नई दिल्ली: कांग्रेस पार्टी ने मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह के पत्र को लेकर भाजपा पर जोरदार हमला बोला है। कांग्रेस का आरोप है कि पिछले 6 वर्षों से भाजपा की केंद्र सरकार सत्ता का दुरुपयोग करके विपक्षी दलों की राज्य सरकारों को अस्थिर करने का प्रयास कर रही है। केंद्रीय जांच एजेंसियों का उपयोग करके राज्य के प्रशासनिक अधिकारियों पर दबाव डाला जा रहा है।
पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता सचिन सावंत ने कल प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि विनोद राय और सत्यपाल सिंह के उदाहरण देश के सामने हैं। लिहाजा भाजपा के षड्यंत्र और गोदी मीडिया के माध्यम से निर्माण किए जा रहे दबाव की बलि राज्य सरकार न चढ़े। एक प्रशासनिक अधिकारी द्वारा राजनीतिक नेतृत्व को लिखा गया पत्र, यह देश का पहला मामला नहीं है।
सचिन सावंत ने कहा कि,l''गुजरात के पूर्व डीआईजी डी.जी. बंजारा ने पत्र लिखकर गुजरात के तत्कालीन गृह राज्यमंत्री और देश के वर्तमान गृहमंत्री अमित शाह पर पुलिस बल का दुरुपयोग करके दूसरों को उलझाने का गंभीर आरोप लगाया था। क्या उन दिनों अमित शाह ने इस्तीफा दिया था? आगे चलकर गुजरात सरकार ने सेवानिवृत्ति होने पर भी बंजारा को सेवा में शामिल किया था। क्या बंजारा के आरोपों को सत्य माना जाए? गुजरात के पुलिस अधिकारी संजीव भट्ट ने तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन दिनों मोदी ने इस्तीफा क्यों नहीं दिया?
परमबीर सिंह के पत्र का विश्लेषण करते हुए सावंत ने कहा कि पत्र लिखनेवाले व्यक्ति की मानसिकता व परिस्थिति, साथ ही पत्र के मसौदे और पत्र लिखनेवाले द्वारा रखे गए मुद्दे, तर्कसंगत है या तर्कशून्य, इसका भी विचार करना होगा। राज्य सरकार ने उस व्यक्ति का तबादला किया है। उस व्यक्ति का बेहद करीबी अधिकारी एक गंभीर मामले में एनआईए की गिरफ्त में है। उस पर गंभीर आरोप हैं, उन आरोपों की सुई पत्र लिखनेवाले अधिकारी की तरफ भी घूम रही है। लिहाजा केंद्रीय एजेंसी के दबाव में पत्र लिखे जाने की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता।
‘परमबीर सिंह का आरोप किसी को खुश करने के लिए है’
शिवसेना अपने मुखपत्र सामना में लिखा कि,''मुंबई पुलिस आयुक्त पद से ट्रांसफर होने के बाद परमबीर सिंह ने कल मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिखकर राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। इसी पार्श्वभूमि पर कल उपमुख्यमंत्री अजीत पवार व राकांपा प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटील को तत्काल दिल्ली बुलाया गया। दिल्ली बुलाए जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
राकांपा प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटील ने गृहमंत्री अनिल देशमुख के ऊपर पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह द्वारा लगाए गए आरोप को सिरे से खारिज कर दिया है। परमबीर सिंह का आरोप किसी को खुश करने के उद्देश्य से अधिक लग रहा है, ऐसा पाटील ने कहा। परमबीर सिंह द्वारा मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिखना, यह उनका तबादला किए जाने की प्रतिक्रिया स्वरूप है। वाझे प्रकरण में राज्य सरकार ने मजबूत भूमिका ली है। यह परमबीर सिंह द्वारा लिखे पत्र से स्पष्ट होता है। उन्होंने आगे कहा कि राज्य के गृहमंत्री अनिल देशमुख के इस्तीफे का प्रश्न ही नहीं उठता। बता दें कि पूर्व पुलिस आयुक्त ने गृहमंत्री द्वारा सचिन वाझे को १०० करोड़ रुपए वसूली का टारगेट दिए जाने का पत्र मुख्यमंत्री को लिखा था।
पुलिस विभाग ने किया नियम का उल्लंघन?
