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26 अगस्त 2026

गैर कानूनी सरकार चलाएंगे और निर्णय नहीं होने देंगे': Manipur Politics को लेकर अभिषेक मनु सिंघवी का BJP सरकार पर हमला

नई दिल्ली: कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को कहा कि साल 2018 में मणिपुर के 12 भाजपा विधायकों को आयोग्य घोषित किया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि अब भारतीय चुनाव आयोग ने बताया है मणि…

गैर कानूनी सरकार चलाएंगे और निर्णय नहीं होने देंगे': Manipur Politics को लेकर अभिषेक मनु सिंघवी का BJP सरकार पर हमला
गैर कानूनी सरकार चलाएंगे और निर्णय नहीं होने देंगे': Manipur Politics को लेकर अभिषेक मनु सिंघवी का BJP सरकार पर हमला | फ़ोटो: TVL News

नई दिल्ली: कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को कहा कि साल 2018 में मणिपुर के 12 भाजपा विधायकों को आयोग्य घोषित किया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि अब भारतीय चुनाव आयोग ने बताया है मणिपुर के राज्यपाल को पहले ही इसके निर्देश दे दिए गए थे लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है।राहुल गांधी ने कहा कि भाजपा को बचाने के लिए राज्यपाल का इस्तेमाल करना पूरी तरह से असंवैधानिक है।




इस मामले में कांग्रेस नेता और वरिष्ठ वकील डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि जैसा आप देख रहे हैं, हमारे डिपार्टमेंट के लोगों के साथ-साथ मेरे साथ पूर्व मुख्यमंत्री इबोबी जी, जो अब सीएलपी लीडर हैं, श्री गैखंगम जो CWC के मैंबर हैं और गोविंद दास जी, जो पीसीसी प्रेजिडेंट हैं। क्योंकि आज हम एक अजीबों-गरीब मेल का विवरण करने वाले हैं, इंटर सेक्शन का। वो मेल और इंटर सेक्शन है - एक तरफ जान - बूझ कर विलंब कैसे करना और विलंब द्वारा एक उद्देश्य हासिल करना।




 दूसरी चीज, जो मेल खाती है, कैसे राजधर्म की अवहेलना करना। और तीसरा, किस प्रकार से गणतंत्र - लोकतंत्र की परिभाषा को विकृत करना, आडंबर के आधार पर बहुमत बनाकर और चौथा इंटर सेक्शन का जो बिंदू है, वो है – किस प्रकार से प्रलोभन का बेशर्मी से दुरुपयोग करना। और ये चारों बिंदू मेल खा रहे हैं, एक उत्तर पूर्व के छोटे से प्रदेश जिसका नाम है - मणिपुर और इस विषय में मेरे सब साथी यहाँ पर बैठे हैं। तो मैं आपको इसका कानूनी ज्यादा पहलू नहीं दूंगा, लेकिन कुछ हद तक ये कानूनी मामला है।




वरिष्ठ कांग्रेस नेता डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि,' उच्चतम न्यायालय में भी इसका एक पक्ष लंबित है। लेकिन मैं आज इन तीन बिंदुओं का राजनैतिक थोड़ा सा विश्लेषण करना चाहता हूं आपके समक्ष और क्योंकि हमारी संस्थापित स्मृति कई बार कमजोर होती है, तो हम भूल जाते है कि अभी कुछ ही वर्ष पहले 2017, मार्च में जो 11वीं एसेंबली के चुनाव हुए थे, मणिपुर में, उसमें वास्तव में बहुमत कांग्रेस का था, 28 लोगों का, बीजेपी का 7 कम था। उसके बावजूद, अब बात पुरानी हो गई, इसलिए हम भूल जाते हैं। जिस मामले में बीजेपी माहिर है, पीएचडी है, खरीद-फरोख्त, लेनदेन की राजनीति करके सरकार बनाई, मार्च 2017 में । अब बात रोचक होती है, क्योंकि ये सिर्फ सरकार जोड़ने-तोड़ने की कहानी नहीं है, जो कभी आप कर्नाटक में देखते हैं, कभी गोवा में देखते हैं, कभी पुडुचेरी में देखते हैं, कभी मणिपुर में देखते हैं। 




डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि,''ये कहानी है कि तुरंत सरकार बनाने के बाद उसी महीने मार्च में, लगभग 12 लोगों को पार्लियामेंट्री सेक्रेटरी (Parliamentary Secretary) बनाया गया, संसदीय सचिव। और इसके लिए एक प्रादेशिक कानून का इस्तेमाल किया गया, मणिपुर का कानून। मैं आपको उसके डिटेल नहीं दूंगा, 2012 का कानून है, मणिपुर का। उन लोगों को स्तर दिया गया, दर्जा दिया गया, मिनिस्टरों का दर्जा दिया गया, डिपार्टमेंट दिए गए, पोर्टफोलियो दिए गए। अब ये मालूम था कि ये गैर कानूनी है, इन्हीं लोगों को तोड़कर आपने सरकार बनाई थी, इन लोगों को आपने ऑफिस ऑफ प्रोफिट दे दिया, तुरंत भरने के बाद।





वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि,''2017 में ही कुछ महीने बाद जुलाई में एक उच्चतम न्यायालय का निर्णय आया, जिसका नाम है बिमागशु रॉय। वो असम का केस था। जिसमें उच्चतम न्यायालय ने एक सिद्धांत स्पष्ट कर दिया कि ऐसे कानून जिसके अंदर संसदीय सचिव बनते हैं, वो सिर्फ केंद्र के अधिकार क्षेत्र का है, प्रदेश के अधिकार क्षेत्र का नहीं है, प्रदेश नहीं बना सकता है। तो जाहिर था कि जो मणिपुर के कानून के अंतर्गत आपने दुरुपयोग किया था, उसमें आप नहीं कर सकते थे, क्योंकि वो कानून का अधिकार क्षेत्र लेजिस्लेटिव कॉम्पिटेंस (Legislative Competence) नहीं थी। तो इसको चुनौती दी गई एक याचिका में, उच्च न्यायालय मणिपुर में और 2020 में उच्च न्यायालय ने उस याचिका को अलाउ कर दिया, 17 सिंतबर, 2020 में। अब तिथियां थोड़ी रोचक हो जाती हैं। तो उच्च न्यायालय ने उस कानून को जिसके अंतर्गत इन पार्लियामेंट्री सेक्रेटरी को बनाया था, उनको निरस्त कर दिया। 




डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि,''पार्लियामेंट्री सेक्रेटरी तो हट ही गए थे 2018 में, लेकिन एक साल का उन्होंने फायदा उठाया था। क्योंकि जिन्होंने उनको नियुक्त किया था, वो जानते थे कि ये गैर कानूनी है, तो 8-9 महीने बाद उन्होंने अपने आप हटा दिया। अब 2020 में जब ये कानून निरस्त हुआ, स्ट्राइक डाउन हुआ, तो तुरंत उसी महीने, अगले महीने अक्टूबर 2020 में एक याचिका गई, इसमें आपको दो कानूनों की बात बताना आवश्यक है कि अगर व्यक्ति कोई ऑफिस ऑफ प्रोफिट होल्ड करता है, केन्द्र में या प्रदेश में, तो वो हमारे प्रावधान हैं, जो 190, 191, 192, हमारे संविधान के, उसके अंतर्गत वो डिसक्वालिफाइड होता है। वो ना एमएलए हो सकता है, ना सांसद हो सकता है। 





वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि,''तो याचिका गई कि आपने जिनको बनाया था, वो संसदीय सचिव, ऑफिस ऑफ प्रोफिट है और आपने तो हटा दिया संसदीय सचिव से, लेकिन वो साथ-साथ डिसक्वालिफाइड हो गए as MLA also. आप समझे मेरी बात। They stand disqualified under article 190, 191, 192 etc was the allegation. अब हमारे इन प्रावधानों के अंतर्गत जो प्रक्रिया है, वो ये है कि ये याचिका, ये शिकायत जाती है माननीय राज्यपाल को और राज्यपाल अनिवार्य रुप से अपना निर्णय देने से पहले चुनाव आयोग से पूछते हैं, उनका मत लेते हैं और उनका मत लेने के बाद वो अपना निर्णय सुनाते हैं। ये बात सब हुई है सितंबर, 2020 में। आज 6 महीने निकल गए हैं। 




वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि,''आज आप मार्च में हैं, साढ़े 5 महीने निकल गए हैं। ये तिथियां, मैंने कहा ना विलंब, जो मेरा पहला बिंदू था, जानबूझ कर विलंब। तो साढ़े 5 महीने लगा दिए। पहले तो माननीय राज्यपाल ने कुछ किया नहीं, हमारे दोस्तों ने सबने वहाँ पर शिकायत की कि ये जो 12 एमएलए हैं, ये डिसक्वालिफाइड हैं और आप जानते हैं कि सरकार वहाँ नहीं हो सकती, डिसक्वालिफाइड एमएलए के साथ। 




वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि,''तो माननीय राज्यपाल जी ने कुछ किया नहीं। उसके बाद विलंब से भेजा चुनाव आयोग को। चुनाव आयोग ने भी विलंब लगाया। आज तक मेरे पास तो रिपोर्ट नहीं है, लेकिन बताया जा रहा है कि अभी दो- चार दिन पहले चुनाव आयोग ने निर्णय लिया है, 5 महीने निकल गए हैं और चुनाव आयोग ने अपनी रिपोर्ट भेज दी है माननीय राज्यपाल साहब के पास। हमारी आशा तो दूसरी है, लेकिन विश्वास जरुर ये है कि माननीय राज्यपाल कुछ और महीने निकाल देंगे। इस 5,6,7,8 महीने का परिणाम क्या है - परिणाम ये है कि आप धज्जियां उड़ा रहे हैं अनुच्छेद 190 की। अनुच्छेद 190 कहता है कि अगर इस व्यक्ति को मैंने पार्लियामेंट्री सेक्रेटरी बनाया है, तो ये एमएलए नहीं रह सकता। यानि आज ये हट गया है पार्लियामेंट्री सेक्रेटरी से, लेकिन ये एमएलए तो है, ये 12 लोग एमएलए हैं। ये सब डिसक्वालिफाइड हो जाते हैं। तो आपने 6 महीने ऐसे निकाल दिए, 3-4 महीने और निकाल देंगे। गैर कानूनी सरकार चलाएंगे और निर्णय नहीं होने देंगे।





वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि,''तो ये सिक्वेंस देना आवश्यक था, ये कहने के लिए कि इससे क्या दिखता है। इससे दिखता है कि आप राजधर्म जैसे शब्द को जानते नहीं हैं और आपसे मैं मुखातिब हूं, बीजेपी सरकार से निश्चित रुप से, बीजेपी प्रादेशिक सरकार से निश्चित रुप से, बीजेपी केन्द्र सरकार से निश्चित रुप से, लेकिन मुझे खेद है और दुख है बहुत हद तक हमारी संवैधानिक संस्थाओं के प्रति भी। 




डॉ. सिंघवी ने कहा कि,''संवैधानिक संस्था राज्यपाल की तुरंत दो हफ्ते में उनको रिपोर्ट मांगनी चाहिए। रिपोर्ट तो फेवर में भी हो सकती थी और उसके दो हफ्ते में चुनाव आयोग को रिपोर्ट देनी चाहिए थी। आज इसी बात को उलट- पलट कर देख लीजिए, किसी कांग्रेस सरकार में ये होता, तो 2 दिन में रेफरेंस होता राज्यपाल द्वारा और तीन दिन में रिपोर्ट आती। और क्या लिखा होता उसमें, वो भी हम जानते हैं। तो आपने इससे बेहतर कौन सा राजधर्म आपने अनुपालन किया? 



वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि,''दूसरा आपने जानबूझ कर साढ़े 5 महीने की विलंब, जैसा आप जानते हैं चुनाव की प्रक्रिया कुछ महीने, कुछ सालों के लिए होती हैं।  उसमें आप एक-एक साल खा जाओगे इस तरह से तो गैर कानूनी सरकार सब फायदे उठा रही है, उन एमएलए के आधार पर जो निष्कासित डिसक्वालिफाइड, निरस्त, बिना किसी अधिकार क्षेत्र के एमएलए कहलाए जा रहे हैं। 




