नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के राजनीतिक दल 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटे हैं। इस बीच बसपा में बगावत से सूबे का सियासी माहौल एकाएक गर्मा गया है। प्रदेश की सियासत में प्रबल प्रतिद्वंद्वी माने जाने वाले समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच विवाद फिर गहरा गया है| बागी विधायकों ने कल लखनऊ में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाकात की।
इस घटना को लेकर बीएसपी प्रमुख मायावती ने समाजवादी पार्टी पर बड़ा हमला बोलते हुए चेतावनी दी है। मायावती ने कहा कि अगर सपा ने बीएसपी के निलंबित विधायकों को पार्टी में लिया तो बगावत या फूट पड़ेगी| मायावती ने कहा,''सपा का चाल, चरित्र व चेहरा हमेशा ही दलित-विरोधी रहा है, जिसमें थोड़ा भी सुधार ???े लिए वह कतई तैयार नहीं। BSP के बागी MLAs की अखिलेश यादव से मुलाकात पर बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने अपनी नाराजगी जताते हुए सिलसिलेवार कई ट्वीट किए हैं|
,'बीएसपी सुप्रीमो ने अपने ट्वीट में लिखा,'घृणित जोड़तोड़, द्वेष व जातिवाद आदि की संकीर्ण राजनीति में माहिर समाजवादी पार्टी द्वारा मीडिया के सहारे यह प्रचारित करना कि बीएसपी के कुछ विधायक टूट कर सपा में जा रहे हैं घोर छलावा। जबकि उन्हें काफी पहले ही सपा व एक उद्योगपति से मिलीभगत के कारण राज्यसभा के चुनाव में एक दलित के बेटे को हराने के आरोप में बीएसपी से निलम्बित किया जा चुका है।
मायावती ने कहा,''सपा अगर इन निलम्बित विधायकों के प्रति थोड़ी भी ईमानदार होती तो अब तक इन्हें अधर में नहीं रखती। क्योंकि इनको यह मालूम है कि बीएसपी के यदि इन विधायकों को लिया तो सपा में बगावत व फूट पड़ेगी, जो बीएसपी में आने को आतुर बैठे हैं।
बसपा अध्यक्ष ने कहा,''जगजाहिर तौर पर सपा का चाल, चरित्र व चेहरा हमेशा ही दलित-विरोधी रहा है, जिसमें थोड़ा भी सुधार के लिए वह कतई तैयार नहीं। इसी कारण सपा सरकार में बीएसपी सरकार के जनहित के कामों को बन्द किया व खासकर भदोई को नया संत रविदास नगर जिला बनाने को भी बदल डाला, जो अति-निन्दनीय।
वैसे बीएसपी के निलम्बित विधायकों से मिलने आदि का मीडिया में प्रचारित करने के लिए कल किया गया सपा का यह नया नाटक यूपी में पंचायत चुनाव के बाद अध्यक्ष व ब्लाक प्रमुख के चुनाव के लिए की गई पैंतरेबाजी ज्यादा लगती है।यूपी में बीएसपी जन आकांक्षाओं की पार्टी बनकर उभरी है जो जारी रहेगा