लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्राग नारायण रोड स्थित राजकीय बाल गृह में चार बच्चियों की मौत हो गई| लखनऊ जिला प्रशासन ने मामले में राजकीय बाल गृह के अधीक्षक को निलंबित कर मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं | जिला प्रशासन ने इन बच्चियों की ठंड से मौत की बात को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि मौत के कारणों के बारे में सही जानकारी पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चल पायेंगी ।
राजकीय बाल गृह में 4 बच्चों की मौत पर महिला एवं बाल विकास मंत्री बेबी रानी मौर्य ने कहा कि,'' बच्चे बुखार,दस्त और थैलेसीमिया से पीड़ित थे और वो 10 दिनों से विभिन्न अस्पताल में भर्ती थे वहां पर उन्हें पूरी चिकित्सीय सुविधा दी जा रही थी। मृत्यु के प्रकरण में उस संस्था का निरीक्षण किया गया|
मौर्य ने कहा कि,''संस्था में अधिक बच्चे होने के कारण इनकी आवास हेतु एक अतिरिक्त कक्ष की व्यवस्था की गई है जिससे इंफेक्शन से बच्चों का बचाव किया जा सके। मुख्य चिकित्सा अधिकारी का बयान गलत है, जांच हेतु एक टीम गठित की गई है, इसमें जो दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी|
राजकीय बालगृह में नवजात से लेकर दस साल के बच्चे रखे जाते हैं। यह महिला कल्याण विभाग द्वारा संचालित है। यहां निराश्रित, लावारिस एवं परित्यक्त नवजात शिशुओं को बाल कल्याण समीति के आदेश से रखा जाता है। इस बाल गृह में फिलहाल 28 नवजात सहित कुल 75 बच्चे रह रहे हैं। उनका पालन पोषण उत्तर प्रदेश का महिला कल्याण विभाग करता है।
महिला कल्याण विभाग के जिला परिवीक्षा अधिकारी (डीपीओ) विकास सिंह ने बृहस्पतिवार को बताया था कि बाल गृह में चार बच्चियों की मौत 10 और 14 फरवरी के बीच इलाज के दौरान हुई थीं। उन्होंने कहा कि इन बच्चियों के शव का पोस्टमार्टम कराया गया है जिसकी रिपोर्ट अभी नही मिली है। उनका कहना था कि रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारणों का पता चल सकेगा। उनके अनुसार घटना के मजिस्ट्रेट जांच के भी आदेश दे दिए गए हैं। राजकीय बालगृह के अधीक्षक किंशुक त्रिपाठी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है तथा उन्हें निलंबित कर दिया गया है।