नई दिल्ली– केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने अपनी परीक्षा प्रणाली में बड़ा बदलाव करने की घोषणा की है। वर्ष 2026 से 10वीं की बोर्ड परीक्षाएं साल में दो बार आयोजित की जाएंगी, जिससे छात्रों को परीक्षा के तनाव को कम करने और अपने प्रदर्शन को बेहतर बनाने का अवसर मिलेगा।
छात्रों को मिलेगा एक और मौका
नई प्रणाली के तहत, छात्रों के पास वर्ष में दो बार परीक्षा देने और अपने सर्वश्रेष्ठ स्कोर को बनाए रखने का विकल्प होगा। यदि कोई छात्र पहली परीक्षा में शामिल नहीं हो पाता या अपने प्रदर्शन से संतुष्ट नहीं होता, तो वह दूसरी परीक्षा देकर अपनी योग्यता सुधार सकता है।
CBSE के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, इस बदलाव का उद्देश्य परीक्षा के दबाव को कम करना और छात्रों को अधिक लचीलापन देना है। इससे छात्र अपनी अवधारणात्मक समझ और कौशल आधारित मूल्यांकन पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।
CBSE विदेशी स्कूलों के लिए भी बनाएगा नया वैश्विक पाठ्यक्रम
CBSE ने घोषणा की है कि 2026-27 सत्र से 260 विदेशी स्कूलों के लिए एक व्यापक वैश्विक पाठ्यक्रम तैयार किया जाएगा। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय शिक्षा प्रणाली को मजबूती मिलेगी।
उच्च स्तरीय बैठक में लिया गया निर्णय
यह महत्वपूर्ण निर्णय केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में लिया गया। बैठक में CBSE, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT), केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) और नवोदय विद्यालय समिति (NVS) के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल थे।
नई प्रणाली से क्या होगा फायदा?
- परीक्षा का तनाव होगा कम – दो बार परीक्षा देने का मौका मिलने से छात्रों पर दबाव कम होगा।
- बेहतर प्रदर्शन की मिलेगी सुविधा – छात्र अपनी पहली परीक्षा के बाद दूसरी बार प्रयास कर अपने स्कोर को सुधार सकते हैं।
- समग्र मूल्यांकन पर जोर – नई प्रणाली रटने की बजाय अवधारणात्मक समझ और कौशल आधारित मूल्यांकन को बढ़ावा देगी।
CBSE जल्द ही इस नई प्रणाली का ड्राफ्ट जारी करेगा और इस पर जनता से सुझाव मांगेगा। इस ऐतिहासिक बदलाव से देशभर के छात्रों को परीक्षा के प्रति अधिक आत्मविश्वास मिलेगा और वे अपने भविष्य की तैयारी को बेहतर तरीके से कर सकेंगे।