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25 अगस्त 2026

बड़े पर्दे पर इतिहास को हिलाएगी “अनटोल्ड ट्रुथ ऑफ़ सुभाष चंद्र बोस”

मुंबई : आधुनिक भारत के इतिहास में कुछ व्यक्तित्व ऐसे हैं, जिनकी गाथा केवल किताबों तक सीमित नहीं रह सकती। वे समय, सत्ता और सोच को चुनौती देते हैं। ऐसे ही अदम्य साहस, क्रांतिकारी विचार और राष्ट्रभक्ति…

बड़े पर्दे पर इतिहास को हिलाएगी “अनटोल्ड ट्रुथ ऑफ़ सुभाष चंद्र बोस”
बड़े पर्दे पर इतिहास को हिलाएगी “अनटोल्ड ट्रुथ ऑफ़ सुभाष चंद्र बोस” | फ़ोटो: TVL News
मुंबई : आधुनिक भारत के इतिहास में कुछ व्यक्तित्व ऐसे हैं, जिनकी गाथा केवल किताबों तक सीमित नहीं रह सकती। वे समय, सत्ता और सोच को चुनौती देते हैं। ऐसे ही अदम्य साहस, क्रांतिकारी विचार और राष्ट्रभक्ति के सर्वोच्च प्रतीक थे नेताजी सुभाष चंद्र बोस। उनके 129वें जन्मोत्सव, 23 जनवरी 2026 के पावन अवसर पर, एक ऐसी ऐतिहासिक सिनेमाई घोषणा हुई है, जो न केवल इतिहास के स्थापित अध्यायों को प्रश्नांकित करती है, बल्कि दशकों से दबाई गई सच्चाइयों को उजागर करने का साहस भी रखती है।

प्रख्यात लेखक, वरिष्ठ पत्रकार एवं निर्माता मान सिंह दीप ने अत्यंत गर्व और राष्ट्रभाव के साथ अपनी बहुप्रतीक्षित फिल्म “अनटोल्ड ट्रुथ ऑफ़ सुभाष चंद्र बोस” के निर्माण की औपचारिक घोषणा की है। यह फिल्म महज़ एक बायोपिक नहीं, बल्कि एक वैचारिक आंदोलन है। ऐसा आंदोलन जो आज़ादी की लड़ाई को एक नए दृष्टिकोण से देखने के लिए मजबूर करता है।
गहन ऐतिहासिक शोध, अंतरराष्ट्रीय दस्तावेज़ों और अब तक सामने न आए साक्ष्यों के आधार पर निर्मित यह फिल्म उन पन्नों को खोलने का दावा करती है, जिन्हें जानबूझकर इतिहास की धूल में छिपा दिया गया। फिल्म यह प्रश्न उठाती है कि क्या भारत की स्वतंत्रता की निर्णायक लड़ाई केवल अहिंसा तक सीमित थी, या फिर नेताजी सुभाष चंद्र बोस और आज़ाद हिंद फ़ौज की भूमिका को सुनियोजित ढंग से हाशिए पर डाल दिया गया।

इस महत्वाकांक्षी परियोजना का निर्माण कल्याणी सिंह और वेदांत सिंह कर रहे हैं, जबकि निर्देशन की कमान संभाल रहे हैं अनुभवी फिल्मकार अशोक त्यागी। फिल्म यह दिखाने का प्रयास करेगी कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद उभरी वैश्विक सत्ता-राजनीति किस तरह नेताजी के विचारों से भयभीत थी, और कैसे एक गहरी साजिश के तहत उनकी नृशंस हत्या को दुर्घटना और रहस्य के आवरण में छुपा दिया गया।

“अनटोल्ड ट्रुथ ऑफ़ सुभाष चंद्र बोस” केवल अतीत की पड़ताल नहीं करती, बल्कि वर्तमान और भविष्य से भी संवाद करती है। यह फिल्म दर्शकों को राष्ट्रवाद, बलिदान और सच्ची स्वतंत्रता के मायने पर पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित करेगी। आने वाली पीढ़ियों के लिए यह फिल्म नेताजी के विचारों, संघर्ष और अमर साहस को एक नई चेतना और गर्व के साथ प्रस्तुत करने का सशक्त माध्यम बनने जा रही है। यह सिर्फ़ एक फिल्म नहीं। यह इतिहास से टकराने का साहस है।

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