नई दिल्ली: देश के सरकारी बैंकों के नौ लाख से ज्यादा कर्मचारी दूसरे दिन शुक्रवार को भी हड़ताल पर रहे। इससे सरकारी बैंकों में कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कर्मचारी सरकारी बैंकों के निजीकरण का विरोध कर रहे हैं। भाजपा सांसद वरुण गांधी ने भी कर्मचारियों के पक्ष में अपनी आवाज बुलंद करते हुए कहा है कि बैंकों के बढ़ते घाटे के लिए सरकारी बैंकों के कर्मचारियों को दोष देना ठीक नहीं है। सरकार को बैंकों का निजीकरण रोकना चाहिए।
भाजपा सांसद वरुण गांधी ने कहा,''एन पी ए वसूली में केवल बैंको की विफलता को आधार मानकर, बैंको के निजीकरण के प्रस्ताव का कोई औचित्य नहीं है। मेरी वित्त मंत्री जी से मार्मिक अपील है कि इससे प्रभावित सभी वर्गों से समग्र वार्ता करने के पश्चात ही बैंकिंग कानून (संसोधन) अधिनियम 2021 पर विचार किया जाए।
वरुण गांधी ने कहा,''''देश के सरकारी बैंकों में लगभग 10 लाख कर्मचारी काम करते हैं और वे केवल लाभ के लिए काम नहीं करते हैं, बल्कि इसके जरिये सूक्षम, लघु और माध्यम उद्योगों, गरीब लोगों को कर्ज भी देते हैं और सरकारी योजनाओं को लोगों तक पहुंचाने में मदद करते हैं।
उन्होंने कहा कि जैसा कि हम सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण की ओर बढ़ रहे हैं| हमें ध्यान देना चाहिए कि, वे स्वयं सहायता समूहों की मदद (फंड मुहैया) करते हैं, ग्रामीण बैंकिंग प्रदान करते हुए और एसएमई को ऋण देते हैं। सभी चीजें निजी बैंक नहीं देते सकते हैं| उन्होंने कहा कि बैंकों के निजीकरण के लिए बैंकों के बढ़ते घाटे के लिए कर्मचारियों को जिम्मेदार नहीं ठहराना चाहिए।