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24 अगस्त 2026

“सिनेमा हर व्यक्ति का वैश्विक जन्मसिद्ध अधिकार है”: MIFF Master Class

मुंबई: कोविड-19 ने दुनिया भर में फिल्म देखने में डिजिटल परिवर्तन की प्रक्रिया को तेज कर दिया है। महामारी ने लोगों को अपने घर के अंदर बंद करने के लिए मजबूर कर दिया, ऐसे में ओटीटी प्लेटफार्म के माध्यम…

“सिनेमा हर व्यक्ति का वैश्विक जन्मसिद्ध अधिकार है”: MIFF Master Class
“सिनेमा हर व्यक्ति का वैश्विक जन्मसिद्ध अधिकार है”: MIFF Master Class | फ़ोटो: TVL News

मुंबई:  कोविड-19 ने दुनिया भर में फिल्म देखने में डिजिटल परिवर्तन की प्रक्रिया को तेज कर दिया है। महामारी ने लोगों को अपने घर के अंदर बंद करने के लिए मजबूर कर दिया, ऐसे में ओटीटी प्लेटफार्म के माध्यम से घर पर दर्शकों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। लेकिन सिनेमाघरों से ओटीटी में सिनेमा देखने के माध्यम में इस विशाल परिवर्तन में, क्या कुछ भौगोलिक क्षेत्रों, लोगों और संस्कृतियों को पूरी तरह से छोड़ दिया गया है? क्या ओटीटी पारंपरिक सिनेमा थिएटरों के लिए मौत की घंटी बजा रहा है? क्या ओटीटी और स्क्रीन एक साथ रह सकते हैं?



मुंबई अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के 17वें संस्करण के दौरान आयोजित मास्टर क्लास में ये कुछ बहुत ही प्रासंगिक प्रश्नों उत्तर दिए गए और इन पर चर्चा की गई। रिजवान अहमद, निर्देशक मीडिया सेंटर, मन्नू , हैदराबाद ने मास्टर क्लास का नेतृत्व किया। वह फिल्म टेलीविजन और दृश्य-श्रव्य संचार के लिए अंतर्राष्ट्रीय परिषद (आईसीएफटी), पेरिस और अंतर्राष्ट्रीय वृत्तचित्र संघ, लॉस एंजिल्स के पूर्णकालिक सदस्य हैं।



रिजवान अहमद ने कहा कि सिनेमा इस दुनिया के प्रत्येक व्यक्ति का वैश्विक जन्मसिद्ध अधिकार है। उन्होंने कहा, “दुनिया के कई हिस्सों में सिनेमा के नए प्लेटफॉर्म के विस्तार का समर्थन करने के लिए वांछित बुनियादी ढांचा नहीं है। सबसे बड़ी चुनौती संसाधनों का असमान वितरण है। यदि आप भारत की स्थिति पर विचार करें, तो केवल 47 प्रतिशत दर्शकों के पास ही इंटरनेट की पहुंच है। बाकी 53 प्रतिशत आबादी को ओटीटी पर उपलब्ध समृद्ध सामग्री को देखने का पूरा अधिकार है।" उन्होंने सुझाव दिया कि ओटीटी कंपनियों को बहिष्कृत ग्रामीण आबादी के बड़े बहुमत तक पहुंचने के लिए एक पद्धति पर काम करने और अलग व्यवसाय मॉडल बनाने की जरूरत है।



पारंपरिक सिनेमा हॉलों पर ओटीटी प्लेटफार्म के कब्जा करने के डर को दूर करते हुए, रिजवान अहमद ने कहा कि ओटीटी कभी भी सिनेमा देखने के अनुभव और सामाजिक उत्सव की नकल नहीं कर सकता है जो सिनेमा थिएटर प्रदान करते हैं। उन्होंने विस्तार से बताया, “स्क्रीन बनाम ओटीटी की बहस सही दिशा में नहीं है। तकनीकी विकास होता रहेगा और इसे रोका नहीं जा सकता। एक संतुलित दृष्टिकोण वह है जो हमें यहां चाहिए। स्क्रीन और ओटीटी प्लेटफॉर्म के बीच सहयोगात्मक संबंध होना चाहिए। थिएटर मालिकों को लोगों को थिएटर की ओर आक???्षित करने के लिए नवोन्मेषी रणनीतियों और दृष्टिकोणों का पता लगाने की आवश्यकता है।”



रिजवान अहमद ने आगे कहा कि ओटीटी प्लेटफॉर्म को कंटेंट बनाते समय क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि ओटीटी सिनेमा में हो रहे डिजिटल परिवर्तन का अंत नहीं है। अंत में उन्होंने कहा, "मुफ्त विज्ञापन समर्थित स्ट्रीमिंग टीवी सेवाओं (फास्ट) जैसे प्लेटफॉर्म लोकप्रिय हो रहे हैं और यह प्रक्रिया जारी रहेगी।"





tvlnews

TVL News (TheViralLines) के संवाददाता। यह रिपोर्ट स्थानीय स्रोतों और उपलब्ध आधिकारिक जानकारी की पुष्टि के बाद प्रकाशित की गई है। किसी तथ्य में सुधार के लिए संपर्क करें या +91 99996 56869 पर WhatsApp करें।

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