पटना: कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि ,''बिहार के तीसरे चरण का चुनाव-प्रचार सम्पन्न हो गया है| 7 तारीख़ को बिहार के तीसरे चरण के जागरूक व बहादुर मतदाता, तरक़्क़ी और विकास की एक नई बयार लिखने के लिए वोट डालेंगे! रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि,''तीसरे चरण का चुनाव प्रचार थमने के बाद महागठबंधन की जीत की सौंधी खुशबू आ रही है। इस खुशबू में उम्मीदें हैं युवाओं के रोजगार की, किसान के कर्ज माफी की, फसलों के दाम की, अपराध पर लगाम की, बेहतर शिक्षा व स्वास्थ्य की, नए उद्योग-धंधों की, प्रवासी मजदूरों के लिए आशा की एक नई किरण की!
कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि,'' नीतीश बाबू ने तो तीसरे चरण के चुनाव से पहले ही इस चुनाव को अपना ‘आखिरी चुनाव’ बता JDU-BJP की हार स्वीकार कर ली। पर जान लें कि JDU-BJP का ‘टायर्ड व रिटायर्ड नेतृत्व’, जिन्होंने अब रिटायरमेंट की घोषणा भी कर दी है, वो बिहार को हरा नहीं पाएंगे!
रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि,''आइए बिहार में युवाओं के रोजगार, किसानों का कर्ज माफ, बिजली बिल हाफ, बेटियों को मुफ्त शिक्षा का इंसाफ, शिक्षा-उद्योगों की तरक्की, पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक भाइयों और बिहार की तरक्की पक्की वाली महागठबंधन सरकार बनाएँ। बिहार को देश का अव्वल राज्य बनाएँ! सुरजेवाला ने कहा कि,''इतिहास साक्षी है कि बिहार ने हमेशा देश की राजनीति की ‘दशा और दिशा’ तय की है। बिहार का यह चुनाव भी भविष्य की राजनीति का भाग्य बदलने वाला है!
सुरजेवाला ने कहा कि,''नीतीश कुमार-नरेंद्र मोदी जी ने अपनी नाकामी पर पर्दा डालने के लिए चुनाव को जाति-धर्म में बांटने की कोशिश की...पाकिस्तान की शरण में भी चले गए वोटों के ध्रुवीकरण के लिए BJP ने ओवैसी जैसे अपने तोते को भी बँटवारे की स्क्रिप्ट देकर सीमांचल में उतारा मगर जनता ने BJP-JDU के तोते उड़ा दिए
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि,'बिहार की जनता ने 28 अक्टूबर और 3 नवंबर को बिहार का भविष्य सँवारने की दिशा में दो ठोस कदम बढ़ा दिए हैं। अब अंतिम और तीसरा क़दम महागठबंधन की प्रचंड बहुमत की जीत सुनिश्चित करेगा जो कि बिहार के उज्जवल भविष्य की गारंटी भी होगी और एक नया रास्ता भी!
सुरजेवाला ने कहा कि,महागठबंधन की जीत की खुशबू ने उड़ाए भाजपा-जदयू के ‘तोते’ नीतीश बाबू की ‘निराशा’ और महागठबंधन की ‘आशा’ है बड़े बदलाव का सूचक ‘‘टायर्ड व रिटायर्ड’’ नीतीश सरकार ने की रिटायरमेंट स्वीकार - अब आगे बढ़ेगा बिहार
सुरजेवाला ने कहा कि,''जब-जब मोदी जी को हार नजर आती है, तब-तब वो असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM को अपने झोले से वोटों के ध्रुवीकरण के लिए बाहर निकालते हैं- ताकि हिंदू-मुसलमान की सियासत में विकास और तरक्की की नाकामी छिप जाएं और सरकारों से सवाल न पूछे जाएं
-तेलंगाना की पार्टी जो 9 सीट पर चुनाव लड़ती है, बिहार के सीमांचल में 24 सीट पर किसकी मदद के लिए चुनाव लड़ रहे हैं? तेलंगाना में पुराने शहर के बाहर नहीं लड़ते, महाराष्ट्र-UP-झारखंड-बिहार प्रान्तों में आखिर क्यो चुनाव लड़ते है? BJP-असदुद्दीन ओवैसी के गठजोड़ की गाँठ खोलते है|
-तेलंगाना में ओवैसी का गठबंधन सत्ताधारी TRS से है। TRS मोदी समर्थक है। अर्थात TRS की पीठ पर सवार असदुद्दीन ओवैसी फिर क्या मोदी समर्थक नहीं? TRS CAA-NRC का कट्टर समर्थक है और मोदी के साथ खड़ा है। असदुद्दीन ओवैसी TRS के साथ है। परोक्ष रूप से यह भाजपा का समर्थन नहीं, तो क्या?
-बिहार में असदुद्दीन ओवैसी का BSP साथ गठबंधन है। BSP ने हाल में UP में BJP को समर्थन दिया। क्या ओवैसी की AIMIM परोक्ष रूप से BJP समर्थक नही? आंध्रप्रदेश में ओवैसी, जगनमोहन रेड्डी की YSRपार्टी के साथ है। जगनमोहन रेड्डी NDA का हिस्सा है। क्या ओवैसी परोक्ष रूप से BJP समर्थक नही?
-अपने संसदीय क्षेत्र हैदराबाद में जल भराव से मरने वाले लोगों की खैर खबर लेने की बजाय ओवैसी जी सीमांचल को बाढ़मुक्त करने के झूठे वादे कर वोट बटोरने में व्यस्त है। ‘फूट डालो-बंटवारा करो’ की BJP रणनीति ओवैसी जी अब सीमांचल में भी ले आए है। ऐसे लोग बिहार और सीमांचल का क्या करेंगे?
एक छोटा राजनैतिक दल मोदी जी के 2014 में सत्ता में आने के बाद यकायक किसके इशारों पर हैलीकॉप्टरों से प्रचार व बड़े शामियानों में जलसे करता है? ये साधन कहां से आ रहे है? कौन जुटा रहा है? क्या कारण है असदुद्दीन ओवैसी व उसकी पार्टी की ओर कभी ED-CBI-IT ने कभी मुंह उठाकर नहीं देखा?