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24 अगस्त 2026

गुजरात: चंद्रयान-3 के लैंडर की डिज़ाइन करने का दावा करने वाला मितुल त्रिवेदी गिरफ्तार, खुद को बताता था इसरो का वैज्ञानिक

सूरत (गुजरात): 29 अगस्त को सूरत पुलिस की अपराध शाखा ने एक व्यक्ति को पकड़ा, जिसकी पहचान मितुल त्रिवेदी के रूप में हुई, जिसने इसरो (Indian Space Research Organisation) में वैज्ञानिक होने का झूठा दावा…

गुजरात: चंद्रयान-3 के लैंडर की डिज़ाइन करने का दावा करने वाला मितुल त्रिवेदी गिरफ्तार, खुद को बताता था इसरो का वैज्ञानिक
गुजरात: चंद्रयान-3 के लैंडर की डिज़ाइन करने का दावा करने वाला मितुल त्रिवेदी गिरफ्तार, खुद को बताता था इसरो का वैज्ञानिक | फ़ोटो: TVL News

सूरत (गुजरात): 29 अगस्त को सूरत पुलिस की अपराध शाखा ने एक व्यक्ति को पकड़ा, जिसकी पहचान मितुल त्रिवेदी के रूप में हुई, जिसने इसरो (Indian Space Research Organisation) में वैज्ञानिक होने का झूठा दावा किया और उसके लिए जाली दस्तावेज़ भी बनाए। पुलिस का कहना है कि उसने अपराध कबूल कर लिया है।



चंद्रयान 3 के चांद पर लैंड करने से पहले और बाद में में खुद को इसरो में वैज्ञानिक होने का दावा करने वाले मितुल त्रिवेदी ने एक इंटरव्यू में कहा था कि,'' उन्होंने ही चंद्रायान 3 की डिज़ाइन तैयार की थी। त्रिवेदी ने पीएम नरेंद्र मोदी के संपर्क में होने तक की बात कही थी|



पुलिस अधिकारी ने कहा कि आरोपी मितुल त्रिवेदी के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई थी, जब उसने 23 अगस्त को चंद्रयान 3 के लैंडर 'विक्रम' के सफलतापूर्वक सॉफ्ट-लैंडिंग करने के बाद एक इंटरव्यू देते हुए देखा गया था, जिसमें उसने चंद्रयान -3 के लैंडर मॉड्यूल को डिजाइन करने का दावा किया था।


अधिकारी ने कहा कि त्रिवेदी ने कथित तौर पर खुद को इसरो के "प्राचीन विज्ञान अनुप्रयोग विभाग" के "सहायक अध्यक्ष" के रूप में पेश किया और उसने 26 फरवरी, 2022 का एक फर्जी नियुक्ति पत्र भी पेश किया।



इसके बाद क्राइम ब्रांच ने इसरो से संपर्क किया था। इसरो ने कहा है कि एक पत्र पर जो दस्तखत किए गए हैं। वे गलत हैं। इसके बाद क्राइम ब्रांच ने कथित वैज्ञानिक को हिरासत में लिया है।



पुलिस ने एक बयान में कहा, "गहन जांच से पता चला कि वह व्यक्ति किसी भी तरह से इसरो के चंद्रयान -3 मिशन से जुड़ा नहीं था और उसने इसरो कर्मचारी होने का झूठा दावा किया था।"


पुलिस ने बयान में कहा,''त्रिवेदी ने इसरो की अगली परियोजना "अंतरिक्ष में पारा बल" के लिए "अंतरिक्ष अनुसंधान सदस्य" होने के बारे में एक फर्जी पत्र भी तैयार किया।महत्वाकांक्षी परियोजना में योगदान न देने के बावजूद उन्होंने इसरो के संबंध में फर्जी संदेश फैलाए, जिससे संस्थान की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा।''


सूरत शहर अपराध शाखा ने आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 419 (प्रतिरूपण द्वारा धोखाधड़ी), 465 (जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी), और 471 (जाली दस्तावेज को असली के रूप में उपयोग करना) के तहत प्राथमिकी दर्ज की।  आगे की जांच एसओजी पुलिस को सौंपी गई है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार मितुल त्रिवेदी एमकॉम तक पढ़ाई का दावा किया है लेकिन इस संबंध में भी डिग्री की जांच की जाएगी।




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