● कानपुर में चल रहे फर्जी अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर का खुलासा
● नौ लाख डालर के ट्रांजेक्शन के मिले बैंक स्टेटमेंट से प्रमाण
● खुद वायरस भेजकर हेल्प करने के नाम पर कर लेते थे डाटा हैक
● काकादेव थाना क्षेत्र में करीब एक साल से चल रहा था कालसेंटर
● अंतराष्ट्रीय काल सेंटर से अब तक US के 12 हजार लोगों को ठग चुके हैं
● मैनेजर समेत चार लोगों को क्राइम ब्रांच व काकादेव पुलिस ने पकड़ा
● नोएडा के मास्टर मांइड ने पुणे के इंजीनियरिंग कालेज से की है पढ़ाई
● साइबर ठगों ने अंतराष्ट्रीय कालसेंटर की आड़ में किया ठगी का बड़ा खेल
कानपुर: क्राइम ब्रांच की टीम ने काकादेव में चल रहे फर्जी अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर का किया खुलासा| अंतराष्ट्रीय काल सेंटर की आड़ में चल रहे ठगी के बड़े नेटवर्क का पुलिस कमिश्नरेट की क्राइम ब्रांच ने खुलासा किया है। काल सेंटर के नाम पर अमेरिकी लोगों के सिस्टम और डेटा का हैक करके ठगों के इस गिरोह करीब नौ लाख डालर की ठगी कर डाली है। पुलिस ने काल सेंटर के मैनेजर व मास्टर माइंड समेत चार लोगों को गिरफ्तार कि??ा है।
थाना काकादेव क्षेत्र में चल रहे इस काल सेंटर को नोयडा निवासी मुनेंद्र चला रहा था। मुनेंद्र ने पुणे विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। पिछले साल लाकडाउन में मुनेंद्र दिल्ली की एक कंपनी के संपर्क में आया और इसके बाद काकादेव में काल सेंटर की स्थापना कर डाली। अंतराष्ट्रीय कालसेंटर से लोगों की मदद की जगह ठगी का धंधा तेजी से चल रहा था।
इस प्रकार करते थे ठगी
अंतराष्ट्रीय काल सेंटर के द्वारा वह लोगों को बिल्कुल अनोखे अंदाज में फंसाते थे। किसी भी साइट पर आने वाले विज्ञापन जैसे 10 दिन में मोटापा घटाएं, पेट कम करें, घुटनों को मजबूत करें, लंबाई बढ़ाए, झड़ने वाले बालों को रोके आदि को जैसे ही अमेरिका में बैठा कोई व्यक्ति क्लिक करता था। वैसे ही मालवेयर जो कि एक प्रकार का वायरस होता था उसके सिस्टम में आ जाता था।
बार-बार आता था पापअप मैसेज
एक बार मालवेयर सिस्टम में जाने के बाद बार-बार पाप अप मैसेज स्क्रीन पर आता था। इसके साथ ही एक हेल्पलाइन नंबर जो कि इस कालसेंटर का होता था वह भी ब्लिंक करता था। लोग टेक सपोर्ट के लिए जब इस पर फोन करते थे वह कुछ ऐप डाउनलोड करने के लिए कहते थे। जैसे ही लोग कालर की बातों में आकर ऐप डाउनलोड करते थे वैसे ही उनका सारा डेटा यह हैक कर लेते थे।
सर्विस के नाम पर बेचते थे प्लान
मालवेयर हटाने और सर्विस देने के नाम पर काल सेंटर द्वारा प्लान बेंचा जाता था। यह प्लान छह माह और सालभर का होता था। जब कभी सर्विस सही नहीं मिलती थी तो पैसा वापस करने के नाम पर लोगों को ठगने का खेल शुरू होता था। कालसेंटर पर आने वाली विदेशी काल को भी साफ्टवेयर से अलग अलग समय पर अलग अलग लोगों को ट्रांसफर कर दिया जाता था।
ले लेते थे रिमोट एक्सेस
डाटा हैक करने के बाद वह उनके एकाउंट आदि की डिटेल के एचटीएमएल में जाकर कोडिंग चेंज कर देते थे। इसके बाद सर्विस देने के नाम पर फीस लेते थे। खेल इसके बाद शुरू होता था। लोगों के एकाउंट में जमा रकम को कई गुना बढ़ाकर दिखाते और फिर पैसे वापस करने के नाम पर बड़ा अमाउंट उनके एकांउट में डाल देते, जो कि बस कोडिंग चेंज होने के कारण दिखता था। असलियत में एक रुपया भी नहीं जाता था।
वापस मांगते थे ज्यादा पैसा
जैसे किसी को एक हजार डालर वापस करने होते थे वह उसको दस हजार का मैसेज भेजते थे। जब सर्विस लेने वाला व्यक्ति देखता तो उसे वाकई में दस हजार डालर शो करता था। इसके बाद वह मानवता के नाते काल सेंटर को नौ हजार डालर वापस कर देता था। इस प्रकार अब तक काल सेंटर द्वारा अमेरिका के 12 हजार लोगों को ठगा जा चुका है, जिससे नौ लाख डालर के ट्रांजसेक्शन की बैंक स्टेटमेंट से डिटेल मिल चुकी है।
अनुमानित फ्राड का विवरण- 12 लाख डालर करीब 8-9 करोड़
अनुमानित पीड़ितों की संख्या- 250-300 प्रतिमाह
यह अभियुक्त हुए गिरफ्तार
1-मोहिन्द्रा शर्मा निवासी नोएडा सेक्टर 25 वर्तमान में फजलगंज कानपुर
2-संजीव कुमार गुप्ताम निवासी फिरोजाबाद
3-जिकुरल्ला निवासी प्रतापगढ
4-सूरज सुमन मूल निवासी बिहार वर्तमान में शारदा नगर काकादेव
यह हुई बरामदगी -27 हार्ड डिस्क, अलग-अलग बैंकों के 16 एटीएम कार्ड, पासपोट , आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पांच मोबाइल, अमेरिकन एक्सप्रेस बैंक का डेबिट कार्ड, 2 पैन कार्ड, होटल ताज का मेंबरशिप कार्ड