नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने जहांगीरपुरी में उत्तरी दिल्ली नगर निगम द्वारा चलाए जा रहे विध्वंस अभियान पर रोक लगा दी है। हिंसा के बाद सामान्य होते हालात के बीच आज उत्तरी दिल्ली नगर निगम की तरफ से जहांगीरपुरी में अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया जाने वाला था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी है| जहांगीरपुरी में 20 और 21 अप्रैल को अवैध निर्माण पर अतिक्रमण अभियान चलाया जाने वाला था|
जहांगीरपुरी में अवैध अतिक्रमण के खिलाफ दो दिनों तक चलने वाले अभियान में एमसीडी के बुलडोजर ने कार्रवाई शुरू हुई, तो सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी| संभावित विरोध को देखते हुए सुबह से ही इलाके में बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती की गई थी| कई घरों की छतों पर सुरक्षाबल तैनात हैं|सुरक्षाबल ड्रोन के जरिए इलाके की निगरानी कर रहे हैं|
वकील दुष्यन्त दवे ने जहांगीरपुरी में हो रहे बुलडोजर एक्शन का चीफ जस्टिस के सामने उठाया| कोर्ट के दखल की मांग की| उन्होंने कहा 'जहांगीरपुरी में बुलडोजर एक्शन शुरू हो गया है| कोर्ट यथास्थिति का आदेश दे| कोर्ट कल सुनवाई करेगा| कोर्ट ने फिलहाल यथास्थिति बनाये रखने को कहा है| यानि फिलहाल बुलडोजर एक्शन नहीं होगा|
उत्तरी दिल्ली नगर निगम के मेयर राजा इकबाल सिंह कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने हिंसा प्रभावित जहांगीरपुरी, दिल्ली में नागरिक निकाय द्वारा किए जा रहे विध्वंस अभियान पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है| हम सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करेंगे और उसके अनुसार कार्रवाई करेंगे|
उत्तरी दिल्ली नगर निगम के आयुक्त संजय गोयल ने कहा है कि हमें अभी जहांगीरपुरी इलाके में अतिक्रमण विरोधी अभियान पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बारे में पता चला। पहले आदेश पढ़ेंगे और उसके अनुसार कार्रवाई करेंगे|
दिल्ली हाईकोर्ट भी सुनवाई के लिए तैयार
दिल्ली हाईकोर्ट में भी अतिक्रमण हटाने के अभियान के खिलाफ याचिका डाली गई है, जिसकी सुनवाई के लिए उच्च न्यायालय तैयार हो गया है। हालांकि हाईकोर्ट ने कहा है कि वह याचिका पर सुनवाई जरूर करेगा लेकिन इस स्थिति में मामले में कोई दखल नहीं देगा।
अमित शाह और भाजपा दिल्ली की शांति को भंग करना चाहते हैं: APP
आप विधायक अमानतुल्लाह खान ने जहांगीरपुरी में निगम द्वारा बुलडोजर चलाए जाने की कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा है कि देश के गृहमंत्री अमित शाह और भाजपा दिल्ली की शांति को भंग करना चाहते हैं। ट्विटर पर डाले गए एक वीडियो संदेश में ओखला विधायक ने कहा कि, एक विशेष समुदाय के घरों को ढहाए जाने का मतलब उन्हें रमजान के पावन माह में परेशान करना है। अवैध अतिक्रमण के नाम पर यह कार्रवाई करना आने वाले समय में इलाके के सामाजिक वातावरण को खराब करेगा।
स्थानीय लोग हैं परेशान
उधर,नगर निगम द्वारा की जाने वाली कार्रवाई से स्थानीय लोग परेशान हैं। एक स्थानीय निवासी ने बताया कि वह लोग यहां कबाड़ का सामान इकट्ठा करते हैं। लेकिन अब हमें पता चला है कि बुलडोजर आने वाला है इसलिए हम अपना सामान यहां से हटा रहे हैं।
जहांगीरपुरी हिंसा प्रभावित इलाके में स्थानीय लोग अपना सामान इलाके से हटाते हुए दिखे। स्थानीय व्यक्ति ने बताया कि वे अपशिष्ट पदार्थ इकट्ठा करके दूसरे स्थान पर भेज रहे हैं। इन्हीं सामान को बेचकर वे अपना घर चलाते हैं अब इसे यहां से हटाया जा रहा है क्योंकि हमें पता चला है कि यहां पर आज बुलडोजर आएगा|
पीड़िता ने पूछा- 15 साल से नजर नहीं आई अवैध दुकान
एमसीडी की कार्रवाई में जिन दुकानों को हटाया जा रहा है उनमें से एक को चलाने वाली महिला ने सवाल किया कि क्या 15 साल से नगर निगम को अवैध दुकान नहीं दिखाई दे रही थी। हिंदू मुस्लिम के झगड़े में हमारी दुकान को तोड़ दिया, पहले क्यों नहीं तोड़ा?
दिल्ली के जहांगीरपुरी इलाके में हनुमान जयंती के दिन यानी 16 अप्रैल को जिस तरह से बवाल हुआ, उसके बाद आज जो अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई दिल्ली नगर निगम द्वारा की गई उससे पूरे दिन हलचल रही। दिल्ली नगर निगम ने हिंसा वाली जगह पर बुलडोजर की कार्रवाई करने के लिए मंगलवार को ही दिल्ली पुलिस से 400 सुरक्षाकर्मी मांगे थे। ताकि बिना किसी बाधा के अतिक्रमण हटाने का कार्य किया जा सके। इसके लिए पुलिस ने भी हामी भर दी थी। इसके बाद से ही यहां जिन लोगों ने अवैध अतिक्रमण किया था, वह सुबह से अपना सामान हटाने में लगे हुए थे।
नगर निगम की कार्रवाई के बीच सुप्रीम कोर्ट ने भी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यथास्थिति बरकरार रखने का आदेश जारी कर दिया। हालांकि कोर्ट के ऑर्डर के बाद भी बुलडोजरों ने अपना कार्य जारी रखा। 2020 में हुए दिल्ली दंगों के दंश से इलाका अभी उबर नहीं पाया था कि बुलडोजर की इस कार्रवाई ने लोगों की रोजी-रोटी पर एक बार फिर प्रहार किया है।
सुबह 10:00 से 10:15 के बीच जहांगीरपुरी इलाके में नगर निगम के कई बुलडोजर पहुंचे। यहां सड़कों पर हुए अवैध निर्माण को तोड़ना शुरू कर दिया। कई लोगों की 15 से 30 साल पुरानी दुकानें तक तोड़ दी गईं।

