पटना: लोकजनशक्ति पार्टी (LJP) में दो फाड होने के बाद LJP सांसद चिराग पासवान ने मंगलवार को खुला पत्र लिखकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर जमकर भड़ास निकाली है| चिराग पासवान ने मंगलवार को पत्र लिखकर एक ओर पार्टी में टूट का जेडीयू और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को जिम्मेदार बताया, वहीं, चाचा पशुपति पारस पर विश्वासघात करने का आरोप भी लगाया| साथ ही भाई प्रिंस राज पर भी हमला किया है। चिराग ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर अपना पत्र जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ साझा किया है|
उन्होंने अपने पत्र में कहा कि उनके पिता रामविलास पासवान ने कभी भी नीतीश कुमार से समझौता नहीं किया| उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नीतीश ने रामविलास पासवान को अपमानित करने और राजनीतिक तौर पर समाप्त करने के लिए कोई मौका नहीं छोड़ा| जेडीयू ने हमेशा से एलजेपी को तोड़ने का काम किया है|
चिराग ने अपने चार पन्नों के पत्र में कहा कि,''पिछले वर्ष 8 अक्टूबर 2020 को लोक जनशक्ति पार्टी के लिए अपूरणीय क्षति का दिन था जब हम सबने हमारे नेता, हमारे आदर्श आदरणीय श्री रामविलास पासवान जी को खोया था। वह एक ऐसा कठिन दौर था जब चुनाव सर पर थे, पर आप सबके आशीर्वाद से हम सबने मजबूती से चुनाव लड़ा और 25 लाख वोट पाकर पार्टी ने एक नई ऊंचाई हासिल की। 6 प्रतिशत का मत हम लोगों ने तब हासिल किया जब हम लोग 135 सीटों पर चुनाव लड़े। यदि बची हुई 100 से अधिक सीटों पर पार्टी चुनाव लड़ती तो यकीनन यह मत 10 प्रतिशत से अधिक होता।
चुनाव अकेले लड़ने का फैसला ना सिर्फ राजनीतिक बल्कि सैद्धांतिक तौर पर भी जरूरी था। जब एक तरफ गठबंधन में मात्र 15 सीटें पार्टी को लड़ने के लिए दी जा रही थी जो कहीं से भी तार्किक नहीं था तो वहीं दूसरी तरफ समझौता हमें एक ऐसे राजनीतिक दल से करना था जिनकी नीतियों का विरोध सदैव हमारे नेता आदरणीय श्री रामविलास पासवान जी ने किया था। जनता दल(यूनाइटेड) ने हमेशा लोक जनशक्ति पार्टी को तोड़ने का काम किया। 2005 फरवरी के चुनाव में हमारे 29 विधायकों को तोड़ा गया और साथ ही साथ हमारे बिहार प्रदेश के अध्यक्ष को भी तोड़ने का काम किया गया। 2005 नवंबर में हुए चुनाव में सभी हमारे जीते हुए विधायकों को तोड़ने का काम जनता दल(यूनाइटेड) द्वारा किया गया। उसके बाद 2020 में जीते हुए एक विधायक को भी तोड़ने का काम इनके द्वारा किया गया और आज लोक जनशक्ति पार्टी के 5 सदों को तोड़ जनता दल(यूनाइटेड) ने अपनी बांटो और शासन करो की रणनीति को दोहराया है।
हमारे नेता आदरणीय श्री रामविलास पासवान जी के जीवनकाल में कई बार श्री नीतीश जी द्वारा उनकी राजनीतिक हत्या का प्रयास किया गया, दलित व महादलित में बंटवारा करवाना उसी का एक उदाहरण है। हमारे नेता आदरणीय श्री रामविलास पासवान जी ने और मैंने दलित और महादलित समुदाय में कभी कोई अंतर नहीं समझा और सबको एकजुट कर अनुसूचित जाति के लोगों के लिए संघर्ष किया पर श्री नीतीश कुमार जी ने मुझे और मेरे पिता को अपमानित करने का और राजनीतिक तौर पर समाप्त करने का कोई मौका नहीं छोड़ा। इतना कुछ होने पर भी हमारे नेता आदरणीय रामविलास पासवान जी नहीं झुके।पापा ने कभी भी श्री नीतीश कुमार जी के साथ कोई समझौता नहीं किया।
