पटना: पटना की घटना जहां उन्होंने एक स्कूली छात्रा के सैनिटरी नैपकिन के सवाल पर उससे पूछा कि क्या "उसे भी कंडोम चाहिए" पर IAS अधिकारी हरजोत कौर बमराह ने कहा,''अगर मेरी बातों से किसी लड़की की भावनाओं को ठेस पहुंची हो तो मैं खेद प्रकट करती हूं। मेरा इरादा किसी को अपमानित करने का नहीं था बल्कि उन्हें आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना था।|
दरअसल, ‘सशक्त बेटी, समृद्ध बिहार: टुवर्ड्स एन्हान्सिंग द वैल्यू ऑफ गर्ल चाइल्ड’ विषय पर आयोजित कार्यक्रम में स्कूल की छात्राओं ने महिला विकास प्रबंध निदेशक से मुफ्त में सैनिटरी पैड उपलब्ध कराने की बात कही, इस पर छात्रा को जवाब देते हुए IAS अधिकारी हरजोत कौर ने कहा कि, “आज आप सैनिटरी पैड मांग रही हो, कल आप कंडोम मांगोगी”
बिहार महिला एवं बाल विकास निगम अध्यक्ष-सह-प्रबंधक निदेशक हरजोत कौर बमराह ने गुरुवार को अपनी टिप्पणी के लिए आधिकारिक माफी जारी की। उन्होंने कहा कि अगर मेरे शब्दों से किसी लड़की की भावनाओं को ठेस पहुंची है तो मैं खेद व्यक्त करती हूं। मेरा इरादा किसी को नीचा दिखाने या किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का नहीं था|
27 सितम्बर, 2022 को Unicef, save the children तथा Plan International द्वारा “सशक्त बेटी समृद्ध बिहार" पर विभिन्न हितधारकों के साथ एक राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गयी थी। कार्यशाला का उद्घाटन विकास आयुक्त, विवेक कुमार सिंह के द्वारा किया गया। कार्यशाला में प्रेम सिंह मीणा, सचिव, समाज कल्याण विभाग, हरजोत कौर बमराह्, अध्यक्ष-सह-प्रबंधक निदेशक, महिला एवं बाल विकास निगम, बिहार, यूनिसेफ के बिहार की प्रमुख नफीसा इत्यादि उपस्थित थीं। इस कार्यशाला में बिहार में बालिकाओं की वर्तमान स्थिति एवं बालिकाओं के लिए उपलब्ध अवसर, उनके जीवन में आने वाली कठिनाईयों एवं उनका क्या समाधान हो सकता है, इस पर विस्तृत चर्चा की गई।
बिहार सरकार द्वारा बालिकाओं के लिए एवं महिला सशक्तिकरण के लिए विभिन्न विभागों के माध्यम से किये जा रहे कार्यों के बारे में भी सभी प्रतिभागियों को बताया गया। कन्या उत्थान योजना के तहत बालिकाओं के जन्म से लेकर उनके सुपोषण एवं उनकी प्रारंभिक शिक्षा तथा उच्च शिक्षा तक के लिए प्रोत्साहन राशि सरकार द्वारा दी जाती है। शिक्षा के क्षेत्र में बालिकाओं को आगे लाने के लिए लगभग 14 वर्षों से साईकिल योजना प्रारंभ की गई ताकि दूरी के कारण बालिकाओं को विद्यालय जाने में कोई कठिनाई न हो।
वर्ष 2016 से सेनेटरी पैड के लिए 300 रूपये की राशि भी उपलब्ध करायी जाती है ताकि माहवारी के स्वच्छ प्रबंधन में बालिकाओं को सहायता मिल सके। महिला बाल विकास निगम द्वारा माहवारी प्रबंधन एवं स्वच्छता कार्यक्रम के तहत उच्च एवं माध्यमिक विद्यालयों में सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीन एवं सेनेटरी पैड के निस्तारण के लिए भी मशीन दिये जाने का निर्णय लिया गया है, जिसका क्रियान्वयन शीघ्र ही किया जा रहा है। विद्यालयों में बालिकाओं के लिये अलग शौचालय की व्यवस्था की गई है।
किशोरियों/किशोरों के समग्र विकास एवं लैंगिक समानता हेतु 'उड़ान' परियोजना को भी सभी जिलों में चलाने एवं प्रत्येक पंचायत में एक पंचायत किशोरी समन्वयक रहने की योजना स्वीकृति की प्रक्रिया में है। किशोरियों एवं महिलाओं के विरूद्ध होने वाली हिंसा को रोकने एवं सखी सेन्टर के बेहतर क्रियान्वयन हेतु राज्य के सभी जिलों में जिला संरक्षण पदाधिकारी के पद सृजन की प्रक्रिया भी जारी है। माहवारी एवं स्वच्छता प्रबंधन में अच्छा कार्य करने वाली 34 महिला शिक्षकों को भी 08 जुलाई, 2022 को विकास आयुक्त, बिहार के द्वारा लैपटॉप देते हुए पुरस्कृत किया गया था।
