मास्को:भारत और चीन के बीच सीमा पर जारी तनाव के बीच पहली बार रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और चीनी समकक्ष जनरल वेई फेंगही के बीच शुक्रवार को रूस के मॉस्को शहर में मुलाकात हुई| रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मॉस्को में चीन के रक्षा मंत्री से मुलाकात की। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और चीन के रक्षा मंत्री वेई फेंगही के बीच वार्ता समाप्त हो गई है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि,'' मास्को में चीनी रक्षा मंत्री जनरल वेई फेंगही के साथ मुलाकात की। राजनाथ सिंह रूस के रक्षा मंत्री जनरल सर्गेई शोइगू के निमंत्रण पर 3 से 5 सितंबर तक मास्को की आधिकारिक यात्रा पर हैं।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और चीन के रक्षा मंत्री वेई फेंगही के बीच वार्ता समाप्त हो गई है। यह वार्ता 2 घंटे 20 मिनट तक चली। रूस की राजधानी मास्को में एक प्रमुख होटल में रात साढ़े नौ बजे (भारतीय समयानुसार) वार्ता शुरू हुई थी। भारतीय प्रतिनिधिमंडल में रक्षा सचिव अजय कुमार और रूस में भारत के राजदूत डी बी वेंकटेश वर्मा भी हैं।
राजनाथ सिंह और वेई शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के रक्षा मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने के लिए मास्को में हैं। एससीओ की बैठक दिन में आयोजित हुई थी।रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को यहां शंघाई सहयोग संगठन के एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सदस्य देशों का शांतिपूर्ण,स्थिर और सुरक्षित क्षेत्र को, जहां विश्व की 40 फीसदी आबादी रहती है, विश्वास और सहयोग के माहौल, गैर-आक्रामकता, अंतर्राष्ट्रीय नियमों और मानदंडों के प्रति सम्मान, एक-दूसरे के हितों के प्रति संवेदनशीलता और मतभेदों के शांतिपूर्ण समाधान की जरूरत है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मास्को में आज शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ), सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन (सीएसटीओ) और स्वतंत्र देशों के राष्ट्रमंडल (सीआईएस) के सदस्य देशों के रक्षा मंत्रियों की संयुक्त बैठक को संबोधित कर रहे थे। राजनाथ सिंह रूस के रक्षा मंत्री जनरल सर्गेई शोइगू के निमंत्रण पर 3 से 5 सितंबर तक मास्को की आधिकारिक यात्रा पर हैं। उन्होंने कहा कि यदि मैं प्रधानमंत्री के एक अलग संदर्भ में दिए विचार को अपनाऊंगा तो हमारा लक्ष्य 'क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास' होना चाहिए।
राजनाथ सिंह ने आज दुनिया के सामने मंडराते खतरों का उल्लेख करते हुए कहा कि हमें पारंपरिक और गैर-पारंपरिक दोनों तरह के खतरों खासकर आतंकवाद, मादक पदार्थों की तस्करी, पारगमन (सीमा के आरपार) अपराध से निपटने के लिए संस्थागत क्षमता की आवश्यकता है। जैसा कि आप सभी जानते हैं,भारत सभी रूपों और अभिव्यक्तियों में आतंकवाद की निंदा करता है, और इसके समर्थकों की भी निंदा करता है।
उन्होंने कहा कि भारत शंघाई सहयोग संगठन के क्षेत्रीय आतंकवाद विरोधी संरचना (आरएटीएस) के कामकाज को महत्व देता है। कट्टरपंथ और उग्रवाद के प्रसार को रोकने के लिए साइबर क्षेत्र में हाल में किए गए आरएटीएस के कामों की हमने सराहना की। सिंह ने कहा कि चरमपंथी प्रचार और डी-रेडिकलाइज़ेशन का मुकाबला करने के लिए एससीओ परिषद द्वारा आतंकवाद विरोधी उपायों को अपनाना एक महत्वपूर्ण निर्णय है।