लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष व उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने रविवार (15 जनवरी 2023) को लखनऊ में अपना 67वां जन्मदिन मनाया। इस मौके पर मायावती ने ‘मेरे संघर्षमय जीवन और बसपा मूवमेंट का सफरनामा भाग-18’ हिंदी और अंग्रेजी पुस्तक का विमाचन किया। मायावती ने ऐलान किया कि आगामी राज्यों के विधानसभा चुनावों या 2024 लोकसभा चुनावों में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) किसी भी पार्टी के साथ गठबंधन नहीं करेगी| साथ ही मायावती ने केंद्र की मोदी सरकार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर हमला बोला है|
बसपा प्रमुख ने रेखांकित किया, "केंद्रीय एजेंसियों का राजनीतिकरण कर दिया गया है।" उत्तराखंड के जोशीमठ शहर के डूबने के परोक्ष संदर्भ में उन्होंने कहा, "भाजपा सरकार की गलत नीतियों के कारण लोग प्राकृतिक आपदा का सामना कर रहे हैं।" मायावती ने कहा कि "जांच एजेंसियां का देश व जनहित में इस्तेमाल करने की बजाय ज्यादातर इनका भी 'राजनीतिकरण' ही कर दिया गया है, यह भी देश के लिए काफी चिन्ता की बात है । उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के इस्तेमाल पर भी चिंता जताई। मायावती ने चुनाव आयोग से बैलेट पेपर से चुनाव कराने का आग्रह किया है।"
मायावती ने कहा, कांग्रेस, बीजेपी व इनकी समर्थक पार्टियों की वजह से ही पूरे देश में गरीबी, बेरोजगारी, मंहगाई व भ्रष्टाचार आदि भी लगातार बढी है। किसान, मजदूर, छोटा व्यापारी व अन्य मेहनतकश लोग भी यहाँ काफी दुःखी है और अब इन सब मामलों में बीजेपी के शासनकाल में स्थिति और भी ज्यादा खराब व दयनीय बनी हुई है, जिन पर पर्दा डालने व लोगों का ध्यान बांटने के लिए आए दिन नई-नई व हवा-हवाई घोषणायें एवं निवेश लाने के नाम पर भी किस्म-किस्म की नाटकबाजी आदि की जा रही है।
प्रेस कांफ्रेंस में मायावती ने कहा कि,''हमारी पार्टी, समाज में विशेषकर गरीब, कमजोर, असहाय व अन्य उपेक्षित वर्गों के हित एवं कल्याण के लिए हमेशा ही अति गम्भीर, संवेदनशील, ईमानदार व संघर्षरत रहती है जिसके मुताबिक चलकर ही, बी.एस.पी. ने अपने नेतृत्व में यहाँ चार बार यू.पी. में अपनी सरकार भी चलाई है और इस दौरान हमारी पार्टी की रही सरकार ने मेरे जन्मदिन के मौके पर भी ऐसे लोगों के हित व कल्याण के लिए अनेको नई-नई जनहित की योजनायें प्रारम्भ की है, जिनसे इन्हें काफी मद्द भी मिली है जिनकी जानकारी सभी को है और जिसे मैं दोहराना नहीं चाहती हूं।
