लखनऊ: 'रामचरितमानस' पर दिए गए बयान के बाद राष्ट्रीय महासचिव स्वामी प्रसाद मौर्य के खिलाफ मोर्चा खोलने वाली रोली तिवारी मिश्रा और ऋचा सिंह को समाजवादी पार्टी से निकाला गया है।समाजवादी पार्टी ने ट्वीट किया'' रोली तिवारी मिश्रा और ऋचा सिंह को समाजवादी पार्टी से निष्कासित किया जाता है। साथ ही समाजवादी पार्टी ने पार्टी कार्यकर्ताओं, नेताओं और पदाधिकारियों को सख्त हिदायत देते हुए कहा, हमें साम्प्रदायिक मुद्दों पर बहस से परहेज करना चाहिए। राजनीतिक चर्चा और बुनियादी सवालों पर ही अपना पूरा ध्यान रखना है। धार्मिक मुद्दा संवेदनशील मुद्दा है। हमें अनायास उससे सम्बन्धित बहसों में नहीं उलझना चाहिए।
गौरतलब है कि स्वामी प्रसाद मौर्य ने 22 जनवरी को एक बयान में श्रीरामचरितमानस की एक चौपाई का जिक्र करते हुए इसे महिलाओं तथा पिछड़ों के प्रति अपमानजनक करार दिया था और इस पर पाबंदी लगाने की मांग की थी| उनके इस बयान पर खासा विवाद उत्पन्न हो गया था| इस मामले में मौर्य के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज हुआ था|
समाजवादी पार्टी ने आज गुरुवार को जारी एक बयान में कहा,''समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने निर्देश दिया है कि सभी कार्यकर्ताओं, पार्टी नेताओं,पदाधिकारियों तथा टी.वी. पैनलिस्ट को यह बात ध्यान में रखना चाहिए कि समाजवादी पार्टी डा०लोहिया के आदर्शो से प्रेरणा लेकर लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और समाजवाद में आस्था रखती है।
समाजवादी पार्टी लोहिया जी की सप्तक्रान्ति और लोकनायक जयप्रकाश जी की सम्पूर्ण क्रान्ति तथा सामाजिक न्याय के लिए प्रतिबद्ध है। जातीय जनगणना की मांग भी हम निरंतर करते रहे हैं ।
पार्टी ने कहा,''आप सब इस तथ्य से अवगत हैं कि वर्तमान शासन काल में मंहगाई चरम पर है। बेरोजगारी की दर बढ़ती जा रही है। भ्रष्टाचार बेलगाम है । किसान, नौजवान सहित समाज का हर वर्ग परेशान है। महिलाओं-बच्चियों को अपमानजनक हालात से गुजरना पड़ रहा है पूरे प्रदेश में अराजकता की स्थिति व्याप्त है।
समाजवादी पार्टी का उद्देश्य जनसामान्य को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर पार्टी की नीति और कार्यक्रम को जन-जन तक पहुंचाना है। सत्तारूढ़ दल लगातार बुनियादी मुद्दों से भटकाने का काम करता है। हमें उनके बहकावे में नहीं आना है।
इस लिए सभी को साम्प्रदायिक मुद्दों पर बहस से परहेज करना चाहिए। हमें राजनीतिक चर्चा और बुनियादी सवालों पर ही अपना पूरा ध्यान रखना है। धार्मिक मुद्दा संवेदनशील मुद्दा है। हमें अनायास उससे सम्बन्धित बहसों में नहीं उलझना चाहिए। कृपया अपने बयानों,टी.वी. चैनलों की बहस में इसका ध्यान रखें।