मुख्य सामग्री पर जाएँ
23 अगस्त 2026

बिजली विभाग के निजीकरण का निर्णय वापस लेने एवं बिजली संबंधी समस्याओं के समाधान हेतु मांगपत्र।

25 नवंबर, 2024 को उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन की वित्तीय समीक्षा बैठक में दक्षिणांचल और पूर्वांचल वितरण निगमों के निजीकरण का निर्णय लिया गया, जिस पर राज्य सरकार भी अपनी सहमति व्यक्त करती प्रतीत हो रह…

बिजली विभाग के निजीकरण का निर्णय वापस लेने एवं बिजली संबंधी समस्याओं के समाधान हेतु मांगपत्र।
बिजली विभाग के निजीकरण का निर्णय वापस लेने एवं बिजली संबंधी समस्याओं के समाधान हेतु मांगपत्र। | फ़ोटो: TVL News

25 नवंबर, 2024 को उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन की वित्तीय समीक्षा बैठक में दक्षिणांचल और पूर्वांचल वितरण निगमों के निजीकरण का निर्णय लिया गया, जिस पर राज्य सरकार भी अपनी सहमति व्यक्त करती प्रतीत हो रही है। यह कोई नया प्रयास नहीं है; वर्ष 2022 में भी राज्य सरकार ने बिजली विभाग के निजीकरण का प्रयास किया था, जिससे जनता में संदेह और असंतोष और गहरा हो गया है।  


हम, उत्तर प्रदेश के किसान और आम नागरिक, केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित बिजली (संशोधन) विधेयक 2020 के समय से ही निजीकरण का विरोध कर रहे हैं। यह मुद्दा 13 महीने तक चले दिल्ली किसान आंदोलन का प्रमुख हिस्सा था। 9 दिसंबर, 2021 को केंद्र सरकार ने लिखित आश्वासन दिया था कि बिना किसानों से वार्ता के इस विधेयक को लागू नहीं किया जाएगा। किंतु, केंद्र सरकार अपने वादे से मुकर गई और 2022 में यह विधेयक लोकसभा में प्रस्तुत किया गया। अब उत्तर प्रदेश सरकार भी सुधारों के नाम पर चुपके से निजीकरण की राह पर बढ़ रही है।  


वर्तमान में उत्तर प्रदेश की गरीब जनता पहले से ही महंगी बिजली की मार झेल रही है। ऐसे में बिजली दरों में वृद्धि और निजीकरण से आम जनजीवन पर और बोझ बढ़ेगा। निजीकरण से लाखों बिजली कर्मचारियों की आजीविका खतरे में पड़ जाएगी, जिसके विरोध में वे पिछले छह महीनों से आंदोलनरत हैं।  


बिजली आज रोटी, कपड़ा और मकान की तरह मूलभूत आवश्यकता बन चुकी है। यह किसानों के लिए सिंचाई, गरीबों के लिए घरेलू रोशनी, और लघु व कुटीर उद्योगों के लिए रोजगार का आधार है। सस्ती और निर्बाध बिजली आपूर्ति जनपक्षीय सरकार की जिम्मेदारी है। किंतु, घाटे के बहाने बिजली को निजी हाथों में सौंपने की साजिश चल रही है। हमारा मानना है कि एक लाख करोड़ से अधिक के घाटे का कारण निजी कंपनियों से महंगी बिजली खरीद, बड़े रसूखदारों के बिलों का भ्रष्टाचार के जरिए माफ करना, और सरकार की गलत नीतियां हैं।  


हम, उत्तर प्रदेश के 16 किसान संगठन, जिला मुख्यालयों पर साझा विरोध प्रदर्शन के माध्यम से निम्नलिखित मांगें आपके समक्ष प्रस्तुत करते हैं:  


*हमारी मांगें:*  

1. दक्षिणांचल और पूर्वांचल वितरण निगमों के निजीकरण पर पूर्ण रोक लगाई जाए।  

2. सभी ग्रामीण उपभोक्ताओं को प्रतिमाह 300 यूनिट मुफ्त बिजली प्रदान की जाए। सरकार अपने चुनावी वादे के अनुसार ट्यूबवेलों के लिए मुफ्त बिजली सुनिश्चित करे।  

