भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा हटाने पर हुए बवाल में पूर्व प्रधान व प्रधान के पति के बाद पुलिस ने एक और आरोपित को गिरफ्तार कर लिया।
तीनों को बुधवार को जेल भेज दिया। दो मुकदमों में नामजद 30 से अधिक आरोपितों की तलाश में पुलिस की पांच टीमें लगी हैं।
सीसीटीवी कैमरों की फुटेज के आधार पर पथराव में शामिल अन्य आरोपितों को चिह्नित किया जा रहा है।
गांव में तनाव है। पुलिस बल तैनात है। अधिकारियों ने गांव में डेरा डाल लिया है। तीन दिन पहले गांव इब्राहिमपुर (भीमपुर) में ग्राम समाज की जमीन पर बघेल समाज के लोग मंदिर बनाने के लिए बाउंड्री का निर्माण करा रहे थे।
अनुसूचित जाति के लोगों की शिकायत पर अधिकारियों ने निर्माण रुकवा दिया। 26 जनवरी की रात में अनुसूचित जाति के लोगों ने खाली पड़ी दूसरी जगह पर डा. आंबेडकर की प्रतिमा लगा दी।
पुलिस प्रशासन ने समझाने का प्रयास किया तो लोग प्रतिमा के पास ही बैठ गए। नारेबाजी व प्रदर्शन किया गया।
बिना अनुमति प्रतिमा लगाने पर लेखपाल दीपिका वार्ष्णेय ने 14 नामजद व 150-200 अज्ञात के विरुद्ध मुकदमा पंजीकृत करा दिया।
मंगलवार को पूर्व प्रधान छत्रपाल, मौजूदा प्रधान आशा लोधी के पति व बसपा नेता निर्देश लोधी को गिरफ्तार कर लिया। इसके बावजूद लोग नहीं हटे।
शाम को पुलिस द्वारा प्रतिमा उठाते ही बवाल हो गया। लोगों ने पुलिस पर पथराव व फायरिंग कर दी। सीओ की गाड़ी व आम लोगों के कई वाहनों में तोड़फोड़ की।
छह वाहन फूंक दिए। पथराव में दो दारोगाओं समेत कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर हालात संभाले। इसके बाद से गांव में सुरक्षा बढ़ा दी गई।
आरोपितों की तलाश में पुलिस ने रातभर दबिश दी। बुधवार को सुबह से ही एसडीएम कोल दिग्विजय सिंह, सीओ अभय कुमार पांडेय पुलिस बल के साथ गांव में पहुंचे और भ्रमण किया। इस दौरान राजनीतिक दलों के नेताओं का आना-जाना लगा रहा।
एसपी सिटी मृगांक शेखर पाठक ने बताया कि छत्रपाल, निर्देश के अलावा शाहपुर कुतुब के धर्मेंद्र को जेल भेज दिया गया है।
वह शाहपुर कुतुब के प्रधान अरुण कुमार का भाई है। अन्य आरोपितों की तलाश की जा रही है। इंटरनेट मीडिया पर भी नजर रखी जा रही है।