जोशीमठ: उत्तराखंड के जोशीमठ से आ रही तस्वीरें अत्यंत भयावह हैं। घरों में चौड़ी दरारें, पानी का रिसाव, ज़मीन का फटना और सड़कों का धंसना बेहद चिंताजनक है। जोशीमठ में जमीन धंसने की घटना को मद्देनजर हालात गंभीर हैं| हालात की गंभीरता को देखते हुए सभी इमारतों पर लाल रंग से 'X' का चिन्ह अंकित किया जा रहा है| जिला प्रशासन की ओर से इन इमारतों को रहने के लिहाज से असुरक्षित घोषित किए जाने के बाद इसके निवासियों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया जा रहा है
फिलहाल, जोशीमठ में स्थिति गंभीर बनी हुई है। सोमवार शाम को इमारतों को हुए नुकसान का जायजा लेने के लिए केंद्र की एक टीम यहां पहुंची। केंद्रीय टीम आज ही अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौपेंगी।
जोशीमठ के नाराज निवासियों ने बीती रात एसडीएम जोशीमठ कुमकुम जोशी से तीखी बहस की| SDM कुमकुम जोशी के पुराने बयान को लेकर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। नाराज निवासियों ने राहत शिविरों का निरीक्षण करने जा रहे डीएम के वाहन को रोक दिया. लोगों ने एसडीएम पर दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाया।
जोशीमठ में प्रभावित लोगों के लिए बनाए गए राहत शिविरों में मूलभूत सुविधाओं का प्रशासन द्वारा निरीक्षण किया जा रहा है और लोगों को हर संभव मदद दी जा रही है| डीएम हिमांशु खुराना ने कहा, "जरूरत पड़ने पर प्रशासन द्वारा तत्काल निरीक्षण किया जाएगा।"
जोशीमठ पहुंची CBRI की टीम
सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट की एक टीम मुआवजे के लिए इमारतों को हुए नुकसान का जायजा लेने जोशीमठ पहुंची. यह टीम आज अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगी।
खतरनाक इमारतों पर रेड क्रॉस का निशान
जोशीमठ में भू-धंसाव के कारण संभावित खतरे का सामना कर रहे भवनों पर सोमवार से जिला प्रशासन ने रेड क्रॉस का निशान लगाना शुरू कर दिया है| डीएम हिमांशु खुराना ने बताया कि,''सिंहधर, गांधीनगर, मनोहरबाग, सुनील वार्ड, असुरक्षित घोषित इन वार्डों में प्रवेश प्रतिबंधित है, इसलिए मार्किंग की जा रही|
जोशीमठ शहर को 3 जोन में बांटा गया
जोशीमठ भूमि धंसाव पर मुख्यमंत्री की सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम ने कहा कि,''जिस क्षेत्र को तुरंत खाली करने की जरूरत है उसे 'डेंजर जोन' के रूप में नामित किया गया है। जो क्षेत्र जल्द ही असुरक्षित हो सकता है वह है 'बफर जोन' और तीसरा वह है जो पूरी तरह से सुरक्षित (सेफ जोन) है| हम क्षेत्रों के विवरण का सर्वेक्षण कर रहे हैं; डेंजर और बफर जोन। उसके बाद हम तय करेंगे कि किसे कहां शिफ्ट किया जाएगा। हमने इन निवासियों के पुनर्वास के लिए उपयुक्त कुछ क्षेत्रों का निरीक्षण किया है|
डेंजर, जोन में ऐसे मकान होंगे जो ज्यादा जर्जर हैं और रहने लायक नहीं हैं। ऐसे मकानों को मैन्युअली गिराया जाएगा।जबकि सेफ जोन में वैसे घर होंगे जिनमे हल्की दरारें हैं और जिसके टूटने की आशंका बेहद कम है। वहीं, बफर जोन में वो मकान होंगे, जिनमें हल्की दरारें हैं, लेकिन दरारों के बढ़ने का खतरा है। बता दें कि एक्सपर्ट्स की एक टीम दरार वाले मकानों को गिराने की सिफारिश कर चुकी है।
...आपदा के कारणों को स्पष्ट करने के लिए कोई सबूत नहीं
आपदा प्रबंधन सचिव रंजीत सिन्हा ने कहा कि,''आज गृह मंत्रालय के सीमा प्रबंधन सचिव ने अपनी टीम और एनडीएमए के सभी रेजीमेंट सचिव और 3 सदस्यों के साथ हमारे और मुख्यमंत्री के साथ बातचीत की| उन्होंने कहा, जोशीमठ में आई इस आपदा के कारणों को स्पष्ट करने के लिए कोई सबूत उपलब्ध नहीं है, हम सभी जानते हैं कि भूमि भार सहन नहीं कर सकती है। हमारा राहत कार्य अभी भी जारी है और तब तक उस स्थान पर कोई निर्माण कार्य नहीं होगा|