उन्होंने कहा, "लेकिन यह सब यहाँ जातिवादी, संकीर्ण, साम्प्रदायिक व पूँजीवादी मानसिकता रखने वाली विरोधी पार्टियों को अच्छा नहीं लगा है जिसकी खास वजय से ही तब फिर इन्होंने यहाँ बीएसपी के विरूद्ध अन्दर- अन्दर एकजुट होकर व सभी साम, दाम, दण्ड, भेद आदि अनेको हथकण्डे इस्तेमाल करके बीएसपी को आगे बढ़ने से व सत्ता में आने से भी रोका है| यह भी सर्वविदित है, जबकि ऐसी मानसिकता रखने व नीतियों पर चलने वाली खासकर कांग्रेस, बीजेपी व इनकी समर्थक पार्टियों की वजह से ही गरीबी, बेरोजगारी, मंहगाई व भ्रष्टाचार आदि भी लगातार बढ़ रहा है। किसान, मजदूर, छोटा व्यापारी व अन्य मेहनतकश लोग भी यहाँ काफी दुःखी है|
हवा-हवाई घोषणायें व निवेश लाने के नाम पर किस्म-किस्म की नाटकबाजी कर रही BJP
उन्होंने कहा, "गरीबी, बेरोजगारी, मंहगाई व भ्रष्टाचार आदि इन सब मामलों में बीजेपी के शासनकाल में तो स्थिति अब और भी ज्यादा खराब व दयनीय बनी हुई है, जिन पर पर्दा डालने व लोगों का ध्यान बांटने के लिए ही अब यह पार्टी (BJP) आयदिन नई-नई व हवा हवाई घोषणायें करने एवं निवेश लाने के नाम पर भी किस्म-किस्म की नाटकबाजी आदि करने का ही सहारा ले रही है तथा जिनसे जमीनी हकीकत में यहाँ के गरीब एवं मध्यम वर्ग के लोगों को कुछ भी खास लाभ मिलने वाला नहीं है।
भाजपा सरकार की गलत नीतियों के कारण उत्तराखंड के लोग प्राकृतिक आपदा का सामना कर रहे हैं
मायावती ने कहा कि "साथ ही, इनकी गलत नीतियों व गलत कार्यशैली आदि की वजह से ही अब यहाँ उत्तराखण्ड व अन्य पहाड़ी बाहुल्य प्रदेश भी काफी ज्यादा प्रभावित हो रहे है। इसके इलावा देश में जरूरतमन्द लोगों को सही से बसाने की बजाय उल्टा हल्द्वानी की तरह ही अधिकाशः उन्हें उजाड़ा जा रहा है। हालाँकि हल्द्वानी के लोग तो अभी सुप्रीम कोर्ट की वजह से थोड़े बचे हुये है और अब यहाँ यूपी सहित पूरे देश में कानून-व्यवस्था को ठीक करने की आड़ में जो घिनौनी राजनीति की जा रही है यह सब भी किसी से छिपा नहीं है।
केंद्रीय एजेंसियों का राजनीतिकरण
उन्होंने कहा, "केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा जाँच ऐजेन्सियों का भी देश व जनहित में इस्तेमाल करने की बजाय ज्यादातर इनका भी राजनीतिकरण ही कर दिया गया है यह भी देश के लिए काफी चिन्ता की बात है ।
दोबारा बैलेट पेपर से कराया जाए मतदान
EVM पर चिंता जताते हुए मायावती ने कहा कि,'' इसके साथ-साथ, पिछले कुछ वर्षों से देश में ईवीएम (इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन ) के जरिये चुनाव कराने को भी लेकर यहाँ कि जनता में किस्म-किस्म की आंशकायें व्याप्त हैं जिन्हें दूर व खत्म करने के लिए बेहतर तो यही होगा कि अब यहाँ आगे सभी छोटे-बड़े चुनाव, पूर्व की तरह सीधे बैलेट पेपर से ही कराये जायें, BSP की मुख्य चुनाव आयुक्त (चुनाव आयोग) से तथा केन्द्र की सरकार से भी यह पूरजोर मांग व सलाह भी है।
जातिवादी सरकारों के चलते....
