नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता अजय माकन की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत से आग्रह किया कि दिल्ली के रेलवे ट्रैक के किनारे रहने वाले 2 लाख झुग्गी वासियों को बेदखल करने के अपने फैसले पर पुनर्विचार किया जाए।केंद्र ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि फिलहाल दिल्ली में रेल पटरियों के किनारे 48,000 झुग्गियों को नहीं हटाया जाएगा।सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता द्वारा सुप्रीम कोर्ट को बताया गया है कि राजधानी में रेलवे पटरियों के पास 48,000 झुग्गियों को हटाने के बारे में फैसला दिल्ली सरकार और केंद्र के बीच परामर्श के बाद ही लिया जाएगा।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अजय माकन ने वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी का इन गरीब झुग्गी वालों को राहत दिलवाने के लिए धन्यवाद दिया! कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अजय माकन ने कहा,''सुप्रीम कोर्ट में हमारी याचिका पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने माना कि चार हफ़्तों में 48,000 झुग्गियों के पुनर्वास सम्बंधित मसला सुलझाया जाएगा और जब तक कोई झुग्गी नहीं हटाई जाएगी! का इन गरीब झुग्गी वालों को राहत दिलवाने के लिए धन्यवाद!
अजय माकन ने कहा,''हमने याचिका डाली, रेलवे इस बात को खुद मान गए कि वो पहले प्रोटोकोल के आधार के ऊपर दिल्ली सरकार से चर्चा करेंगे और फैसला करेंगे हम उम्मीद करते हैं कि तब तक इन गरीब लोगों को वहीं के वहीं इन सीटू रिहैब्लिटेशन ना हो, तब तक इन सब लोगों को वहाँ से नहीं हटाया जाना चाहिए| केन्द्र सरकार ने सॉलिसिटर जनरल ने इस बात को माना कि कोई भी एक्शन 4 हफ्ते तक नहीं लिया जाएगा और जब तक दिल्ली सरकार और केन्द्र सरकार मिलकर इसके ऊपर फैसला करेगी|
कांग्रेस नेता ने कहा,''''आम आदमी पार्टी की अरविंद केजरीवाल सरकार का सबसे पहले उनका फर्ज बनता था कि सुप्रीम कोर्ट में 31 अगस्त को निर्णय आ रहा था तो वो चुप क्यों थे? क्या उनका फर्ज नहीं बनता था कि वो बताएं के ये प्रोटोकोल है, ये स्कीम है सिर्फ presser करके लैटर लिखकर सब चीजें सोल्व नहीं होती