नई दिल्ली: उत्तराखंड के जोशीमठ में स्थिति गंभीर बनी हुई है। राज्य सरकार ने जोशीमठ को तीन जोन (डेंजर, बफर और सेफ जोन) में बांट दिया है। हालात की गंभीरता को देखते हुए सभी खतरनाक इमारतों पर लाल रंग से 'X' का चिन्ह अंकित किया जा रहा है| जोशीमठ के बिगड़ते हालातों के लिए कांग्रेस ने बीजेपी के अनियंत्रित विकास को जिम्मेदार बताया| कांग्रेस ने कहा,''भाजपा का अनियंत्रित "विकास" देवस्थली को धँसाने के लिए ज़िम्मेदार है। पार्टी ने कहा,''अति गंभीर विषय है, और मोदी सरकार ने केवल एक कमेटी बनाकर अपना पल्ला झाड़ नहीं सकती । कांग्रेस पार्टी ने हमेशा प्रकृति की सुरक्षा और विकास के कार्यों में संतुलन के लिए क़दम उठायें हैं ।
AICC संचार विभाग के मीडिया एवं प्रचार के चेयमैन पवन खेड़ा ने कहा, ''हमारा देवस्थल जोशीमठ मानव निर्मित कारणों से धंस रहा है। समाचार 3 जनवरी से आ रहें हैं। पर "डबल इंजन" भाजपा सरकार, खासकर केंद्र की मोदी सरकार बहुत बाद में जागीं हैं - वो भी केवल खाना - पूर्ती के लिए ।
पवन खेड़ा ने कहा,'जोशीमठ में 610 घरों में दरारें आईं हैं, जिसमें से कुछ ही विस्थापितों को अलग शेल्टर दिया गया है और केवल 5000 मुआवजा दिया गया है। उन्होंने कहा कि,''स्थानीय लोग NTPC का तपोवन विष्णुगढ़ हाइड्रोपावर प्लांट के अंतर्गत बन रहा एक टनल को इसके लिए ज़िम्मेदार मान रहें हैं। पर NTPC ने इसको ख़ारिज किया है और IIT रुड़की, GSI, आदि संस्थानों ने इसपर कोई प्रतिक्रिया अभी तक व्यक्त नहीं की है। जोशीमठ के धंसने के विशेषज्ञों और पर्यावरणविद द्वारा कई कारण बताये जा रहें हैं।
● कांग्रेस-UPA सरकार ने वर्ष 2010 में 600 मेगावाट की लोहारीनाग पाला, 480 मेगावाट की पाला-मनेरी तथा 391 मेगावाट की भैरोंघाटी जल विद्युत परियोजना को बंद करने का निर्णय लिया था। तब तक लोहारीनाग-पाला और पाला-मनेरी परियोजना का काफी निर्माण कार्य हो चुका था। पिछले कुछ सालों से और खासकर 2018 से समाचार पत्रों में लगातार ये आ रहा है भी लोहारीनाग पाला परियोजना की खुदी और अधूरी पड़ी कई किमी सुरंगें खतरा बनी हुई हैं। पर केंद्र की मोदी सरकार ने इसपर ध्यान नहीं दिया और सुरंगों को बंद करने का कोई निर्णय नहीं लिया।
इस परिपेक्ष्य में हम एक बहुत महत्वपूर्ण बात बताना चाहते हैं कि जब IIT के पूर्व प्रोफ़ेसर जी डी अग्रवाल जी जिनको हम संत स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद जी के बाम से भी जानते हैं उन्होंने 2010 में जब इन तीनों परियोजनाओं पर उपवास रखा तब हमारी कांग्रेस- यूपीए सरकार ने उनकी बात को माना और तीनों परियोजनाओं पर रोक लगा दी, पर जब मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान 2018 में प्रोफ़ेसर जी डी अग्रवाल जी ने गंगा को बचाने और बड़े प्रोजेक्ट्स पर रोक लगवाने पर हरिद्वार में 111 दिन तक आमरण अनशन किया तो मोदी सरकार ने उनकी बात नहीं मानी और उनको जबरन हिरासत में ले लिया, जिसके बाद उनकी जान चली है। ये है कांग्रेस और भाजपा में अंतर !
● बिना गहन विश्लेषण और पर्यावरणीय आकलन करे हुए बड़े हाईडल पॉवर प्रोजेक्टों का निर्माण ।
● पिछले भूस्खलन में बसे नगर में में मिट्टी धारण करने की क्षमता कम (Soil Bearing Capacity) है । अनियोजित दोस्त और पानी के रिसाव के कारण कोई जल निकासी प्रणाली नहीं होने से असर क्षमता में और कमी आई है।
● मोदी सरकार के चारधाम रेलवे प्रोजेक्ट, जिसकी आधारशिला तत्कालीन रेलवे मंत्री श्री सुरेश प्रभु ने मई 2017 तक रखी थी, और जो बदरीनाथ-केदारनाथ रेललाइन जिसमें जोशीमठ भी आएगा उसका निर्माण कार्य शुरू हो हाड़ों की लान लगभग खड़ी कर दी गई है और वहन क्षमता के साथ-साथ पर्यावरण के प्रति संवेदनशील क्षेत्र की अवहेलना की जा रही है। नाजुक भूकंपीय क्षेत्र में विवर्तनिक गति होती है जिस पर विचार किया जाना चाहिए।
● जनसंख्या और पर्यटन दबाव के कारण वनों की कटाई और अस्थिर भूमि क्षेत्रों का कब्जा। बड़े पैमाने पर निर्माण और लगातार व्यावसायीकरण ।
मोदी सरकार से कांग्रेस पार्टी 3 मांगे करती है
पहली- इस त्रासदी को राष्ट्रीय आपदा घोषित करें। जोशीमठ शहर के विस्थापितों की मुआवजा राशि प्रधानमंत्री राहत कोष से दी जाये और प्रत्येक परिवार को राज्य सरकार 5000 रुपए दे पर मोदी सरकार भी उचित मुआवजा दें।
दूसरा- इस मानव रचित अप्पदा के लिए ज़िम्मेदार सुरंग को बंद किया जाए और जो बंद किये गए लोहारीनाग पाला और पाला मनेरी परियोजना की सुरंगे है उनको भरने का कार्य उचित अध्यन के बाद तत्कालीन प्रभाव से शुरू किया जाए ।
तीसरा- रेलवे का कोई भी कार्य जिसमें पर्वतीय आपदा का ख़तरा हो उसे बंद किया जाए। उसका गहरा अध्ययन कर ही कार्यों को चरणबद्ध तरह से मंज़ूरी दी जाएँ ।
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा,''बिना सोचे समझे बिना प्रकृति की सुरक्षा किये जो मोदी सरकार ने अनियंत्रित "विकास" किया है, उसका खामियाजा जोशीमठ की जनता भुगत रही है।