उन्होंने कहा, " मैं अपने जन्मदिन के मौके पर विशेषकर अपने दलितों, आदिवासियों, पिछड़े वर्गों, मुस्लिम एवं अन्य धार्मिक अल्पसंख्यक समाज के लोगों को आज भी इन्हें फिर से यह याद दिलाना जरूरी समझती हूँ कि भारतीय संविधान के मूल निर्माता व इन कमजोर एवं उपेक्षित वर्गों के मसीहा परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर ने अपने इन लोगों को यह कहा है कि मैंने यहाँ जातिवादी व्यवस्था के शिकार व सदियों से उपेक्षित रहे अपने इन वर्गों के लोगों को आत्म-सम्मान व स्वाभिमान की जिन्दगी बसर करने तथा अपने खुद के पैरों पर खड़े होने के लिए जो भी इन्हें कानूनी अधिकार दिलाये हैं उनका सही से व पूरा लाभ लेने के लिए इन सभी वर्गों के लोगों को आपस में भाईचारा पैदा करके व संगठित होकर तथा अपने खुद के राजनैतिक मंच से जुड़कर केन्द्र व राज्यों की भी राजनैतिक सत्ता की मास्टर चॉबी इन्हें खुद अपने हाथों में लेनी होगी।
क्योंकि अभी तक के अनुभव के मुताबिक यहाँ जातिवादी सरकारों के चलते हुये कभी भी इन वर्गों के लोगों को संविधान में मिले कानूनी अधिकारों का सही से व पूरा लाभ नहीं मिल सकता है। खासकर आरक्षण के मामले में तो शुरू से ही यहाँ कांग्रेस, बीजेपी व सपा सहित अन्य सभी विरोधी पार्टियाँ, अपने संवैधानिक उतरदायित्व के प्रति कतई भी ईमानदार नहीं रही है।
इसके साथ ही एससी व एसटी के आरक्षण को लागू करने के मामले में ही नहीं बल्कि ओबीसी के आरक्षण को लेकर भी इन पार्टियों का रवैया अधिकाशः हमें अति-जातिवादी व क्रूर ही देखने को मिला है जिसके तहत ही कांग्रेस पार्टी ने केन्द्र में अपनी सरकार के लम्बे दौर के रहते हुए भी पिछड़ों के आरक्षण सम्बन्धी मण्डल कमीशन की रिपोर्ट को लागू नहीं होने दिया ।
इसके साथ-साथ, इन्होंने एससी व एसटी के आरक्षण को भी निष्प्रभावी बना दिया और अब बीजेपी भी इस मामले में कांग्रेस पार्टी के ही पदचिन्हों पर चलकर इनके आरक्षण के हक को मारने का भी यह घोर अनुचित कार्य कर रही है जिसकी खास वजय से ही इस बार यू.पी. निकाय चुनाव भी प्रभावित हुये है।
इतना ही नहीं बल्कि, सपा की रही सरकार ने भी यहाँ खासकर अति पिछड़ों को उनका पूरा हक नहीं देकर इनके साथ हमेशा छल करने का ही काम किया है जिसके तहत ही सपा सरकार ने ओबीसी की 17 अति पिछड़ी जातियों को ओबीसी वर्ग की सूची से हटाकर व उन्हें एससी वर्ग में शामिल करने का भी यह गैर-संवैधानिक कार्य करके इन वर्गों के लाखों परिवारों को ओबीसी के आरक्षण से वंचित कर दिया और फिर ये सभी जातियाँ ना ओबीसी में ही रह पायीं और ना ही एससी में उन्हें शामिल किया जा सका। और यह गलत कार्य करने पर सपा सरकार को कोर्ट की फटकार अलग लगी, और तब फिर ये जातियाँ पुरानी स्थिति में वापिस आई है।
