्रक्चर की वायलेशन भी है, और ये राजधर्म, जो है, उसकी घोर अवहेलना भी है। देश के स्वास्थ्य मंत्री द्वारा भी और प्रधानमंत्री जी द्वारा भी।
एक बात और बताएं, प्रधानमंत्री जी चाहते हैं कि देश में कोरोना का टीकाकरण हो या कुछ और, अपनी फोटो लगाना चाहते हैं। क्या इस देश में 70 वर्षों में पोलियो के टीके पर प्रधानमंत्री की फोटो लगी देखी आपने? पल्स पोलियो का टीकाकरण हुआ। इस देश में जो बच्चों को पैदा होते ही तीन टीके लगाए जाते हैं, उनमें से किसी प्रधानमंत्री ने आज तक अपनी फोटो लगवाकर अपने आप की मार्केटिंग की? क्या कर रहे हैं प्रधानमंत्री जी?
सुरजेवाला ने कहा कि,'कोरोना से लोग मर रहे हैं, कोरोना एक भयंकर बीमारी है, कोरोना की सेकेंड वेव देश में आ चुकी है और आप अपनी फोटो लगाकर मशहूरी कर रहे हैं और आपके स्वास्थ्य मंत्री रहे हैं, ये निंदनीय है, अशोभनीय है, मर्यादा का घोर उल्लंघन है, इसे कदापि देश स्वीकार नहीं करेगा। ईश्वर के लिए, प्रभू के लिए अब व्यक्तिगत पब्लिसिटी की होड़ छोड़कर देश को कैसे सुरक्षित किया जाए, ये सोचिए।