बस्ती: बस्ती में जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी ने रुधौली से जिला पंचायत सदस्य संजय चौधरी को प्रत्याशी बनाया है. बुधवार रात इस आशय की चिट्ठी जारी हुई. प्रत्याशी बनाए जाने के बाद संजय ने सोशल मीडिया पर सभी नेताओं को धन्यवाद कहा है. उन्होंने लिखा - 'मैं भारतीय जनता पार्टी से बस्ती जिला पंचायत अध्यक्ष पद हेतु प्रत्याशी घोषित हुआ हूँ मैं अपने पार्टी के शीर्षनेतृत्व, प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह, सांसद हरीश द्विवेदी, समस्त सम्मानित विधायकगण, बस्ती चुनाव प्रभारी चिरंजीव चौरसिया, सभी प्रिय शुभचिंतक ,एवं सभी प्रिय सहयोगी का बहुत बहुत धन्यवाद एवं हृदय से आभार. मैं सदैव भारतीय जनता पार्टी के निर्देशो का निर्वहन करता रहूंगा
गौरतलब है कि आपके ने पहले ही यह सूचना के माध्यम से प्रेषित कर दी थी कि संजय ही भाजपा के उम्मीदवार होंगे. बता दें पिछले तीन दशक से भाजपा की राजनीति कर रहे संजय चौधरी के पास संगठन में काम करने का पुराना अनुभव रहा है.90 के दशक में पार्टी से जुड़े संजय चौधरी तीन बार जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष रह चुके है एक बार जिला सहकारी बैंक के डायरेक्टर पद पर रहने वाले संजय पर पार्टी ने सांगठनिक जिम्मेदारियां को बखूबी निभाया.
प्रान्तीय परिषद सदस्य रहे संजय चौधरी दो बार रूधौली विधानसभा से किस्मत आजमा चुके है.वर्तमान में गोरक्षप्रान्त के पिछड़ा वर्ग उपाध्यक्ष पद पर रहते हुए उन्हें जिला पंचायत अध्यक्ष पद का प्रबल दावेदार माना जा रहा है.किसान पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखने वाले संजय चौधरी की पहचान मृदुभाषी और सरल स्वभाव की मानी जाती है.पार्टी में तीन दशकों का सफर कर रहे संजय की उम्मीदवारी उन्हें राजनीतिक सफर में एक और कदम आगे की तरफ बढ़ा रही है|
बहरहाल यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जिला पंचायत के चुनाव में जिस प्रकार का संख्या बल का गणित है उसे भाजपा के दिग्गज नेता किस प्रकार अपने अनुकूल कर पाते हैं संजय|
पार्टी समर्थित सदस्यों का अंकगणित: जिला पंचायत का सदन 43 सदस्यों का है। अध्यक्ष पद की कुर्सी पर आसीन होने के लिए कम से कम 22 सदस्यों का समर्थन आवश्यक है। जबकि बीते दिनों हुए चुनाव में भाजपा के समर्थन से नौ, सपा के समर्थन से 16, कांग्रेस से एक, बसपा से छह, भासपा से दो, भीम आर्मी के समर्थन से एक जिला पंचायत सदस्य को ही जीत मिली है। वहीं, आठ सदस्य निर्दलीय हैं। जाहिर है आंकड़ों में बहुमत किसी के पास नहीं है।
रिपोर्ट- सोमनाथ सोनकर