बस्ती जनपद के कुदरहा ब्लॉक अंतर्गत साधन सहकारी समिति जगरनाथपुर में किसानों के हक पर खुलेआम डाका डाला जा रहा है।
सरकारी योजनाओं के तहत मिलने वाली यूरिया खाद अब किसानों तक नहीं, बल्कि प्राइवेट दुकानों तक पहुंचाई जा रही है, वो भी समिति संचालक के संरक्षण में!
आरोप है कि समिति संचालक रामबृक्ष शर्मा द्वारा खाद की कालाबाजारी की जा रही है। किसानों को समय पर खाद नसीब नहीं हो रही, लेकिन समिति का खाद प्राइवेट दुकानदारों को बेच दिया गया। नतीजतन, अब मजबूर किसान प्राइवेट दुकानों पर महंगे दामों पर खाद खरीदने को विवश हैं।
यह कोई अफवाह नहीं, खुद समिति संचालक ने स्वीकार किया है कि 200 बोरी यूरिया खाद के स्टॉक में गड़बड़ी है। उनका कहना है कि विभागीय अधिकारियों को इसकी जानकारी है, और वो जल्द ही "मशीन से खाद को खारिज कर" स्टॉक दुरुस्त कर देंगे।
अब सवाल यह उठता है कि —
क्या गड़बड़ी स्वीकार करने भर से किसान का नुकसान पूरा हो जाएगा?
क्या इस कबूलनामे के बाद भी कार्रवाई सिर्फ कागज़ों तक सीमित रहेगी?
याद दिला दें कि कुछ ही दिन पहले कुदरहा बाजार में भी खाद की कालाबाजारी का बड़ा मामला उजागर हुआ था। वहां समिति संचालक और एक प्राइवेट दुकानदार पर कार्रवाई हुई थी। बावजूद इसके, जिले में खाद की कालाबाजारी पर लगाम नहीं लग पाई है।
दरअसल, सरकारी समितियां ही प्राइवेट दुकानों को खाद बेच रही हैं। फिर वही खाद किसानों को मानक से ज्यादा कीमत पर बेची जाती है। यानी "मुनाफा ऊपर, मारा-मारी नीचे।"
अब सबसे बड़ा सवाल यही है —
क्या खाद माफियाओं पर लगेगा शिकंजा?
या फिर यह सारा मामला भी सिर्फ फाइलों की धूल और नेताओं के बयानों में दम तोड़ देगा?
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