मुख्य चिकित्सा अधिकारी- बस्ती के सहयोग से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, साऊँघाट, बस्ती, के प्रांगण में आज दिनांक 21 फ़रवरी 2025 दिन शुक्रवार को प्रातः 10:00 बजे से शाम 3:00 बजे तक हनुमान प्रसाद पोद्दार कैंसर अस्पताल एवं शोध संस्थान, गीता वाटिका, गोरखपुर द्वारा नि:शुल्क कैंसर की प्राथमिक जांच एवं प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया जिसमें आए 117 मरीजों में कैंसर संबंधित लक्षण की जांच की गई। मरीजों की समस्या समझकर कैंसर अस्पताल के चिकित्सक डॉ. सी. पी. अवस्थी और सहायक-चिकित्सक डॉ. राकेश श्रीवास्तव ने बारी बारी से हर एक का मूल्यांकन कर उनमें कैंसर होने की लक्षण की जांच की तथा उचित सलाह और परामर्श दिया। कैंसर के विषय में मरीजों एवं उनके परिजनों को प्रशिक्षण तथा इलाज के बारे में जानकारी दी गई। सभी दिखाने आए मरीजों को कैंसर अस्पताल की तरफ से भरपूर मात्रा में निशुल्क दवा भी दी गई।
कैंसर जागरूकता अभियान के तहत इस केंद्र से संबंधित स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं तथा अस्पताल में आए सभी लोगों को डॉ. राकेश श्रीवास्तव ने बताया कि लगातार खांसी में खून आना, आंत्र की आदतों में बदलाव, मल में खून आना, अस्पष्टीकृत एनीमिया (कम रक्त गणना) , स्तन में गांठ या स्तन से स्राव, अंडकोष में गांठें पेशाब में बदलाव, पेशाब में खून आना, तीन से चार सप्ताह से अधिक समय तक गला बैठना, लगातार गांठें या सूजी हुई ग्रंथियां, तीन से चार सप्ताह से अधिक समय तक मस्से या तिल में स्पष्ट परिवर्तन, बड़े तिल या बहुरंगी तिल जिनके किनारे अनियमित हों या जिनमें खून बह रहा हो, अपच या निगलने में कठिनाई, असामान्य योनि से रक्तस्राव या स्राव, अप्रत्याशित वजन घटना, रात को पसीना आना, या बुखार, मुंह में ठीक न होने वाले घाव या मसूड़ों, जीभ, या टॉन्सिल पर लगातार सफेद या लाल धब्बे, गंभीर असहनीय सिरदर्द जो सामान्य से अलग महसूस हो, अधिक समय तक पीठ दर्द, पेल्विक दर्द, सूजन, या अपच आदि कैंसर का संकेत हो सकता है । ऐसे में कैंसर के चिकित्सक को जरूर दिखाना चाहिए ताकि पता लगकर अगर कैंसर हो तो उसका तुरंत एवं उचित इलाज हो सके। शिविर प्रबंधक अजय श्रीवास्तव ने उन्हें समझाया आधुनिक जीवनशैली ने कैंसर के आंकड़ों में वृद्धि को प्रभावित किया है।
कैंसर धूम्रपान, शराब, गुटका तंबाकू, खैनी, दोहरा, हुक्का, आदि का सेवन न करके कैंसर से बचा जा सकता है। तेजी से भागती जीवनशैली में लोगों के पास अपने लिए बिल्कुल भी समय नहीं है। इसलिए वे आधुनिक खान-पान की आदतें फास्ट फूड का अत्यधिक सेवन करते हैं, जिससे मोटापा बढ़ता है जो बहुत हानिकारक है। अधिक लोग डेस्क जॉब कर रहे हैं, जिस में अक्सर लोग प्लास्टिक की थैलियों में दुकान से गर्म चाय गरम सब्जी या अन्य समान मंगवाते हैं और वो ही खा या पी लेते हैं। प्लास्टिक में गरम खाना व प्लास्टिक की बॉटल में पानी पीने से, उसमें से निकलने वाले केमिकल के कारण वो ही धीरे धीरे उनके पेट के आंतड़ियों में कैंसर बनाता है। अत: आप सभी से नम्र निवेदन है कि प्लास्टिक का उपयोग कम से कम करें, जहाँ तक हो सके प्लास्टिक के बर्तन में गरम खाना ना खायें, प्लास्टिक की बॉटल में पानी का उपयोग ना करें।
विशेषकर गर्म चाय-कॉफी प्लास्टिक कप में ना पियें क्योंकि कैंसर खराब आहार और शारीरिक निष्क्रियता जैसे परिवर्तनीय जोखिम कारकों से भी जुड़े होते हैं। अगर हम उचित देखभाल करें तब भविष्य में कैंसर रोगियों की संख्या में काफी गिरावट आ जाएगी। शिविर में महिलाओं को स्तन परीक्षण की ???्व-तकनीक बताई ताकि वह हर 15 दिन पर खुद जांच करती रहें और यदि कोई गांठ या सीने में दर्द होता है तो तुरंत एक कैंसर चिकित्सक से मिले ताकि उसका सफल इलाज हो सके। 30 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को कैंसर, विशेष रूप से गर्भाशय ग्रीवा और स्तनों के लिए परीक्षण करना चाहिए, क्योंकि प्रारंभिक युवी अवस्था में निदान होने पर यह पूरी तरह से ठीक हो सकता है।
सभी लोगों को IEC (सूचना शिक्षा संचार) सामग्री जैसे फ्लिपबुक, पोस्टर, लीफलेट/चित्रों के साथ पैम्फलेट आदि को बांटा गया ताकि इनका उपयोग करके वे समुदाय में कैंसर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर यह समझाये कि रोकथाम इलाज से बेहतर है।
शिविर में चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ए. के. सिंह, डॉ. राकेश श्रीवास्तव, डॉ. वैष्णवी त्रिपाठी, डॉ. शशि, अजय श्रीवास्तव, सत्यवती तिवारी, अतुल पांडेय, एस. के. श्रीवास्तव, विनय, शैलेश, नारद मुनि, रामसूरत सिंह, स्वास्थ्य केन्द्र के डॉक्टर एवं कर्मचारियों आदि का कार्य विशेष उल्लेखनीय योगदान रहा।