लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) की राष्ट्रीय अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने आज, रविवार (11 अगस्त 2024 ) को लखनऊ पार्टी प्रदेश कार्यालय में आयोजित बी. एस. पी. यूपी स्टेट यूनिट के सभी वरिष्ठ पदाधिकारियों, जिला अध्यक्षों एवं अन्य जिम्मेदार लोगों की महत्त्वपूर्ण बैठक में जहाँ पिछली 23 जून को हुई पार्टी बैठक में पार्टी के जनाधार को बहुजनों में बढ़ाने के लिए दिए गए ज़रूरी दिशा-निर्देशों की प्रगति रिपोर्ट ली, वहीं प्रदेश में दस विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनावों में पार्टी के बेहतर रिजल्ट के सम्बंध में भी जमीनी तैयारियों आदि की गहन समीक्षा की।
उपचुनाव की सभी दस सीटों पर प्रत्याशी उतारेगी बसपा
लोकसभा आमचुनाव के फलस्वरूप यूपी में रिक्त हुए दस विधानसभा की सीटों पर होने वाले उपचुनाव के बारे में अभी चुनाव के तारीख़ की अधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, किन्तु इसको लेकर सरगर्मी लगातार बढ़ रही है। खासकर रूलिंग पार्टी बीजेपी व इनकी सरकार द्वारा इसे प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लेने के कारण इन उपचुनावों में लोगों की रूचि काफी बढ़ी है। बी.एस.पी. ने भी इन उपचुनावों में सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने व पूरी दमदारी के साथ लड़ने का फैसला लिया है।
गरीबों, शोषितों-पीड़ितों की पार्टी है बसपा
मायावती ने पार्टी संगठन की तैयारियों के सम्बंध में पार्टी की जोनवार समीक्षा रिपोर्ट लेने के बाद पार्टी के लोगों से आग्रह किया कि बी. एस. पी. चूंकि गरीबों, शोषितों पीड़ितों की पार्टी है तथा दूसरी पार्टियों की तरह बड़े-बड़े पूंजीपतियों व धन्नासेठों के सहारे और इशारे पर चलने वाली पार्टी नहीं है, इसीलिए इसके अनुयायी इसे पूरे तन, मन, धन से अपने सहयोग में कमी न आए तो यह पार्टी व मूवमेन्ट के लिए बेहतर होगा।
BJP द्वारा 'विध्वसंक बुल्डोजर राजनीति' सहित हर प्रकार का नया जाति व धार्मिक उन्माद/ विवाद पैदा करने का षडयंत्र जारी
बैठक को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि केन्द्र व यूपी की भाजपा सरकार द्वारा खासकर बढ़ती गरीबी, बेरोजगारी, महंगाई व पिछड़ेपन आदि को रोक पाने में विफलता ही नहीं बल्कि इस ओर समुचित ध्यान न देने के कारण आम जनता में जबरदस्त नाराजगी है। इसीलिए इन मुद्दों से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए इनके (BJP) द्वारा विध्वसंक बुल्डोजर राजनीति सहित हर प्रकार का नया जाति व धार्मिक उन्माद / विवाद पैदा करने का षडयंत्र लगातार जारी है, जिस क्रम में खासकर धर्म परिवर्तन पर नया कानून व जाति के आधार पर सदियों से तोड़े एवं पछाड़े गए एससी-एसटी समाज के लोगों का उप-वर्गीकरण व क्रीमी लेयर करने का यह नया षडयंत्र करके उन्हें बांटने का प्रयास, जातीय जनगणना से इंकार मस्जिद मदरसा संचालन व वक्फ संरक्षण आदि में जबरदस्ती की सरकारी दखलन्दाजी आदि की जा रही है, जबकि गरीब व मेहनतकश जनता आत्म-सम्मान व स्वाभिमान के साथ जीने के लिए इज्जत की रोटी-रोजगार की भ??खी, जिस पर सरकार का समुचित ध्यान नहीं देना क्या उचित ?