हम राहत पैकेज तैयार कर रहे: आपदा प्रबंधन
सिन्हा ने कहा कि,''हम केंद्र सरकार से सहायता प्राप्त कर रहे हैं और हम राहत पैकेज तैयार कर रहे हैं और एक बार यह हो जाने के बाद हम आपको सूचित करेंगे। हम बनाए गए 3 जोन के अनुसार निवासियों को स्थानांतरित करेंगे। हम प्रगति का मूल्यांकन करने और समस्याओं पर चर्चा करने के लिए हर दिन बैठक भी करेंगे|
जोशीमठ नगर पालिका क्षेत्र को आपदा प्रभावित क्षेत्र घोषित
चमोली ज़िलाधिकारी ने कहा कि,''आपदा प्रबंधन विभाग ने अधिसूचना जारी की है जिसमें जोशीमठ नगर पालिका क्षेत्र को आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत आपदा प्रभावित क्षेत्र घोषित किया है। भारत सरकार की तरफ से जल शक्ति मंत्रालय की हाई लेवल टीम और गृह मंत्रालय से सीमा प्रबंधन के सचिव की टीम जोशीमठ आ रही है|
जोशीमठ में सभी निर्माण कार्य पर रोक
चमोली के DM हिमांशु ने कहा कि,''जोशीमठ नगर पालिका और आसपास के क्षेत्र में सभी निर्माण कार्य पर अग्रीम आदेश तक रोक लगाई है। जो भी लोग अस्थाई रूप से विस्थापित हुए हैं उनको राहत सामग्री दी जा रही है। हमारे अधिकारी लोगों से लगातार मिल रहे हैं और उनकी परेशानियों का दूर करने में लगे हैं|
जोशीमठ को दूसरी जगह बसाया/नया जोशीमठ बनाया जाना चाहिए: पूर्व CM
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि,''किसी भी समय सारा ढांचा ढह सकता है। जोशीमठ को दूसरी जगह बसाया और नया जोशीमठ बनाया जाना चाहिए। जोशीमठ के कारणों को पता लगाया जाए और इसे राष्ट्रीय आपदा के रूप में लेकर इसको बनाया जाना चाहिए। प्रभावित परिवारों को बद्रीनाथ के तर्ज़ पर मुआवजा दिया जाए|
रावत ने कहा कि,''ये पूरा क्षेत्र कई सांस्कृतिक विविधताओं को समेटे हुए है। जो लोग यहां रह रहे हैं उनका जीवन खतरे में है, उनकी आजीविका खतरे में है। हम इस मुश्किल समय में लोगों के साथ हैं, सरकार के साथ हैं। इस समय जोशीमठ बचाओ राष्ट्रीय मिशन होना चाहिए|
....ये समय मिलकर काम करने का है : धामी
जोशीमठ भू-धंसाव पर उत्तराखंड मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि मैंने सभी से अनुरोध किया है कि ये समय मिलकर काम करने का है,लोग इस काम पर लगे हुए भी हैं। खतरे में आने वाले 68 मकान में रहने वालों को सुरक्षित जगह शिफ्ट किया गया है और 600 से अधिक मकानों का जो एक जोन बना है वहां से भी लोगों को शिफ्ट किया जा रहा है| धामी ने कहा कि,''पीएम मोदी भी इसकी लगातार समीक्षा कर रहे हैं और हमें हर प्रकार से सहायता देने का आश्वासन दिया है|
प्रभावित लोगों को धैर्य और मनोबल समर्थन की जरूरत: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती
ज्योतिषपीठ के स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि प्रभावित लोगों को धैर्य और मनोबल समर्थन की जरूरत है। हमने अलग-अलग विशेषज्ञता वाले लोगों को आमंत्रित किया है - ज्योतिषियों से लेकर धर्मशास्त्रियों तक। उन्होंने हमें ज्योतिर्मठ की रक्षा के लिए होने वाले अनुष्ठानों के बारे में बताया है। हम आज अनुष्ठान शुरू करेंगे।
स्थानीय लोगों के साथ खड़े है
उन्होंने कहा कि 22-31 जनवरी से, हम नरसिंह मंदिर में एक विशेष यज्ञ आयोजित करने का इरादा रखते हैं। हम वह भी करेंगे। स्थिति के कारणों की जांच के लिए विशेषज्ञों को भी बुलाया जाएगा। हम स्थानीय लोगों के साथ खड़े रहेंगे|
सुप्रीम कोर्ट में PIL दाखिल
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सुप्रीम कोर्ट में PIL दाखिल की है। सरस्वती ने कहा कि.''हमने SC से भी संपर्क किया है और हमारी कानूनी टीम वहां है। मामले को CJI के सामने पेश किया जाएगा और तत्काल सुनवाई के लिए अनुरोध क???या जाएगा, हमने सुप्रीम कोर्ट से इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग की है ताकि स्थानीय लोगों की मदद की जा सके।