प्रयागराज: कोरोना की दूसरी लहर ने उत्तर प्रदेश में हाहाकार मचा दिया है| कोरोना महामारी के बीच गंगा में लगातार मिल रहे शवों की खबर ने लोगों को झकझोर कर रख दिया था| संगम नगरी प्रयागराज में तो हालात ये हैं कि गंगा किनारे ही रेत पर दर्जनों शवों को दफनाया गया था| अब एक बार फिर प्रयागराज में गंगा किनारे दफनाए गए शव एक बार फिर से चर्चा में हैं| नगर निगमकर्मी गंगा किनारे दफनाए गए इन शवों के ऊपर पड़ी रामनामी चादर और उनके आसपास लगाई गईं लकड़ियां को हटा रहे हैं। रोंगटे हिला देने वाली तस्वीर और वीडियो वायरल हो रहे हैं| सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो हैं।
गंगा किनारे ही रेत पर दर्जनों शवों को दफनाया गया था| लेकिन जब यहां पर दफनाए गए शवों पर से रेत हटी और फिर शव बाहर दिखने लगे, तो नगर निगम के कर्मचारी इन शवों पर लगे लाल-पीले कफन को खींचते हुए दिखाई दे रहे हैं| इन वायरल वीडियों में नदी किनारे दफनाए गए शवों पर बीछी पीली और गेरुआ चादरें सफेद रेत पर उभरकर दिख रही हैं|
गंगा किनारे रेत में दफन शवों से 'रामनामी' चादर हटाने पर कांग्रेस ने योगी सरकार पर निशाना साधा है| कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने वीडियो ट्वीट करते हुए लिखा है, 'कितनों को जीते जी ढंग से इलाज नहीं मिला। कितनों को सम्मान से अंतिम संस्कार नहीं मिला। कितनों को सरकारी आंकड़ों में जगह नहीं मिली। अब कब्रों से उनकी रामनामी भी छीनी जा रही है।
प्रियंका गांधी ने आगे लिखा, ''अपनी छवि चमकाने की चिंता में दुबली होती सरकार पाप करने पर उतारू है। ये कौन सा सफाई अभियान है?
ये अनादर है-मृतक का, धर्म का, मानवता का
कांग्रेस नेता डॉली शर्मा ने ट्वीट कर लिखा, "आखिर यह कैसी 'योगी' सरकार? श्रृंग्वेरपुर गंगा घाट पर प्रशासनिक कृत्य दर्शाता है कि सफाई के नाम पर शवों का अपमान तथा योगी सरकार की नाकामियों पर पर्दा डालने की कोशिश की जा रही है। यह धार्मिक आस्था के साथ खिलवाड़ है। 'योगी' जी माफी मांगनी चाहिए!
कांग्रेस नेता वीरेंद्र चौधरी ने ट्वीट कर लिखा,'''ख़ुद की इमेज बचाने के लिए योगी सरकार किसी भी हद तक जा सकती है| ऐसे कामों के अलावा और कोई उम्मीद नही की जा सकती| समंदर किनारे का कचरा दिख गया था, गंगा किनारे पड़ी ला’शे नहीं दिखतीं ?
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने कहा है कि,''लाशें गिनी न जा सके इसलिए दफ़न लाशों से कफ़न तक उतारे जा रहे हैं। योगी सरकार इंसान की कीमत एक आंकड़े जितनी भी नहीं समझती। लानत है योगी सरकार, मुर्दे से कफ़न तो दुश्मन भी नहीं छीनते। आप पर तो जनता ने भरोसा किया था।
कांग्रेस नेता आराधना मिश्रा ने कहा,''यह सरकार पहले तो मृतकों का अंतिम संस्कार तक नहीं करा पाई। बाद में मानवता शर्मसार करने वाली दुखद तस्वीरें सामने आईं जहां पेट्रोल और टायर रख कर शव जला दिए गए। और अब लाशों से कफन उतरवा दिए गए। अब तो रहम करो सरकार, मानवता और कितना शर्मसार होगी !
फाफामऊ और श्रृंग्वेरपुर घाट पर गंगा किनारे रेत में शव दफन कर उसके ऊपर रखी गई लाल-पीली चुनरी सोमवार को हटवा दी गई। अफसरों की मौजदूगी में सफाईकर्मियों को तैनात कर पूरे घाट से चुनरी हटवाई गई। शव दफन करने के बाद पहचान के लिए किनारे लकड़ी गाड़ दी गई थी। इसे भी हटवा दिया गया है।
चर्चा है कि कैमरे से बचने के लिए रविवार की रात एक जिम्मेदार अफसर ने कुछ अफसरों के साथ फाफामऊ और श्रृंग्वेरपुर घाट का निरीक्षण किया था। अफसर ने पहले फाफामऊ पुल से घाट देखा फिर दल-बल के साथ घाट पर भी गए। कहा जा रहा है कि इसी अफसर के निर्देश पर ही सोमवार की सुबह फाफामऊ और श्रृंग्वेरपुर घाट की सफाई करवा कर चुनरी हटवाई गई। ऐसा इसलिए किया गया ताकि दफन शव नजर ना आये| दरअसल, सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों में चुनरी और लकड़ी से ही इस बात की पहचान हो रही थी कि शव दफन किए गए हैं।नगर निगम के जोनल अधिकारी नीरज सिंह की देखरेख में फाफामऊ घाट पर 100 से अधिक सफाईकर्मी लगाए गए थे। सफाई के वक्त नगर निगम निगरानी समिति के सदस्य मुकुंद तिवारी, कमलेश तिवारी भी मौजूद थे। उधर, श्रृंग्वेरपुर घाट पर सोमवार को कुत्ता और सुअर पकड़ने के लिए टीम लगाई गई थी। दो कुत्तों को पकड़कर जंगल में छोड़ा गया।