नई दिल्ली: केंद्र के तीन कृषि कानूनों (Farm Laws) के खिलाफ किसानों का आंदोलन (Farmers Protest) कड़ाके की सर्दी और बारिश के बीच भी जारी है|किसान इन कानूनों का 'काला कानून' करार देते हुए 39 दिनों से दिल्ली बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे हैं ताकि इन्हें रद्द करवाया जा सके|चार जनवरी (सोमवार) को किसान संगठनों और सरकार के बीच बैठक होनी है| इससे पहले, 30 दिसंबर को बातचीत हुई थी, जिसमें दो मुद्दों पर बात बनी है|
आज शाम किसान संगठनों ने कहा,''हम वापस नहीं जाएंगे| अब तक 60 किसान शहीद हो चुके हैं, सरकार को देना होगा जवाब|भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा,''कल का एजेंडा रहेगा स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट, तीन कृषि क़ानूनों की वापसी और MSP पर क़ानून बने। हम वापस नहीं जाएंगे। अब तक 60 किसान शहीद हो चुके हैं। सरकार को जवाब देना होगा|
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा,''सरकार किसानों को खूनी क्रांति के लिए उकसा रही है,लेकिन नही अभी लठ क्रांति होगी। किसानों की परीक्षा ले रहे है प्रधान सेवक मोदी| टिकैत ने कहा,''राजधर्म का पालन नही कर रहे देश के प्रधान सेवक,दिवंगत किसानों के लिए दो शब्द भी नही सत्ता का यह अहंकार भी किसान तोड़कर ही जायेगा।
भारतीय किसान यूनियन कादियां के प्रधान हरमीत सिंह ने कहा कि,'13 जनवरी को हम कृषि क़ानूनों की कॉपियां जलाकर लोहड़ी के त्योहार को मनाएंगे। 6-20 जनवरी के बीच देशभर में किसानों के पक्ष में धरना-प्रदर्शन, मार्च आदि आयोजित किए जाएंगे। 23 जनवरी को आज़ाद हिन्द किसान दिवस मनाया जाएगा|