परमबीर सिंह का तबादला होने के बाद उन्होंने अत्यंत झूठे और बदले की भावना से ग्रसित होकर गृहमंत्री अनिल देशमुख पर आरोप लगाया है। एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा इस प्रकार का आरोप लगाना व मीडिया में प्रसारित करना यह राजनीतिक दृष्टि से प्रेरित है, यह स्पष्ट दिखाई दे रहा है। यह पुलिस विभाग के नियम का उल्लंघन है। ऐसे पुलिस अधिकारियों को तत्काल निलंबित किया जाए, ऐसी मांग ब्रिगेडियर सुधीर सावंत ने की है। उन्होंने कहा की ६ महीने पहले मैंने स्वयं परमबीर सिंह को उनके पद से हटाने की मांग गृहमंत्री से की थी।
सावंत ने कहा कि परमबीर सिंह दूध के धुले नहीं हैं। गृहमंत्री पर १०० करोड़ रुपए मांगने का आरोप लगाया क्योंकि गृहमंत्री ने परमबीर सिंह को हटाए जाने के मामले में स्पष्टीकरण दिया था, जिसमें उन्होंने परमबीर सिंह की गलती होने की पुष्टि की थी। सावंत ने कहा कि १०० करोड़ की बात आने पर तत्काल परमबीर सिंह को गृहमंत्री पर मामला दर्ज करना चाहिए था। मीडिया के माध्यम से एक राजनेता को बदनाम करने का षड्यंत्र रचना, यह सरकार कदापि सहन नहीं करेगी। अनिल देशमुख को मैं कई वर्षों से जानता हूं। उन्होंने भ्रष्टाचार नहीं किया। परमबीर सिंह का गृहमंत्री पर लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं। सावंत ने कहा कि मैंने गृहमंत्री से फडणवीस की जांच कराने की मांग की थी लेकिन देशमुख ने यह कहते हुए इनकार कर दिया कि यह बदले की भावना से की गई कार्रवाई कहलाएगी। यह फडणवीस को याद रखना चाहिए।
सचिन वाझे को पुलिस विभाग में वापस किसने लिया!—गृहमंत्री ने दिया जवाब
उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर के पास विस्फोटक से भरी गाड़ी मिलने के बाद सचिन वाझे को गिरफ्तार किया गया, इसके बाद राजनीतिक माहौल गरम हो गया है। सचिन वाझे को पुलिस में पुन: लेने के लिए शिवसेना ने दबाव डाला था, ऐसा आरोप नेता प्रतिपक्ष देवेंद्र फडणवीस ने लगाया था। फडणवीस के इस आरोप का राज्य के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने खुलासा किया है। वाझे प्रकरण को आधार बनाकर राज्य सरकार और पुलिस दल पर शंका करके इस मामले में राज्य के गृहमंत्री अनिल देशमुख के इस्तीफे की मांग विपक्ष कर रहा है।
प्रतिपक्ष के नेता ने कहा था कि जब मैं मुख्यमंत्री था, तो सचिन वाझे को पुन: सेवा में लेने के लिए शिवसेना का दबाव था। देवेंद्र फडणवीस के इस आरोप का राज्य के गृहमंत्री ने खुलासा करते हुए कहा कि वाझे को पुन: सेवा में लेने के लिए आयुक्त स्तर पर एक समिति निर्णय लेती है। यह समिति संबंधित मामले की समीक्षा करके पुन: सेवा में शामिल करती है। उसके अनुसार सचिन वाझे को पुन: सेवा में लिया गया है। ऐसा कहते हुए गृहमंत्री ने कहा कि देवेंद्र फडणवीस का आरोप राजनीति से प्रेरित है, ऐसे मामले की फाइल राज्य सरकार के पास नहीं आती है। यह बात फडणवीस को अच्छी तरह से मालूम है। वाझे जैसे एपीआई दर्जा के अधिकारी को सेवा में लेने के लिए गृहमंत्री या मुख्यमंत्री के पास अधिकार नहीं है, इसका अधिकार आयुक्त स्तर की समिति को है, ऐसा गृहमंत्री ने स्पष्ट किया।