इन सभी बिन्दुओं पर चर्चा के उपरान्त पैनल परिचर्चा प्रारंभ हुई, जिस क्रम में प्रतिभागी बालिकाओं के द्वारा सरकार द्वारा दी जाने वाली सुविधाओं के बारे में कई जानकारियों माँगी गई। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य बालिकाओं को सशक्त करना था ताकि न केवल सरकार बल्कि परिवार और समाज की निर्भरता से भी आगे बढ़कर वे स्वतंत्र रूप से अपना जीवनयापन का निर्णय ले सकें।
प्रतिभागियों द्वारा कई विद्यालयों में कमियों के बारे में बताया गया, जिसके संबंध में अलग से शिक्षा विभाग कार्रवाई कर रही है। इसी परिचर्चा के क्रम में मेरे द्वारा कहे गए कुछ शब्दों एवं वाक्यांशों को आपत्तिजनक मानते हुए कई समाचारों में प्रकाशित किया गया है। इस पूरे कार्यशाला का उद्देश्य उनकी निर्भरता की बेड़ी को तोड़कर स्वतंत्र रूप से जीने के लिए प्रोत्साहित करना था और उनमें आत्मविश्वास जगाना था।
IAS अधिकारी हरजोत कौर ने कहा कि, “दिनांक 27.09.2022 को सशक्त बेटी, समृद्ध बिहार विषय पर आयोजित कार्यशाला में मरे द्वारा कही गई बातों को यदि पूर्ण रूप से सुना जाए, तो यह स्पष्ट होगा कि मैं बेटियों को आत्म-निर्भरता की ओर प्रेरित करना चाह रही थी।
हरजोत कौर ने कहा कि,पितृसत्तात्मक समाज द्वारा लड़कियो को दूसरे पर जीवन भर अपने जरूरतों के लिए आश्रित रहना सिखाया जाता है। साथ ही लड़का-लड़की की परवरिश में भेद-भाव कर लड़की को अपने को अबला, निस्सहाय मानना भी सीखा दिया जाता है। घर के बाहर की दुनिया में वह सुरक्षित नहीं है, यह बात भी दिमाग में डाल दी जाती है, जिस कारण कई बार वह स्वयं ही इन मानसिक जंजीरों में जकड़ कर अपने विकास के रास्ते को सुविधा होते हुए भी नहीं चुनती
कौर ने कहा कि,''इस क्रम में कही गई कुछ शब्दों के कारण अगर किसी बालिका या प्रतिभागी की भावनाओं को ठेस पहुँची है तो इसके लिए मैं हरजोत कौर बमराह्, अध्यक्ष-सह-प्रबंधक निदेशक खेद व्यक्त करती हूँ। इसका उद्देश्य किसी को नीचा दिखाने या किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाने का नहीं था बल्कि उन्हें आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना था।
गौरतलब है कि, बिहार महिला एवं बाल विकास निगम ने ‘सशक्त बेटी, समृद्ध बिहार: टुवर्ड्स एन्हान्सिंग द वैल्यू ऑफ गर्ल चाइल्ड’ विषय पर एक वर्कशॉप का आयोजन किया था... उस दौरान एक स्कूली छात्रा ने सवाल किया, “सरकार बहुत सारा मुफ्त सामान दे रही है| क्या हमें 20-30 रुपये के सैनिटरी पैड नहीं दे सकती है?”
लड़की के सवाल का जवाब देते हुए आईएएस अधिकारी हरजोत कौर ने कहा कि “क्या मांगों का कोई अंत है? कल आप कहेंगे कि सरकार जींस और खूबसूरत जूते दे सकती है| जब परिवार नियोजन की बात आती है, तो आपको मुफ्त कंडोम भी चाहिए....” हरजोत कौर ने कहा, “आपको सरकार से चीजें लेने की आवश्यकता क्यों है? यह सोच गलत है|”
छात्राओं ने उनके सवालों का खंडन करते हुए कहा कि चुनाव के दौरान सरकार बहुत कुछ करने का वादा करती है\ इसके जवाब में हरजोत कौर ने कहा कि “वोट मत दो.... बन जाओ पाकिस्तान|”
मैं खरीद सकती हूं लेकिन कई झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले सैनिटरी पैड खरीद नहीं सकते हैं
IAS अधिकारी से सवाल पूछने वाली रिया कुमारी ने आज 29 सितंबर, 2022 को कहा कि “मेरा सवाल (सैनिटरी पैड पर) गलत नहीं था। वे बड़ी चीज नहीं हैं, मैं खरीद सकती हूं लेकिन कई झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले उसे खरीद नहीं सकते हैं। मैंने सिर्फ अपने लिए ही नहीं बल्कि सभी लड़कियों के लिए सवाल पूछा। हम वहां अपनी बात रखने गए थे|