रतलाम: तेजी से बढ़ रहे कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों के बीच संक्रमितों के इलाज में शामिल रेमडेसिविर इंजेक्शन की इन दिनों मांग बढ़ गयी है| ऐसे में रेमडेसिविर की कालाबाजारी करने वाले ग्रुप भी सक्रिय हो गए है| मध्य प्रदेश के रतलाम में ऐसे ही एक गिरोह का पुलिस भंडाफोड़ किया है| गिरोह इंजेक्शन की खाली बोतल में नमक और किसी दूसरे इंजेक्शन का पावडर भर कर बेच रहे थे|
मध्य प्रदेश के रतलाम में नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन बनाकर बेचने वाले 7 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार किए गए इन आरोपियों में दो मेडिकल के छात्र, एक नर्स तथा सिविल हॉस्पिटल का एक कर्मचारी भी शामिल है| पुलिस ने बताया, "सूचना मिली थी कि कुछ लोग रेमडेसिविर की कालाबाजारी कर रहे हैं, मामले में पहले 2 लोगों को गिरफ्तार किया गया था, पूछताछ में उन्होंने बाकी लोगों का नाम बताया।"
इस पूरे रैकेट का सुराग शनिवार रात उस समय चला था जब पुलिस ने रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी मामले में जीवांश हॉस्पिटल पर दबिश दी थी| उस दौरान दो डॉक्टर 30 से 35 हजार में रेमडेसिविर बेचते पकडे गए थे|
पूछताछ में इन्होंने तीसरे आरोपी का नाम बताया|उसके बाद पुलिस ने उसे मंदसौर से सोमवार को गिरफ्तार किया| जब पुलिस ने सभी कड़ियों को जोड़ा तो इसके तार मेडिकल कॉलेज की नर्स रीना प्रजापत से जुड़ गए| ये नर्स आईसीयू से रेमडेसिविर इंजेक्शन की खाली बोतल और उसकी पैकिंग की उठा लाती थी और फिर गिरोह को सप्लाई कर देती थी| पुलिस ने दो मेडिकल के छात्र, निजी अस्पताल के दो डॉक्टरों सहित कुल 7 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है| इन सभी पर जीवनरक्षक इंजेक्शन के नाम पर नकली माल बेचने के आरोप में रासुका लगाने की तैयारी है|