डॉ. सिंघवी ने कहा कि,''और तीसरा बिंदू कि ये जिसको आप बहुमत कहते हैं, वो तो विकृत बहुमत है और विकृत गणतंत्र है, विकृत लोकतंत्र है। ये बहुमत कैसा, 12 हटा लीजिए तो कितने बचे आपके, 14 भी नहीं बचेंगे और ये सब कैसे हुआ - शुरुआत हुई प्रलोभन देकर कि आप संसदीय सचिव बन जाइए, जो कि अब निरस्त हो गया है। तो मैं ये कहूंगा सभी से और सभी संवैधानिक संस्थाओं से भी कि अगर आदाब कर लेते तो मन्नत मिल गई होती, अगर झुक जाते, आदाब कर लेते तो मन्नत मिल गई होती, अगर लहजा बदल लेते तो गवर्नर बन गए होते। ये लहजा, खास लहजा है आजकल, उस लहजे के आधार पर आप सही निर्णय नहीं लेते हैं और प्रदेश अलग हो, व्यक्ति अलग हो, नए किरदार आते-जाते रहें, लेकिन नाटक पुराना है, चाहे कर्नाटक हो, चाहे गोवा हो, चाहे पुडुचेरी हो, चाहे मणिपुर हो।





डॉ. सिंघवी ने कहा कि आपका प्रश्न लाजमी है, लेकिन हर चीज, कानून की अलग परिधि होती है, एक अलग चैनल होता है और उसको निश्चित रुप से हम पूरी तरह से उपयोग करेंगे। इसमें एक रोचक बात ये है कि सितंबर, 2020 के निर्णय पर उच्चतम न्यायालय अभी तक साढ़े 5 महीने बाद अभी मतलब फरवरी में, पहली बार एमएलए पहुंचे हैं। यानि उन्होंने पूरा फायदा उठाया 5 महीने का और उसके बाद यहाँ आना ठीक समझा। दूसरी बात, कि वो तो हुई कानून बात, उसमें मैं पेश हो रहा हूं, मैं अभी उच्चतम न्यायालय की बात नहीं कर रहा हूं। 




अभी बात ये है कि जो विलंब हो गया है, सिर्फ चुनाव आयोग को रेफर करने में और चुनाव आयोग के मत का वापस जाने में मान्यवर राज्यपाल के पास। वो अपने आपमें इतना गलत, असंवैधानिक विलंब है कि आपके जरिए देश में राजनैतिक रुप से उसको जागरुकता देना आवश्यक है, जो कि हम अभी कर रहे हैं। 




एक अन्य प्रश्न पर कि उत्तर प्रदेश के हाथरस से जो घटना अभी सामने आई है, क्या आपको लगता है कि यूपी में कानून व्यवस्था की हालत सही है?  डॉ. सिंघवी ने कहा कि आप बहुत माइल्ड वर्ड यूज कर रही हैं। मुझे तो बहुत ही घिनौना, घृणात्मक चीज लगी और इसके कुछ पहलू भयानक हैं। कोई कड़े से कड़ा शब्द नहीं है मेरे पास इसकी भर्त्सना करने के लिए। एक व्यक्ति जो तथाकथित रुप से, मैं तो सिर्फ रिपोर्ट पर जा रहा हूं और कोई कारण नहीं है कि वो रिपोर्ट गलत है। जो बेल पर है, एक व्यक्ति जो कानून की परिधि और कंट्रोल पर है, वो जाकर ऐसा घिनौना अपराध करता है और वो एक विक्टिम को दूसरी बार विक्टिम बनाता है और आपको लेक्चर मिलते हैं उस प्रदेश से दिन-प्रतिदिन कि हम ये कर देंगे, हमने ये कर दिया और हम ये कर रहे हैं। हमने स्वर्ण लोक बना दिया, हमने वहाँ पर अन्याय खत्म कर दिया, हमने कानून व्यवस्था पूरी बदल दी। जो आपने सुना और पढ़ा है और जिसका आप प्रश्न पूछ रही हैं, वो तो मैं समझता हूं कि रक्षक और भक्षक, का पूरा जो है फर्क खत्म कर देता है और दिन - दहाड़े ये हुआ। ये शर्म की बात है। मैंने बिल्कुल इस पर कोई राजनीतिक टिप्पणी नहीं की है, मैं इसकी कड़ी से कड़ी निंदा इसलिए कर रहा हूँ क्योंकि प्रदेश सरकार को इस पर कड़ी से कड़ी निंदा करनी चाहिए और प्रदेश सरकार को कड़े से कड़ा एक्शन लेना चाहिए और तुरंत लेना चाहिए, इससे ज्यादा क्या कह सकते हैं।