इनके साथ-साथ सपा सरकार ने एससी व एसटी का पदोन्नति में आरक्षण को भी खत्म कर दिया और इससे सम्बन्धित बिल को सपा ने संसद में फाड़ दिया तथा इसे फिर पास भी नहीं होने दिया है, जबकि बी.एस.पी. की रही सरकार में एससी व एसटी के साथ-साथ अति पिछड़ों एवं पिछड़ों को भी उनका आरक्षण का पूरा हक व लाभ दिया गया है। अन्य सभी मामलों में भी इनका प्राथमिकता के आधार पर पूरा-पूरा ध्यान रखा गया है। साथ ही, इनके सन्तों, गुरुओं व महापुरुषों आदि को भी हर स्तर पर पूरा-पूरा आदर-सम्मान दिया गया है जिनकी सभी विरोधी पार्टियों की रही सरकारों में हर स्तर पर काफी उपेक्षा की गयी है।
ऐसी स्थिति में अब यहाँ कमजोर एवं उपेक्षित वर्गों के लोगों को बाबा साहेब की कही गई इन बातों पर अमल करके इन्हें अपनी पार्टी BSP को पूरी ईमानदारी एवं निष्ठा से तथा पूरे तन, मन, धन से व हर स्तर पर इसे सत्ता में जरूर लाना होगा, तभी फिर इन लोगों को बाबा साहेब के दिये गये संवैधानिक कानूनों का सही से व पूरा लाभ मिल सकता है और तभी ये लोग यहाँ अपने आत्म-सम्मान व स्वाभिमान की भी जिन्दगी व्यतीत कर सकते है। और इसके लिए यदि ये लोग पूरे देश में, जी-जान से जुट जाते हैं तथा बाबा साहेब का यह सपना साकार कर देते है तो फिर यही इनका मेरे जन्मदिन पर विशेष व कीमती तोहफा भी होगा।
मायावती ने कहा कि "वैसे भी इसके सिवाय मुझे इनसे कुछ और नहीं चाहिये। मुझे पूरी उम्मीद है कि इस मामले में मेरे ये लोग अब आगे मुझे कतई भी निराश नहीं करेंगे और इसके लिए मेरे नेतृत्व में हमारी पार्टी ने पिछले एक वर्ष में जो भी प्रयास किये है उसे विशेषकर बीएसपी से जुड़ रहे नये लोगों व वर्तमान युवा पीढ़ी तथा आगे आने वाली पीढ़ी के भी जानने व समझने के लिए|
मेरे संघर्षमय जीवन और बसपा मूवमेंट का सफरनामा भाग-18’ पुस्तक का विमाचन...
उन्होंने कहा कि " अब मैं हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी आज अपने जन्मदिन के शुभ अवसर पर मेरी लिखी पुस्तक मेरे संघर्षमय जीवन एवं बीएसपी मूवमेन्ट का सफरनामा, के 18 वें (A Travelogue of My Struggle Ridden Life and BSP Movement - ए ट्रेवेलोग ऑफ माई स्ट्रगल-रिडेन लाइफ एण्ड बीएसपी मूवमेन्ट) हिन्दी व अंग्रेजी संस्करण का, जिसमें मुख्य तौर से एक वर्ष के दौरान का पार्टी व मूवमेन्ट के कार्यकलापों व संघर्षों के क्रम में खासकर मेरे सामने आने वाली कठिन चुनौतियों, अनेकों प्रकार के संघर्षों एवं विभिन्न प्रकार के षड़यंत्रों तथा उनसे निपटने आदि का वास्तविक वर्णन व विवरण तथा साफ-सुथरा लेखा-जोखा होता है उसका विमोचन करती हूँ।
धन्नासेठों के इशारों से कोसों दूर रहकर बहुजन समाज के लोगों के हित व कल्याण के लिए समर्पित पार्टी है BSP...
