बस्ती जिले के कुदरहा बाज़ार में आज जाम ने ऐसा तूफान मचाया कि सड़कों पर हाहाकार मच गया! चौराहे पर एक जिद्दी भारी-भरकम गाड़ी के अड़ने से शुरू हुआ ये तमाशा, देखते ही देखते पूरे बाज़ार को अपनी चपेट में ले लिया। सड़कें ठप, हॉर्न की कानफोड़ू सिम्फनी, और राहगीरों का गुस्सा सातवें आसमान पर! सबसे ज्यादा दुखद? एक एम्बुलेंस भी इस जाम के जाल में फंस गई, जिससे मरीजों की सांसें अटक गईं।
स्थानीय लोग तिलमिलाए हुए हैं, चीख-चीखकर कह रहे हैं, "अब तो हद हो गई!" रोज़-रोज़ का ये जाम का नाटक अब जानलेवा साबित हो रहा है। घंटों सड़क पर फंसे रहने से लोग पक चुके हैं, लेकिन प्रशासन? उसकी तो नींद ही नहीं टूट रही! बार-बार शिकायतें, गुहारें, अर्जियां—सब हवा में उड़ रही हैं। समाधान के नाम पर सिर्फ खामोशी और बेपरवाही!
राहगीरों का गुस्सा अब उबाल मार रहा है। उनकी एक ही पुकार— "कोई तो सुनो, साहब! इस जाम के आतंक से छुटकारा दिलाओ!" लेकिन चौंकाने वाली बात? इस बार तो पुलिस-प्रशासन भी कहीं नज़र नहीं आया। न कोई सिपाही, न कोई जिम्मेदार—बस जाम का जिद्दी राक्षस बाज़ार पर कब्ज़ा जमाए बैठा है।
आखिर कब तक कुदरहा बाज़ार इस जाम के जाल में फंसा रहेगा? कब तक राहगीरों को ये रोज़ का तमाशा झेलना पड़ेगा? क्या प्रशासन कभी इस कोहराम पर लगाम लगाएगा, या ये ड्रामा यूं ही चलता रहेगा? जनता सवालों के भंवर में फंसी है, और सड़कें अब भी ठसाठस!
रिपोर्ट:
वेदप्रकाश चौधरी*