2014 में हमारा गठबंधन भारतीय जनता पार्टी के साथ था तब श्री नीतीश कुमार जी मौजूदा प्रधानमंत्री आदरणीय श्री नरेन्द्र मोदी जी की प्रधानमंत्री पद की दावेदारी के मुद्दे पर एनडीए से अलग हुए थे। 2017 में जब श्री नीतीश कुमार जी वापस रातों रात एनडीए गठबंधन का हिस्सा बने तो इससे पापा काफी विचलित थे व श्री नीतीश कुमार जी के साथ काम करने में सहज नहीं थे। परन्तु प्रधानमंत्री आदरणीय श्री नरेन्द्र मोदी जी में विश्वास रखते हुए और गठबंधन की मर्यादा को निभाते हुए 2019 लोकसभा का चुनाव श्री नीतीश कुमार जी के साथ लड़ने का फैसला लिया गया। लोकसभा के चुनाव में हमारे 6 सांसदों को हराने में जनता दल(यूनाइटेड) के नेताओं ने कोई कसर नहीं छोड़ी।
पिताजी की तबियत खराब होने पर जहाँ एक तरफ देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और पक्ष-विपक्ष के तमाम नेता फोन कर हालचाल पूछ रहे थे तो वहीं श्री नीतीश कुमार जी का यह कहना कि उन्हें तबियत खराब है, मालूम ही नहीं है उनके अंहकार को दर्शाता है। विधानसभा चुनाव से पूर्व मीडिया को सम्बोधित करते हुए आईसीयू में भर्ती मेरे पिताजी के लिए यह कहना की “जाकर उनसे पूछिए क्या वह अपने दो विधायकों के समर्थन से राज्यसभा सांसद बने है" दुःखद था।
हमारे नेता को अपमानित करने की पराकाष्ठा तब हुई जब राज्यसभा नामांकन के दौरान श्री नीतीश कुमार जी ने हमारे नेता को मजबूर किया कि वो उनके पास जाये और उनसे मदद की गुहार लगाये जबकि सीटों के बंटवारे के लिए पहले ही गठबंधन में यह तय हो गया था और इसकी घोषणा तत्कालीन भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरणीय श्री अमित शाह जी द्वारा सार्वजनिक तौर पर की गई थी।
मुझे ताज्जुब होता है कि पार्टी से निष्कासित सांसद कैसे एक ऐसे व्यक्ति के साथ खड़े हो सकते है, जिन्होंने हमेशा हमारे नेता आदरणीय श्री रामविलास पासवान जी को ही नहीं बल्कि बिहार की जनता को धोखा देने का काम किया। श्री नीतीश कुमार जी ये बर्दाश्त ही नहीं कर सकते कि कोई दलित राजनीति में आगे बढ़े फिर चाहे वो आदरणीय रामविलास पासवान जी हो या फिर चिराग पासवान।
मेरी पार्टी व मेरे परिवार को तोड़ मुझे खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है पर मैं आदरणीय रामविलास पासवान जी का बेटा हूँ, एक शेर का बेटा जो कभी किसी परिस्थिति से ना तो डरता है और ना ही घबराता है परिवार के टूटने का दुःख मुझे जरूर है। पापा ने पूरा जीवन पार्टी के साथ-साथ अपने भाईयों को भी आगे बढ़ाने का काम किया और आज उनको गये 9 महीने भी नहीं हुए और अपनी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं के लिए उन्होंने परिवार का साथ छोड़ दिया और आदरणीय रामविलास पासवान जी की विचारधारा को चकनाचूर कर एक ऐसे व्यक्ति की शरण में गये जिनके खिलाफ हमारे नेता सदैव अपनी आवाज को बुलंद करते रहे।