मायावती ने कहा कि "BSP के बारे में यह भी बताना जरूरी है कि बसपा धन्नासेठों के धनबल पर व उनके इशारों से कोसो दूर रहकर यहाँ विशेषकर मेहनतकश बहुजन समाज के लोगों के हित व कल्याण के लिए समर्पित पार्टी है। इसके साथ ही, नेताओं के स्वार्थ पूर्ति से अलग हटकर अपनी पार्टी का मुख्य लक्ष्य एससी, एसटी, ओबीसी व मुस्लिम समाज आदि इन बहुजन समाज को भाईचार पर आधारित इस बने गठजोड़ के बल पर व चुनाव जीतकर इनकी सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति को ठीक करने का लक्ष्य प्राप्त करना है।
आगामी चुनावों में अपने बलबूते पर सभी चुनाव लड़ेगी BSP
उन्होंने कहा कि "मैं यहाँ यह भी स्पष्ट कर देना चाहती हूँ कि इस वर्ष सन 2023 में कर्नाटक, राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ सहित अन्य जिन भी राज्यों में विधानसभा के व अगले वर्ष देश में लोकसभा के लिए होने वाले आमचुनाव में भी हमारी पार्टी बी.एस. पी. किसी भी पार्टी के साथ कोई भी गठबंधन करके यह चुनाव नहीं लड़ेगी बल्कि अकेले अपने बलबूते पर ही ये सभी चुनाव लड़ेगी। और आज पार्टी की यह नीतिगत घोषणा करना मेरे लिए इसीलिए भी जरूरी हो गया है क्योंकि खासकर कांग्रेस व अन्य कुछ और दलों ने भी षडयंत्र के तहत बीएसपी से गठबंधन करने का भ्रम जानबूझ कर अभी से ही फैलाना शुरू कर दिया है, जबकि बी.एस.पी. ने एक-दो बार यू.पी. आदि राज्य स्तर पर अभी तक जो भी चुनावी गठबंधन किया है तो उससे केवल पंजाब को छोड़कर हमारी पार्टी की तरह उनका वोट हमें ट्रान्सफरेबल नहीं होने के कारण फिर बी.एस.पी. को ही हानि ज्यादा हुई है। इसलिए इस मामले में अब तक के ज्यादातर रहे खराब अनुभवों को ध्यान में रखकर अब हमारी पार्टी ने आगे विधानसभा व लोकसभा का आमचुनाव भी अकेले ही लड़ने का फैसला लिया है।
मायावती ने कहा कि "मैं अपनी व पार्टी के लोगों की भी मेहनत व संघर्ष पर यह भरोसा करती हूँ कि आने वाले समय में निश्चय ही सर्वसमाज के गरीबों एवं मेहनतकश लोगों के तथा बहुजन समाज के लिए भी वास्तव में सन् 2023 का यह वर्ष नया सवेरा बनकर जरूर आयेगा और फिर उनके जीवन से जुड़ी बहुत सारी अच्छी उम्मीदें जरूर पूरी होंगी।
बीएसपी का जनाधार कम नहीं हुआ
बीएसपी के चुनाव में निराशाजनक प्रद??्शन पर पूछे गए सवाल के जवाब में मायावती ने कहा कि बीएसपी 'बहुजन समाज' के जनाधार वाली पार्टी है| 14 अप्रैल सन 1984 को पार्टी की स्थापना के बाद से ही वोटों के प्रतिशत तथा सीटों की संख्या के मामले में भी अपनी राजनीतिक शक्ति का प्रदर्शन खासकर यूपी में करती रही है। इसको लेकर हमारी विरोधी पार्टियों ने अपने-अपने हिसाब से ईवीएम का खेल खेलना शुरू किया। जब तक बैलेट पेपर की परम्परागत तरीके से चुनाव होते रहे हमारी पार्टी की ताकत लगातार बरकरार रही। लेकिन ईवीएम से चुनाव होते ही लोगों की आशकायें काफी बढ़ने लगीं। यूपी में सन् 2007 विधानसभा चुनाव में बहुमत प्राप्त करने के बावजूद भी बीएसपी तथा अन्य पार्टियों की भी इस बारे में शंकाओं का समुचित समाधान नहीं हो पाया और यह मामले सुप्रीम कोट तक में ले जाया गया। जिसके बाद ही काफी आनाकानी करने के बाद केन्द्र सरकार ने वीवीपेट लाना स्वीकार किया किन्तु उससे भी शंकाओं का समाधान पूरी तरह से नहीं हो पाया क्योंकि सभी ईवीएम वोटों का मिलान वीवीपेट से नहीं कराया जाता है।