सरकार की नीयत व नीति पर जनता को विश्वास नहीं रहा: मायावती
इसीलिए अब जबकि सरकार की नीयत व नीति पर जनता को आँख बंद करके विश्वास नहीं रहा है, बी.एस.पी. को अपनी गरीब व सर्वजन हितकारी "बहुजन हिताय व बहुजन सुखाय" की नीति एवं सिद्धान्त पर जनता का भरोसा फिर से जीतने का प्रयास लगातार जारी रखना है, जिसका चुनावी लाभ भी जरूरी एवं स्वाभाविक है।
बाढ़ के कारण लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त, कानून-व्यवस्था के मामले में भी सरकार की सख्ती कागजों पर: मायावती
जहाँ तक प्रदेश में बाढ़ के कारण काफी लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त होने का मामला है, इसको लेकर मदद देने के बारे में भी राज्य सरकार की अखबारी बयानबाजी ज्यादा है तथा जमीनी राहत कम। इसी प्रकार कानून-व्यवस्था के मामले में सरकार की सख्ती कागजों पर ज्यादा लगती है तथा इसका रूलिंग पार्टी भाजपा के लोगों पर ही तो सबसे कम ही प्रभाव देखने को मिलता है अर्थात् भाजपा वालों पर यह बेअसर ही है।
सरकारी जमीन लीज़ पर देने के मामले में सरकार द्वारा द्वेष व पक्षपात का रवैया अपनाना यह क्या उचित ?: मायावती
इतना ही नहीं बल्कि एक तरफ तो यूपी सरकार द्वारा नजूल की जमीन के सम्बंध में जल्दबाजी में फैसला लेकर पूरे राज्य में अफरातफरी का माहौल पैदा कर दिया गया है, तो वहीं दूसरी तरफ सरकारी जमीन लीज़ पर देने के मामले में भी द्वेष व पक्षपात का रवैया सामने आने लगा है, जिससे खुद भाजपा के भीतर भी स्वाभाविक तौर पर बेचैनी व इसकी मुखालफत देखने को मिली है।
इसके अलावा, परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के सतत् संघर्ष व कठिन प्रयासों के फलस्वरूप यहाँ सदियों से जाति के आधार पर तोड़े, सताए एवं पछाड़े गए एससी-एसटी वर्ग के लोगों को आरक्षण का मामला है, तो इसको निष्क्रिय व निष्प्रभावी बनाने और अन्ततः समाप्त करने की गहरी साजिश लगातार की जा रही है, कभी कांग्रेस, भाजपा व सपा द्वारा सीधे तौर पर तो कभी कोर्ट का सहारा लेकर की जा रही है जबकि इस मामले में अम्बेडकरवादी बी.एस.पी. ही दलितों व बहुजनों की असली हितैषी पार्टी है।
BSP का मूवमेन्ट जाति के आधार पर पिछड़े व पछाड़े गए दलितों व अन्य बहुजनों को जोड़ने का मानवतावादी मिशन
आरक्षण में क्रीमी लेयर के मुद्दे पर मायावती ने कहा कि एससी-एसटी वर्गों के लोगों को जब सामाजिक, शैक्षणिक व आर्थिक पिछड़ेपन के आधार पर आरक्षण की सुविधा प्रदान की गयी है तो तब फिर इसमें क्रीमी लेयर का सवाल ही कहाँ से पैदा होता है? सुप्रीम कोर्ट के 9 जजों की संविधान पीठ ने सन् 1992 के इन्दिरा साहनी केस में स्पष्टतः कहा कि क्रीमी लेयर का मामला केवल ओबीसी से सम्बंधित है, किसी भी प्रकार से एससी-एसटी वर्ग से नहीं, जिसको ध्यान में रखकर भी केन्द्र सरकार को अब अविलम्ब उचित निर्णय ले लेना चाहिए ।
साथ ही, इन वर्गों के लोगों का उप-वर्गीकरण करने की सोच अनुचित है, जबकि बी. एस. पी. का मूवमेन्ट केवल एससी व एसटी समाज की जातियों को जोड़ना ही नहीं बल्कि ओबीसी वर्ग के लोगों को भी साथ में जोड़कर राजनीतिक शक्ति बनकर सत्ता की मास्टर चाबी प्राप्त करना है ताकि गरीब व बहुजन अपनी तरक्की व विकास के लिए दूसरों पर निर्भर न रहें जैसा कि अब तक यहाँ यही देखने को मिल रहा है। इस ख़ास मुद्दे को लेकर बी.एस.पी. के लोगों को विशेषकर बहुत ही सतर्क व सजग रहने की जरूरत है, क्योंकि आरक्षण के विरुद्ध षड़यंत्र लगातार गहराता जा रहा है, जिसे हमेशा के लिए खत्म करने की काफी गहरी साजिश चल रही है।
दलितों को आरक्षण नेहरू-गांधी की देन नहीं: मायावती
क्रीमी लेयर के मुद्दे पर मायावती ने कहा कि,''इसी सिलसिले में जब कांग्रेस की कल प्रतिक्रिया आयी तो आज सुबह मुझे ट्वीट के जरिये अपनी बात कहनी पड़ी ।
1- उन्होंने कहा कि,''कल बी.एस.पी. की प्रेस कान्फ्रेंस के बाद कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के दिये बयान की जानकारी मिली जिससे SC-ST के समक्ष कांग्रेस पार्टी के बयान में बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर को नहीं बल्कि पं. नेहरू व गाँधीजी को आरक्षण का श्रेय दिया गया है जिसमें रत्तीभर भी सच्चाई नहीं ।
II -जबकि वास्तव में आरक्षण का पूरा श्रेय बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर को ही जाता है जिनको किस तरह से कांग्रेस के लोगों ने संविधान सभा में जाने से रोकने का षड़यन्त्र रचा तथा उनको चुनाव में भी हराने का काम किया। कानून मन्त्री पद से भी इस्तीफा देने को विवश किया।
III- कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने यह कहा कि देश में SC-ST वर्गों के उप-वर्गीकरण के सम्बन्ध में पार्टी के स्टैण्ड का खुलासा करने के पहले इनकी पार्टी NGOs व वकीलों आदि से विचार-विमर्श करेगी जिससे स्पष्ट है कि कांग्रेस उप-वर्गीकरण (Sub-Classification) के पक्ष में है।
IV- कांग्रेस द्वारा क्रीमी लेयर के बारे में भी गोलमोल बातें की गई है। कांग्रेस के 99 सांसद होने के बाद भी सत्रावसान होने तक संसद में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को निष्प्रभावी बनाने के लिए कोई भी आवाज़ नहीं उठाई गई, जबकि इस पार्टी ने संविधान व आरक्षण को बचाने के नाम पर ये सीटें जीती है। इन सबसे स्पष्ट है कि कांग्रेस के इण्डिया एलायन्स व बीजेपी का NDA गठबन्धन सुप्रीम कोर्ट के पहली अगस्त, 2024 को SC व ST वर्गों के आरक्षण के सम्बन्ध में आये निर्णय से पूरी तरह से असहमत नहीं है अर्थात् विरोध में नहीं है। जिनसे इन वर्गों को सावधान रहने की जरूरत है।