तस्वीर में जिस गुप्ता जूस कॉर्नर को आप टूटते देख रहे हैं उसके लिए दुकान मालिक को डीडीए से परमिशन मिली है, इसके बावजूद निगम ने इसे तोड़ दिया। दुकान के मालिक का आरोप है कि वह पूरे समय निगम के कर्मियों से कागज देखने के लिए गुहार लगाते रह गए लेकिन उनकी एक न सुनी गई।
वहीं जब स्पेशल सीपी दीपेंद्र पाठक से पूछा गया कि कोर्ट के आदेश के बावजूद कार्रवाई क्यों जारी है तो वह बोले कि पुलिस तो यहां सिर्फ निगम को सपोर्ट और उसकी सुरक्षा के लिए है। यह कार्रवाई निगम ही रोकेगी वह कुछ नहीं कह सकते।

अपनी टूटी दुकानों और बेकार हुए उसके सामान से लोग बेहद निराश हैं। उनका सिर्फ एक ही सवाल है कि निगम ने तो बिना किसी नोटिस के हमारी दुकानें तोड़ दीं लेकिन अब हमारा क्या होगा। हमारे रोजगार का क्या होगा, हमारा घर कैसे चलेगा।

अपनी पान की दुकान तोड़ दिए जाने के बाद उसके सामान को इकट्ठा करती ये महिला बार-बार यही पूछ रही थी कि अब उसका घर कैसे चलेगा, कौन उसके बच्चों को पालेगा।