नई दिल्ली: लोकसभा में आज बुधवार को 'महिला आरक्षण बिल' पास हो गया | लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33% सीटें देने वाला 'महिला आरक्षण विधेयक' लोकसभा में पारित हुआ। 454 सांसदों ने बिल के पक्ष में और 2 सांसदों ने इसके खिलाफ वोट किया। लोकसभा सांसद 'विपक्षी सांसद' की मांग पर विधेयक के खंडों पर मतदान कर रहे हैं। महिला आरक्षण विधेयक को केंद्रीय कैबिनेट ने सोमवार को ही मंजूरी दे दी थी| इस बिल को 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' नाम दिया गया है|
महिला आरक्षण बिल पर लोकसभा में चर्चा करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि,सोशल मीडिया पर कुछ लोग कह रहे हैं कि इस बिल का समर्थन नहीं करना चाहिए क्योंकि इसमें OBC का आरक्षण नहीं है। अगर आप इस बिल का समर्थन नहीं करेंगे तो क्या आरक्षण जल्दी होगा? अगर आप इस बिल का समर्थन करते हैं तो कम से कम गारंटी तो देंगे..| शाह ने कहा कि,''कुछ पार्टियों के लिए महिला सशक्तिकरण एक राजनीतिक एजेंडा हो सकता है, कुछ पार्टियों के लिए महिला सशक्तिकरण का नारा चुनाव जीतने का एक हथियार हो सकता है लेकिन भाजपा के लिए महिला सशक्तिकरण राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि मानयता का सवाल है
महिला आरक्षण बिल पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, "OBC आरक्षण, परिसीमन का मुद्दा या जनगणना को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, मैं सबका जवाब देता हूं...सबसे पहला जवाब विद्यमान संविधान में तीन तरह के सांसद आते हैं, जो सामान्य, SC और ST कैटेगरी से आते हैं। ये तीनों कैटेगरी में हमने महिलाओं का 33% आरक्षण कर दिया है... अब एक तिहाई सीटों को आरक्षित करना है तो वह सीट कौन तय करेगा? हम करें? अगर वायनाड आरक्षित हो गया तो आप कहेंगे हमने राजनीति की है।"
शाह ने कहा, "महिला आरक्षण बिल लाने का यह 5वां प्रयास है। देवेगौड़ा जी से लेकर मनमोहन सिंह जी तक चार बार इस बिल को लाने की कोशिश की गई...क्या कारण था कि ये बिल पास नहीं हो सका?
संसद के निचले सदन में केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कल यानी मंगलवार को महिला आरक्षण बिल लोकसभा में पेश किया था। लोकसभा में ''महिला आरक्षण बिल'' पेश करते हुए केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा था कि,''यह बिल महिला सशक्तिकरण के संबंध में है। इसके माध्यम से संविधान के अनुच्छेद 239AA में संशोधन करके राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCT) दिल्ली में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित की जाएंगी। अनुच्छेद 330A लोक सभा में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के लिए सीटों का आरक्षण है|
महिला आरक्षण विधेयक साल 1996 में पहली बार संसद में पेश किया गया था| 2008 में भी महिला आरक्षण विधेयक पेश किया गया.... इस बार भी बिल पारित नहीं हो पाया| फिर 2010 में राज्यसभा ने 108वें संशोधन विधेयक के तौर पर इसे पास कर दिया| हालांकि, उस समय BJP सांसदों के विरोध के चलते ये बिल लोकसभा में पारित नहीं हो पाया था|
देश की आधी आबादी अपने हक के लिए बहुत वक्त से इंतजार कर रही है: सुप्रिया श्रीनेत
महिला आरक्षण बिल पर कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने आज बुधवार को कहा कि,'देश की आधी आबादी अपने हक के लिए बहुत वक्त से इंतजार कर रही है, महिला आरक्षण के लिए इस देश की महिलाओं को और इंतजार कराना घोर नाइंसाफी है... सरकार की इसपर क्या मंशा है मुझे नहीं पता लेकिन परिसीमन और जनगणना से महिला आरक्षण का क्या लेना-देना है |