...दाल में जरूर काला: EVM पर मायावती
इसके अलावा, दुनिया के अधिकतर देशों में बैलेट पेपर से ही चुनाव कराने की व्यवस्था आज भी कायम है तथा जिन भी कुछ देशों में इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन आजमायें गये वहाँ भी यह प्रयोग जन संतोष के मुताबिक नहीं पाया गया है। इसीलिए दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत की चुनाव प्रक्रिया व व्यवस्था को भी पूरी तरह से केवल पाक-साफ व ईमानदार होना ही काफी नहीं है बल्कि ऐसा लोगों को पूरी तरह से लगना भी चाहिए। अभी तक जो लोग ईवीएम के समर्थक रहे हैं वे भी अप्रत्याशित परिणामों के मद्देनजर ईवीएम से संतुष्ट नहीं दिखते है। पार्टी के लोग ईवीएम के प्रति आशंकित इसलिए भी है कि बीएसपी बाहुल्य क्षेत्रों में भी आश्चर्यचकित तौर पर वोट खासकर सत्ताधारी पार्टी को ही निकलने से स्थानीय वोटरों में अचम्भा व नाराजगी भी काफी है। वीवीपैट समस्या का सही समाधान नहीं है| इसलिए स्पष्ट तौर पर लोगों का मानना है कि दाल में जरूर काला है तथा इसका उचित समाधान जरूरी।
भाजपा की जुल्म ज्यादती के शिकार मुस्लिम समाज के लोग इनके बहकावे में आने वाले नही
इसके अलावा एक अन्य प्रश्न के उत्तर में मायावती ने कहा कि भाजपा का पसमांदा मुस्लिम के नाम पर विभाजनकारी गेम प्लान सफल होने वाला नही है क्योंकि भाजपा की गलत नीतियों व द्वेषपूर्ण कार्यकलापों आदि के कारण मुस्लिम भी आज सबसे ज्यादा शोषित व पीड़ित समाज है। साथ ही मुसलमान पहले मुसलमान है, वह पसमांदा बाद में है। भाजपा की जुल्म ज्यादती के शिकार मुस्लिम समाज के लोग इनके बहकावे में कतई भी आने वाले नही हैं।
अतीक अहमद की पत्नी माफिया नहीं
प्रयागराज मेयर पद पर अतीक अहमद की पत्नी को महिला उम्मीदवार के रूप में टिकट देने सम्बंधी सवाल पर मायावती जी ने कहा कि अतीक अहमद की पत्नी कौन सी माफिया है?
हमारा कोर वोटर हमेशा मिशनरी बनकर पार्टी के साथ मजबूती से संघर्षरत..
एक दूसरे सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि,'' राजनीतिक पार्टियों के इतिहास में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, किन्तु बीएसपी के सम्बंध में अच्छी बात यह है कि हमारा कोर वोटर हमेशा मिशनरी बनकर पार्टी के साथ मजबूती से संघर्षरत है और उन पर मुझे पूरा भरोसा ही नहीं बल्कि बहुत नाज़ है। इसके साथ ही, BSP से जिन लोगों को निकाला जाता है उन्हें शायद ही वापस लिया जाता है, तथा विरोधी पार्टी के लोग फिर उन निष्कासित लोगों को सर पर बैठाते फिरते हैं।
यूपी में निवेश लाने के नाम पर केवल पब्लिसिटी...
एक अन्य सवाल के जवाब में मायावती ने कहा कि यूपी में निवेश लाने के नाम पर जो 'रोड शो व ड्रामेबाजी' आदि की जा रही है उससे जनता को लाभ होता हुआ नजर नहीं आ रहा है, बल्कि केवल पब्लिसिटी ही ज्यादा नजर आ रही है। इससे जनता को कुछ लाभ होता हुआ मीडिया को भी कुछ नजर आ रहा है क्या?
..प्रतिक्रिया देना उचित नहीं: बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर के 'रामचरित मानस' पर दिए गए बयान पर मायावती
बिहार के मंत्री द्वारा रामचरितमानस, मनुस्मृति व बंच ऑफ थाउट के ऊपर विवादित टिप्पनी के सम्बंध में पूछे गये प्रश्न के जवाब में उन्होंने कहा कि मंत्री का बयान किस सन्दर्भ में था यह मुझे नहीं पता । इसीलिए उस पर कोई भी प्रतिक्रिया देना उचित नहीं होगा ।