छोटे चाचा आदरणीय रामचंद्र पासवान जी का निधन पहले ही हो गया था और अब मेरे पिताजी के गुजरने के बाद चाचा जी ही परिवार के मुखिया थे ऐसे समय में जब उनके ऊपर परिवार को संभालने की जिम्मेदारी थी और मेरा मार्गदर्शन करने का कर्त्तव्य था उस वक्त उन्होंने हम सबको अकेला छोड़ दिया। अपने पिता के निधन के उपरांत मैंने कभी अपने आपको अनाथ नहीं समझा क्योंकि मैं चाचा जी में पापा की छवि देखता था पर अफसोस जहाँ मैं उन्हें पिता तुल्य मानता था उन्होंने मुझे सिर्फ अपना प्रतिस्पर्धी समझा।
पापा के जाने के बाद से चाचा जी ने मुझसे बात करना बंद कर दिया। अगर वो मुझे कहते तो मैं खुशी-खुशी उनका नाम मंत्री पद के लिए लोक जनशक्ति पार्टी की तरफ से प्रधानमंत्री जी के समक्ष विचार के लिए रखता। अगर वो मुझसे कहते तो मैं स्वयं उन्हें लोक जनशक्ति पार्टी का अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के समक्ष रखता पर एक ऐसे समय में उन्होंने मुझे धोखा दिया जब मैं टाइफाइड के कारण लगभग डेढ़ महीने से बिस्तर पर था। रात के अंधेरे में उन्होंने मेरे भाई और पार्टी के बाकी सांसदों के साथ मिलकर मेरी पीठ में खंजर घोपने का काम किया। अफसोस मुझे सिर्फ इस बात का है कि पापा की बनाई पार्टी को खंडित करने से पहले एक बार मुझसे बात लेते।
मैंने तो अन्त-अन्त तक पार्टी और परिवार का बचाने का प्रयास किया उनके घर भी गया लेकिन उन्होंने दरवाजा नहीं खोला। जिनकी गोद में, मैं बचपन में खेला और बड़ा हुआ आज वह इस तरह मुझसे मुंह मोड़ लेंगे ये यकीन नहीं था। ये सवाल मेरे मन में कौंधता है कि मेरी जगह उनका अपना सगा बेटा होता तो क्या तब भी वह यहीं व्यवहार करते? पापा ने कभी अपने परायों में कोई फर्क नहीं रखा पर आज उनके जाने के बाद पापा के अपनों द्वारा दिये गये जख्मों से दुखी है|
मीडिया के माध्यम से यह सुनने में आया है कि चाचा जी मुझसे यह सवाल पूछ रहे है कि मैंने उन्हें बिहार अध्यक्ष के पद से क्यों हटाया? जबकि किसी भी प्रदेश के अध्यक्ष को बनाने या हटाने का अधिकार सिर्फ राष्ट्रीय अध्यक्ष के पास होता है। इनको बिहार प्रदेश के अध्यक्ष से हटाने का फैसला तत्कालीन लोक जनशक्ति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरणीय श्री रामविलास पासवान जी द्वारा लिया गया था। पापा ने मुझमें और प्रिंस में कभी कोई फर्क नहीं समझा और पापा चाहते थे कि उनके रहते-रहते और चाचा जी के मार्गदर्शन में प्रिंस अपनी जिम्मेदारियों को समझ ले इसलिए उन्होंने चाचा जी की जगह प्रिंस को बिहार प्रदेश का अध्यक्ष बनाने का फैसला लिया।
साथियों आने वाले समय में हम सबको एक लंबी और राजनीतिक और सैद्धांतिक लड़ाई लडनी है ये लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के अस्तित्व की नहीं बल्कि श्री रामविलास पासवान जी के विचारधारा को बचाने की है। मैं मजबूती से हर राजनीतिक और कानूनी लड़ाई लड़ने को तैयार हूँ और अपने अगले पत्र में पार्टी के संविधान और सिद्धांतों की जानकारी आप सबके साथ साझा करूंगा ताकि आप सबको भी ये विश्वास रहे की हम लोग कानूनी तौर पर कितने मजबूत है और पार्टी से निलंबित मुट्ठी भर लोग हम से हमारी पार्टी नहीं छीन सकते। मैं आपसे वादा करता हूँ कि लोक जनशक्ति पार्टी हमारी थी और हमारी रहेगी।