नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने रेपो दर में 50 आधार अंकों (बीपीएस) की वृद्धि कर 5.90 प्रतिशत कर दी है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) बैठक करेगी और चार फीसदी मुद्रास्फीति लक्ष्य को पूरा नहीं करने पर सरकार को पत्र लिखने पर निर्णय करेगी। केंद्रीय बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास (Shaktikanta Das) ने यह जानकारी दी।
वर्तमान और उभरती समष्टि आर्थिक परिस्थिति का आकलन करने के आधार पर मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने आज (30 सितंबर 2022) अपनी बैठक में यह निर्णय लिया है कि: चलनिधि समायोजन सुविधा (एलएएफ) के अंतर्गत नीतिगत रेपो दर को तत्काल प्रभाव से 50 आधार अंक बढ़ाकर 5.90 प्रतिशत कर दिया जाए।
परिणामस्वरूप, स्थायी जमा सुविधा (एसडीएफ) दर 5.65 प्रतिशत और सीमांत स्थायी सुविधा (एमएसएफ) दर और बैंक दर 6.15 प्रतिशत हो गई है।
RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार को कहा,“ नीतिगत रेपो दर को 50 आधार अंकों से बढ़ाकर 5.9% किया गया है| दास ने कहा,“इस वर्ष की पहली तिमाही में वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि उम्मीद से कम रही, फिर भी यह 13.5% थी और शायद प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में सबसे अधिक थी|
अगस्त 2022 में सीपीआई मुद्रास्फीति बढ़कर 7.0 प्रतिशत (वर्ष-दर-वर्ष) हो गई, जो जुलाई में 6.7 प्रतिशत थी, क्योंकि अनाज, सब्जियों, दालों, मसालों और दूध की कीमतों के कारण खाद्य मुद्रास्फीति अधिक हो गई थी। केरोसिन (पीडीएस) की कीमतों में कमी के कारण ईंधन मुद्रास्फीति में नरमी आई, हालांकि यह दोहरे अंकों में बनी रही। मूल सीपीआई (अर्थात्, खाद्य और ईंधन को छोड़कर सीपीआई) मुद्रास्फीति, विभिन्न घटक वस्तुओं और सेवाओं में ऊर्ध्वमुखी दबाव के साथ उच्च स्तर पर बनी हुई है।