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25 अगस्त 2026

“कुछ देशों ने 'आतंकवाद' को स्टेट पालिसी बनाया”: अमित शाह ने परोक्ष रूप से पाकिस्तान का किया जिक्र

नई दिल्ली: केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में 'नो मनी फॉर टेरर'(NMFT) के दो दिवसीय सम्मेलन के समापन सत्र में कहा कि,'' इस दो दिवसीय सम्मेलन के दौरान दुनियाभर के देशों से आए प्रतिनिधियों न…

“कुछ देशों ने 'आतंकवाद' को स्टेट पालिसी बनाया”: अमित शाह ने परोक्ष रूप से पाकिस्तान का किया जिक्र
“कुछ देशों ने 'आतंकवाद' को स्टेट पालिसी बनाया”: अमित शाह ने परोक्ष रूप से पाकिस्तान का किया जिक्र | फ़ोटो: TVL News

नई दिल्ली: केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में 'नो मनी फॉर टेरर'(NMFT) के दो दिवसीय सम्मेलन के समापन सत्र में कहा कि,'' इस दो दिवसीय सम्मेलन के दौरान दुनियाभर के देशों से आए प्रतिनिधियों ने टेरर फाइनेंसिंग में उभरते ट्रेंड्स, नई इमर्जिंग फाइनेंशियल टेक्नोलॉजीज का दुरूपयोग और टेरर फाइनेंसिंग के क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग पर विचार-विमर्श किया ताकि प्रभावी रूप से ‘नो मनी फॉर टेरर’ का हमारा उद्देश्य सफल हो सके।


अमित शाह ने कहा कि सहभागी देशों और संगठनों के लिए “कॉम्बैटिंग दी फाइनेंसिंग ऑफ़ टेररिज्म“ की वर्तमान अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था की प्रभावशीलता तथा उभरती चुनौतियों के समाधान पर विचार-विमर्श करने के लिए यह सम्मेलन एक अनूठा मंच है। शाह ने कहा कि टेररिज्म ने आज एक ऐसा विकराल रूप धारण किया है जिसका प्रभाव हर स्तर पर दिखता है। उन्होंने कहा कि “टेररिज्म लोकतंत्र, मानवाधिकार, आर्थिक प्रगति तथा विश्व शांति के खिलाफ सबसे बड़ा नासूर है, जिसे हमें जीतने नहीं देना है”। उन्होंने कहा कि कोई भी एक देश या संगठन, चाहे वह कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, टेररिज्म को अकेला नहीं हरा सकता और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को लगातार इस जटिल और बॉर्डर-लेस खतरे के खिलाफ कंधे से कंधा मिलाकर चलना होगा।



केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि पिछले कुछ दशकों में भारत ने टेररिज्म के सभी रूपों सहित कई चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना किया है। उन्होंने कहा कि टेररिज्म के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति, काउंटर-टेरर कानूनों के मजबूत फ्रेमवर्क तथा एजेंसियों के सशक्तिकरण के कारण भारत में टेररिज्म से होने वाली घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आई है तथा टेररिज्म के मामलों में सख्त सजा दिलाने में सफलता हासिल की गई है। 



 शाह ने बताया कि भारत सरकार ने यह भी तय किया है कि टेररिज्म, नारकोटिक्स और आर्थिक अपराध जैसे अपराधों पर राष्‍ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय डेटाबेस विकसित किया जाए। उन्होंने कहा कि साइबर अपराध का व्यापक तरीके से मुकाबला करने के लिए भारत सरकार ने भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र की स्थापना की है। शाह ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि भारत “काउंटर-टेररिज्म (CT) तथा कॉम्बेटिंग दी फाइनेंसिंग ऑफ़ टेररिज्म (CFT) के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग का केंद्र बिंदु होगा।