3. स्मार्ट मीटर योजना को तत्काल रद्द किया जाए।  

4. किसानों के ट्यूबवेलों के लिए प्रतिदिन 18 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।  

5. कनेक्शन शुल्क, लाइन, ट्रांसफार्मर, बिलिंग मीटर, कनेक्शन काटने-जोड़ने और अन्य अधिभारों की वसूली बंद की जाए।  

6. निजी कंपनियों से महंगी बिजली खरीदना तुरंत बंद किया जाए।  

7. बिजली विभाग में कर्मचारियों पर थोपी गई श्रम-विरोधी नई सेवा नियमावली वापस ली जाए और सभी संविदा कर्मचारियों को नियमित किया जाए।  


माननीय महोदय, हमें पूर्ण विश्वास है कि आप उत्तर प्रदेश के करोड़ों किसानों, मजदूरों और आम जनता की बिजली संबंधी आवश्यकताओं को समझेंगे और उपरोक्त मांगों का शीघ्र समाधान करेंगे। बिजली विभाग के निजीकरण को रोककर जनहित में सस्ती और सुगम बिजली व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस कदम उठाएंगे।  


*साझा ज्ञापन में शामिल संगठन:*  

1. भारतीय किसान संगठन  

2. क्रांतिकारी किसान यूनियन  

3. किसान संग्राम समिति  

4. किसान मजदूर परिषद  

5. ऑल इंडिया किसान फेडरेशन  

6. अखिल भारतीय एकीकृत किसान सभा  

7. अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा  

8. किसान एकता केंद्र  

9. किसान विकास मंच  

10. भाकियू श्रमिक जनशक्ति यूनियन  

11. सोशलिस्ट किसान सभा  

12. कृषि भूमि बचाओ मोर्चा  

13. खेत मजदूर किसान संग्राम समिति  

14. किसान फ्रंट  

15. इंकलाबी मजदूर केंद्र  

16. क्रांतिकारी किसान सभा किसान एकता संघ  

17. पूर्वांचल किसान यूनियन  

18. किसान मजदूर संयुक्त यूनियन

Powered by Froala Editor

tvlnews

TVL News (TheViralLines) के संवाददाता। यह रिपोर्ट स्थानीय स्रोतों और उपलब्ध आधिकारिक जानकारी की पुष्टि के बाद प्रकाशित की गई है। किसी तथ्य में सुधार के लिए संपर्क करें या +91 99996 56869 पर WhatsApp करें।

मुफ़्त अलर्ट

ऐसी हर खबर सबसे पहले पाएँ

बस्ती, गोंडा, अयोध्या, गोरखपुर और लखनऊ के अपडेट सीधे आपके WhatsApp पर।

इन्हें भी पढ़ें

टॉप न्यूज़ की सभी खबरें

इस खबर से जुड़े सवाल

यह खबर कब प्रकाशित हुई और आखिरी बार कब अपडेट की गई?

यह रिपोर्ट 3 जून 2025 को TVL News पर प्रकाशित हुई और 3 जून 2025 को अपडेट की गई। नई जानकारी मिलने पर खबर को अपडेट किया जाता है।

इस क्षेत्र की और खबरें कहाँ पढ़ें?

इस क्षेत्र की ताज़ा खबरें TVL News के ज़िला सेक्शन में पढ़ी जा सकती हैं। thevirallines.net पर बस्ती, गोंडा, अयोध्या, गोरखपुर और लखनऊ के अलग-अलग पेज हर दिन अपडेट होते हैं।

इस खबर में कोई तथ्य ग़लत लगे तो क्या करें?

TVL News हर सुधार को गंभीरता से लेता है। +91 99996 56869 पर WhatsApp करें या thevirallines@gmail.com पर लिखें — पुष्टि के बाद खबर तुरंत सुधारी जाती है।