मुंबई: महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि,''उन्होंने मेरा धनुष-बाण छीन लिया मगर अब खुद प्रभु राम मेरे साथ आ गए। मैंने कल रास्ते पर उतरकर चुनौती दी है कि अगर आप में हिम्मत है तो आप चुराया हुआ धनुष-बाण लेकर सामने आइए और मैं मेरी मशाल लेकर आता हूं फिर देखते हैं क्या होता है| गौरतलब है कि, चुनाव आयोग ने शुक्रवार को आदेश दिया कि पार्टी का नाम शिवसेना और पार्टी का प्रतीक धनुष और तीर एकनाथ शिंदे गुट द्वारा रखा जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर हमला करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि, “शिवसेना किसकी, ये तुम्हारे मालिक को नहीं, बल्कि महाराष्ट्र के मालिकों को तय करने का समय आ गया है| ‘कभी-कभी लोग मोदी का मुखौटा पहनकर सभा में आते हैं, लेकिन अब मोदी को बालासाहेब का मुखौटा पहनकर महाराष्ट्र में आना पड़ता है। फिलहाल महाराष्ट्र की जनता मूर्ख नहीं। मुखौटा किसका और असली चेहरा किसका, ये जनता को पता है’| ”
चुनाव आयोग द्वारा आए फैसले के बाद अगली रणनीति तय करने के लिए उद्धव ठाकरे ने ‘मातोश्री’ निवास पर नेताओं और प्रमुख पदाधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई। ‘मातोश्री’ के बाहर भी हजारों शिवसैनिकों की भीड़ जमा हुई थी।
‘मातोश्री’ के बाहर उद्धव ठाकरे ने कहा कि, “भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ऐसा लग रहा होगा कि उनका गुलाम बना सरकारी तंत्र हम पर छोड़कर हमें समाप्त किया जा सकता है। हालांकि, शिवसेना को समाप्त करना संभव नहीं है|
उद्धव ठाकरे ने शिवसैनिकों से संवाद साधते हुए कहा कि मैं जानबूझकर सड़क पर आपसे मिलने आया हूं। क्योंकि अगली लड़ाई सड़कों पर लड़नी है, ऐसा बोलते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि मैं कभी भी थका नहीं हूं और न थकूंगा। आप मेरी ताकत हो। मैं आपकी ताकत के बल पर खड़ा हूं और यह ताकत जब तक मेरे साथ खड़ी है, तब तक कितने भी चोर और चोर बाजारों के मालिक आ जाएं, फिर भी उन्हें चुनाव में गाड़कर उनके सीने पर शिवराय का ये भगवा ध्वज फहराएंगे। इतनी ताकत हमारी कलाई में है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि, “बीते 75 सालों में ऐसा कभी भी नहीं घटित हुआ, ऐसा कहते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि कांग्रेस का विभाजन हुआ था, तो उस समय कांग्रेस का चिह्न फ्रिज किया गया था। दूसरे गुट को नहीं दिया गया था। समाजवादी पार्टी के समय भी सामने से दावा किया गया, इसलिए चिह्न बचा रह गया। जयललिता और जानकी रामचंद्रन के बीच विवाद सुलझने के बाद वो सिंबल उन्हें मिला, लेकिन जब-जब ऐसा विवाद हुआ, उस समय एक गुट को मूल सिंबल और नाम नहीं दिया। वो प्रधानमंत्री के गुलाम आयुक्त ने अभी दिया|
मर्द हो तो आओ सामने!
उद्धव ठाकरे ने ‘शिंदे’ गुट को तो सीधी चुनौती दे दी। उन्होंने कहा कि जिन्होंने धनुष-बाण चुराया वे यदि मर्द होंगे तो चोरी का धनुष-बाण लेकर चुनाव में आओ, मैं मशाल लेकर आपके सामने खड़ा होता हूं। फिर देखते हैं क्या होता है! धनुष और बाण चलाने के लिए भी मर्द की जरूरत होती है। रावण ने शिवधनुष को उठाने की कोशिश की थी, लेकिन वो गिर गया। वैसे ही ये चोर और चोर बाजार के मालिक औंधे मुंह गिरे सिवा नहीं रहेंगे।
हाथ में धनुष-बाण, गले में ‘मैं चोर हूं’ वाली पाटी
कल जिनके हाथ में धनुष-बाण था, उनके गले में ‘मैं चोर हूं’ वाली पाटी लगी है, ऐसा चेहरा दिख रहा था, ऐसा जोरदार हमला करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि तुमने युवा खून में आग लगा दिया है। शिवसेना का धैर्य आपने देखा है, लेकिन शिवसेना का गुस्सा नहीं देखा। चोरों इस चोरी को हजम नहीं कर पाओगे। आज से ही चुनाव की तैयारी में लगो|
शिवसेना को समाप्त करना संभव नहीं
उन्होंने कहा कि, “ प्रधानमंत्री और भाजपा को लग रहा होगा कि उनकी गुलाम बनी संस्थाओं को ऊपर छोड़कर कदाचित अन्य पक्षों को खत्म किया जा सकता है। लेकिन आपकी कितनी भी पीढ़ियां क्यों न उतर जाएं फिर भी शिवसेना को खत्म करना संभव नहीं है। चुनाव आयुक्त ने गुलामी की है। कदाचित वे सेवानिवृत्ति के बाद राज्यपाल बन सकते हैं। क्योंकि अभी-अभी एक न्यायाधीश राज्यपाल बने हैं। ऐसे तमाम गुलामों को आसपास रखा है। उन्हें मैं चुनौती दे रहा हूं कि शिवसेना किसकी, ये आपके मालिकों की नहीं, बल्कि महाराष्ट्र के मालिकों को तय करने का अब समय आ गया|
शिवसेना का परिवार नहीं चाहिए
धनुष-बाण किसका? ये जनता को तय करने दें। शिवसेना किसकी है, यह किसी से भी पूछें। लेकिन उनकी एक चाल जारी है। उन्हें ठाकरे नाम चाहिए। बालासाहेब का चेहरा चाहिए, लेकिन शिवसेना का परिवार नहीं चाहिए। हम पर मोदी का नाम लेकर वोट लेंगे, ऐसा आरोप लगा रहे थे। उस समय हमारी युति थी। तब लोग मोदी का मुखौटा पहनकर सभा में आते थे। अब मोदी को बालासाहेब का मुखौटा पहनकर महाराष्ट्र आना पड़ता है। यह शिवसेना की और बालासाहेब की ताकत है|
वे कदाचित मशाल भी ले लेंगे
उद्धव ठाकरे ने कहा ,''जिस तरह से हमारी शिवसेना का नाम एक चोर को दे दिया गया, हमारे पवित्र धनुष-बाण को एक चोर को दे दिया गया, जिस तरह से कपट-साजिश से ये राजनीति कर रहे हैं, उस तरह से कदाचित वे इस मशाल के चिह्न को भी निकाल सकते हैं। लेकिन अब चोरों और उनके मालिकों को गाड़े बिना शांत नहीं बैठना है। धनुष-बाण चुराया, उसे पता नहीं कि उन्होंने मधुमक्खी के छत्ते पर पत्थर मारा है। उन्होंने अब तक मधु चखा है, परंतु अभी तक उन्हें डंक नहीं लगा है। अब डंक मारने का समय आ गया है|