देहरादून: उत्तराखंड के चमोली में रविवार को ग्लेशियर टूटने (Glacier burst) से बड़ा हादसा हो गया। रविवार को चमोली में ग्लेशियर टूटने की घटना में कई लोगों की मौत हुई है और लगभग 200 लोग लापता हैं| अब तक 26 लोगों की मौत हुई है जबकि 200 से अधिक लापता हैं| रविवार को ग्लेशियर टूटने के कारण आए एवेलांच में फंसे 39 लोगों को बचाने के लिए रविवार रात से एक सुरंग (Tunnel) में बड़े स्तर पर बचाव अभियान शुरू किया गया है| तपोवन सुरंग (जोशीमठ) में बचाव कार्य चल रहा है। ITBP की टीम रात भर साइट पर काम करेगी। रातभर जारी रखने के लिए सुरंग से मलबा और स्लश निकालने का काम जारी है
उत्तराखंड डीजीपी अशोक कुमार ने बताया,''' आज रात 8 बजे तक 26 शव बरामद किए गए हैं। 171 लोग अभी भी लापता हैं जिनमें से लगभग 35 लोग सुरंग में हैं जहाँ बचाव अभियान अभी भी जारी है| उत्तराखंड आपदा प्रबंधन केंद्र ने बताया,''' 197 लोग अभी लापता हैं|
चमोली की 12 फीट ऊंची और 15 फीट चौड़ी तपोवन टनल मलबे और कीचड़ से भरी हुई है और इसके अंदर श्रमिक फंसे हुए हैं| यह सुरंग करीब ढाई किलोमीटर लंबी है और इसकी केवल एक एंट्री है| अधिकारियों के अनुसार, यह पता लगाना मुश्किल है कि श्रमिक कहां फंसे हैं और ये एक साथ हैं या अलग-अलग| एक अधिकारी ने कहा, माना जा रहा है कि 32 लोग टनल के एक हिस्से में फंसे हैं और पांच एक अन्य में. अभी तक इनमें से किसी से कोई संपर्क स्थापित नहीं हो पाया है| यह 24X7 ऑपरेशन होगा|
मिशन को अंजाम देने के लिए सैकड़ों कर्मचारियों और स्थानीय लोगों द्वारा कुदाली और फावड़े का इस्तेमाल किया जा रहा है|भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP), नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स NDRF) और स्टेट डिजास्टर टीम रात से टनल का मलबा साफ करने और लोगों को बचाने के अभियान में जुटी है|
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने तपोवन में राहत और बचाव कार्यों पर आईटीबीपी, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, उत्तराखंड पुलिस और जोशीमठ के अन्य एजेंसियों के साथ बैठक की। रावत ने कहा,''यहां आर्मी, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, आईटीबीपी की टीमें बेहतर तालमेल के साथ बचाव अभियान कर रही है। मैं उनसे संतुष्ट हूं। अब तक 24 शव बरामद हुए हैं। बचाव अभियान तब तक चलेगा जब तक हम आखिरी छोर तक नहीं पहुंच जाते|
गौरतलब है कि उत्तराखंड में ग्लेशियर टूटने के कारण आए एवेलांच से अलनकनंदा और धौलीगंगा नदियों में भयंकर बाढ़ आ गई थी| बाढ़ यहां के कई पुलों को बहा ले गई और रास्ते में आने वाले घरों, पास के NTPC पावर प्लांट और एक छोटे हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट ऋषिगंगा को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया था|