कांग्रेस नेता आनंद शर्मा द्वारा किए ट्वीट के संदर्भ में पूछे एक अन्य प्रश्न के उत्तर में डॉ. सिंघवी ने कहा कि जो पीसीसी स्तर पर कहना था, वो अलग आपने सुन लिया है। लेकिन मैं दो-तीन बिंदुओं को आपके सामने संज्ञान के लिए रखना चाहता हूं। जो यद्दपि जाने-माने हैं, लेकिन उनको जागरुक करना आवश्यक है। एक तो ये कि कांग्रेस ने सोच-समझ कर वार्तालाप, बातचीत के बाद 92 सीट पर एक सहमति लाए थे, कांग्रेस के हिस्से की, कांग्रेस के लिए, कांग्रेस इस पर लड़ेगी और वो पूरी तरह से पर्याप्त रुप से हमें मिली है। 



दूसरा, जो हमने एक गठबंधन बनाया है, उसमें अगर कुछ सीट दी गई हैं, जिसको आप आईएसएफ कहते हैं, तो वो 100 प्रतिशत सीपीएम के हिस्से से आई हैं। और अगर आप इस परिपेक्ष्य में देखें, तो थोड़ा पर्सपेक्टिव बदल जाता है। 



तीसरा, इसमें ये कभी नहीं भूल सकते हम कि ऐसे गठबंधन का सबसे प्रमुख, सबसे आगे वाला जो उद्देश्य है, और उद्देश्य भी होते हैं, लेकिन सबसे प्रमुख उद्देश्य है कि बीजेपी जैसी जो एक विशेष रुप की गुंडा राजनीति का प्रयोग करती है और जो बार-बार अपने आपको सबसे चमकता हुआ धर्म निरपेक्ष एक सिंबल कहलाती है और दूसरों को सांप्रदायिक कहती है, जो अपने आपमें एक मजाकिया वाक्य है, उसके विरुद्ध खड़े होने के लिए ये बनाया गया था। और इसलिए ये अति आवश्यक है कि ऐसे जो सबसे बड़ा शत्रु है हमारा वहाँ पर, ऐसे संघर्ष में हम लोग सब, कांग्रेस के सभी लोग, मेरे सभी वरिष्ठ साथी, मेरे सभी आदरणीय कुलीग, एकजुट होकर संघर्ष करें और किसी रुप से कुछ ऐसा ना होने दें, जिससे ये संघर्ष कमजोर हो, परोक्ष रूप से या सीधे रूप से|




एक अन्य प्रश्न के उत्तर में डॉ. सिंघवी ने कहा कि पार्टी ने जो कहना था, कोइंसिडेंस (coincidence) की बात है मैंने ही कहा था परसों या तरसों जब भी मैंने लिया था और आज भी मैंने ही कहा है, इसके अलावा पार्टी ने कुछ नहीं कहा है, ना कुछ कहा है। अब जो प्रश्न आप पूछ रहे हैं कि वो है कि कोई अमुक कांग्रेस मैन भारत के अमुक अंग में कोई भी मुद्दा उठाता है, तो उसका कोई पार्टी के ऊपर प्रश्न पूछने का और विरोधाभास का कोई सवाल ही नहीं उठता। विरोधाभास कहाँ है, जैसे आपका हक है कि आप एक भाषण दें, किसी और का हक है कि रिएक्ट करे।









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TVL News (TheViralLines) के संवाददाता। यह रिपोर्ट स्थानीय स्रोतों और उपलब्ध आधिकारिक जानकारी की पुष्टि के बाद प्रकाशित की गई है। किसी तथ्य में सुधार के लिए संपर्क करें या +91 99996 56869 पर WhatsApp करें।

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यह रिपोर्ट 2 मार्च 2021 को TVL News पर प्रकाशित हुई और 25 अगस्त 2026 को अपडेट की गई। नई जानकारी मिलने पर खबर को अपडेट किया जाता है।

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