मित शाह ने कहा कि हम टेररिज्म के सभी रूपों के खिलाफ एक प्रभावी, दीर्घकालिक और ठोस लड़ाई के बिना भय-मुक्त समाज और भय-मुक्त दुनिया के बारे में नहीं सोच सकते हैं। उन्होंने कहा कि हमारे राष्ट्रों के नागरिकों ने नेतृत्व के ऊपर सबसे बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है – उनकी सुरक्षा की, और यह हमारा कर्त्तव्य है कि इस जिम्मेदारी की कसौटी पर हम खरे उतरें। शाह ने कहा कि पिछले दो दशकों में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने इस खतरे से निपटने के लिए एक ढाँचा विकसित किया है जिसका मुख्य उद्देश्य “काउंटर-टेररिज्म सैंक्शन व्यवस्था” खड़ी करना है और टेररिज्म को स्टेट-फंडेड इंटरप्राइज बनाने वाले देशों की कार्रवाईयों पर कुछ हद तक अंकुश लगाने का काम यूनाइटेड नेशन्स द्वारा स्थापित इस व्यवस्था ने सफलता से किया है, लेकिन इसे और कठोर, पारदर्शी और सटीक बनाना है। 



केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि हमारी सबसे पहली प्रतिबद्धता ट्रांसपेरेंसी के साथ कोऑपरेशन की होनी चाहिए और सभी देशों और संगठनों को बेहतर और प्रभावी तरीके से इंटेलिजेंस साझा करने में पूरी तरह से ट्रांसपेरेंसी का संकल्प लेना होगा। उन्होंने कहा कि हमें टेररिज्म और टेररिस्ट गुटों के खिलाफ इस लड़ाई को प्रत्येक भौगौलिक और वर्चुअल क्षेत्र में लड़ना होगा। शाह ने कहा कि ऐसे कई मामले सामने हैं, जहाँ अन्य मकसदों की आड़ में कुछ संगठन, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद और रेडिकलाइजेशन को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह भी देखा गया है कि यह संगठन, आतंकवाद को फाइनेंस करने के चैनल भी बनते हैं। शाह ने बताया कि अभी हाल ही में भारत सरकार ने सामाजिक गतिविधियों की आड़ में युवाओं को रेडिकलाइज करके उन्हें आतंक की ओर धकेलने की साजिश करने वाली एक संस्था को बैन करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक देश को ऐसी संस्थाओं को चिन्हित करके उनके विरुद्ध कार्रवाई करनी चाहिए।



अमित शाह ने कहा कि कुछ देशों, उनकी सरकारों और एजेंसियों ने ‘टेररिज्म’ को स्टेट पालिसी बनाया है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि टेरर हेवन्स पर आर्थिक प्रतिबंध के साथ-साथ सभी प्रकार की नकेल कसना आवश्यक है और इस पर दुनिया के सभी देशों को अपने जियो-पोलिटिकल इंटरेस्ट से ऊपर उठकर एक मन बनाना होगा। उन्होंने कहा कि कुछ देश राजनीति के लिए आतंकवादियों और आतंकवाद को पनाह देने वालो का बार बार समर्थन करते हैं, लेकिन आतंकवाद की कोई अंतर्राष्ट्रीय सीमा नहीं होती और इसीलिए सभी देशों को राजनीति को भुलाकर एक दूसरे का सहयोग करना चाहिए। शाह ने कहा कि सभी देशों को ‘टेररिज्म’ और ‘टेरर फाइनेंसिंग’ की व्याख्या पर सहमति भी बनानी होगी क्योंकि यह हमारे नागरिकों की सुरक्षा, मानवाधिकार और लोकतांत्रिक अधिकारों के रक्षा का मुद्दा है, न कि एक राजनैतिक मुद्दा।



केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि टेररिस्ट ग्रुप्स, इन्फार्मेशन टेक्नोलॉजी और साइबर स्पेस को अच्छी तरह से समझते हैं, जनता की संवेदनशीलता भी समझते हैं और इसीलिए उसका उपयोग भी करते हैं। उन्होंने कहा कि आज साइबर स्पेस, टेररिज्म के खिलाफ लड़ाई का एक प्रमुख युद्ध का मैदान है। शाह ने कहा कि वेपन्स टेक्नोलॉजी में भी बहुत परिवर्तन हुआ है और 21वीं सदी की लीथल टेक्नोलॉजीज तथा ड्रोन टेक्नोलॉजी अब आतंकवादियों के पास भी उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि टेररिस्ट तथा टेररिस्ट ग्रुप्स के नारकोटिक्स जैसे संगठित अपराधों के साथ बढ़ते लिंक्स, क्रिप्टो करेंसी तथा हवाला, टेरर फाइनेंसिंग की संभावनाओं को कई गुना बढ़ा देते है।    



 अमित शाह ने कहा कि इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य यही है कि टेररिज्म और टेरर फाइनेंसिंग के सभी चैनलों की पहचान कर, टेरर फाइनेंसिंग के खिलाफ एक प्रैक्टिकल तथा वर्केबल रोडमैप बनाया जाये। उन्होंने कहा कि IMF और वर्ल्ड बैंक के एक अनुमान के अनुसार दुनियाभर के क्रिमिनल्स हर वर्ष लगभग 2 से 4 ट्रिलियन डॉलर की लॉन्ड्रिंग करते हैं और इसमें से एक बड़ा हिस्सा टेररिज्म बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने कहा कि इस क्वांटम और चुनौतियों को देखते हुए सभी देशों के काउंटर-टेरर और टेरर फाइनेंसिंग के क्षेत्रों में काम करने वाली एजेंसियों एवं उनके अधिकारियों को एक दीर्घकालिक रणनीति अपनानी होगी।



 शाह ने टेरर फाइनेंसिंग के सन्दर्भ में सम्मेवन में आए प्रतिभागियों का ध्यान कुछ विषयों की तरफ आकर्षित किया जो सभी की प्रायोरिटी होनी चाहिए:  वित्तीय नेटवर्क में गुमनामी (अनॉनिमस) से लड़कर, लीगल वित्तीय साधनों से डायवर्जन को रोकना;  अन्य अपराधों द्वारा उत्पन्न राशि का टेररिस्ट गतिविधियों के लिए उपयोग को रोकना,; नई फाइनेंशियल टेक्नोलॉजीज, वर्चुअल एसेट्स जैसे क्रिप्टो-करेंसी, वॉलेट इत्यादि का टेरर एक्टिविटीज के लिए उपयोग को रोकना,' इल-लीगल चैनल्स, कैश कुरियर्स, हवाला का टेरर नेटवर्क द्वारा उपयोग पर नकेल कसना,' नॉन-प्रॉफिट आर्गेनाईजेशन (NPOs) सेक्टर का टेरर आइडियोलॉजी फैलाने में दुरूपयोग को रोकना, ' सभी देशों की काउंटर-टेरर तथा फाइनेंशियल इंटेलिजेंस एजेंसियों का सतत कैपेसिटी बिल्डिंग करना।



शाह ने कहा कि टेरर फाइनेंसिंग के सभी चरणों, जैसे आतंकवादियों द्वारा फण्ड जेनरेट करना, फण्ड का मूवमेंट करना, अन्य अपराधों के माध्यम से लेयरिंग करना तथा अंतत: टेररिस्ट गतिवधियों के लिए उपयोग करना, इस प्रत्येक स्टेज पर नकेल कसनी होगी और इसके लिए वैश्विक स्तर पर एक “स्पेसिफिक लेकिन कलेक्टिव एप्रोच” की आवश्यकता है।






tvlnews

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यह रिपोर्ट 19 नवंबर 2022 को TVL News पर प्रकाशित हुई और 9 मई 2025 को अपडेट की गई। नई जानकारी मिलने पर खबर को अपडेट किया जाता है।

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